नमस्कार दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेयर मार्केट के जानकारी देता रहता हूँ जिससे आप अपनी इन्वेस्ट को काफी समझदारी से निवेश कर सकते हो धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो
30 days for invester success rulls
22th=days://
शेयर कब खरीदे और कब बेंचे?
प्रत्येक वस्तु दो कीमतों पर निर्भर होती है--आपका क्रय मूल्य और आपका विक्रय मूल्य। आपकी ये दोनों कीमते अच्छी होगी तो आपको अच्छा लाभ प्राप्त होगा। शेयर खरीदने का निर्णय करने और खरीदने से लेकर बेचने का निर्णय करने तक, आपका पूरा नियंत्रण होना चाहिए।
खरीदने का निर्णय, आवेग,उत्साह,अनुसन्धान या आपके व्यक्तित्व पर आधारित अन्य तरीकों पर निर्भर करता है। निवेशक शेयर तब खरीदते है जब उन्हें महसूस होता है कि खरीदना चाहिए लेकिन अच्छी "रिटर्न" देने वाले खरीद के अवसर हमेशां नही उपलब्ध होते। कई बार निवेशक, कीमत और मात्रा की दिशा देखे बगैर खरीद लेते है। यही कारण है कि बहुत से निवेशको को हानि उठानी पड़ती है।
आवेग,उत्तेजना या खरीदने की सिफारिश पड़ने देखने से संचालित शेयर खरीदने के निर्णयों के अंत बुरा होता है। सर्वप्रथम, आपकी खरीद,आपके द्वारा मूल्य-निवेश के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली, किसी भी पद्धति के प्रयोग पर आधारित होनी चाहिए और उसके बाद शेयर की कीमत और मात्रा में वृद्धि की जांच करनी चाहिए। जब कीमते, मात्रा के साथ न बढ़ रही हो तो शेयर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते,बेशक उन्हें चुनने का आपने कोई भी सिद्धांत प्रयोग किया हो।
आपके द्वारा शेयर खरीदने और बेचने के बीच की समयावधि में ही आपको लाभ या हानि का पता चलेगा। आपको किसी शेयर में बने रहने या उससे बाहर निकलने का निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ेगी।अधिकांश निवेशक लाभ देने वाले शेयरों को बहुत जल्द,हानि देने वाले शेयरों को बहुत देर से बेचते है या फिर वे पैसे की आवश्यकता के कारण शेयर बेचने को मजबूर हो जाते है।
आपका शेयर बेचना पैसे की आवश्यकता के कारण प्रभावित नही होना चाहिए। ऐसी बिक्री, हो सकता है,आपको शेयर की पूरी क्षमता प्राप्त न करने दे या आपको ऐसे समय शेयर बेचने को बाध्य कर दे,जो सही समय नही है।यह बिक्री लाभ और हानि के आधार पर होनी चाहिए। हानि पैदा करने वाले शेयर को बेच देना चाहिए। एक नुकसान देने वाले शेयर को "होल्ड' करके रखने का कोई कारण नही बनता,बेशक आपको लगता है कि बाद में यह भरपाई कर लेगा या अच्छा प्रदर्शन करेगा। लाभ देने वाले शेयरों को तभी बेचना चाहिए जब उनकी "मात्रा" में गिरावट आनी शुरू हो जाए और शेयर की कीमत स्थिर हो जाय या गिरने लगे।
निवेश की गलतियां,निवेशको के मन मे बैठे कई मिथकों के कारण होती है। "बाजार के समय" को नियंत्रित न करना, उनमे से एक है। आप बाजार की "टाइमिंग" करके पैसा बना सकते है। यहां तक कि सबसे अच्छे मूल्य निवेशक भी बाजार की "टाइमिंग" करते है। वे तब बाजार में प्रवेश करते है जब शेयर सस्ते होते है । 12 महीनों में 20 प्रतिशत का लाभ अर्जित करना व्यवहारिक नही है, जबकि आप यही लाभ एक सप्ताह में कमा सकते है।यह मिथक एक और बड़ा निवेश-दोष पैदा करता है और वह है "औषत" बनाना। कई बाजार विशेषज्ञ और विशेष रूप से म्यूच्यूअल फंड "नियमित निवेश करें" जैसे मिथक को बनाये रखते है। जो कि बाजार को "टाइमिंग" न करने की बात बताने का दूसरा तरीका है। हालांकि यह बिक्री की तकनीक के रूप में, म्यूच्यूअल फंडों के लिए काम कर सकता है। और उनमे नियमित धन की उपलब्धि करवा सकता है,लेकिन एक निवेशक के तौर पर यह आपको चोट पहुँचा सकता है।यदि आपने निवेज़ के लिए पांच शेयर चुने है तो उनमे से 1-2 ऐसे चुने जो कीमत में तेज वृद्धि दिखा सके और जिन्हें "मात्रा" में तेज वृद्धि का समर्थन प्राप्त हो।
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शेयर कब खरीदे और कब बेंचे?
प्रत्येक वस्तु दो कीमतों पर निर्भर होती है--आपका क्रय मूल्य और आपका विक्रय मूल्य। आपकी ये दोनों कीमते अच्छी होगी तो आपको अच्छा लाभ प्राप्त होगा। शेयर खरीदने का निर्णय करने और खरीदने से लेकर बेचने का निर्णय करने तक, आपका पूरा नियंत्रण होना चाहिए।
खरीदने का निर्णय, आवेग,उत्साह,अनुसन्धान या आपके व्यक्तित्व पर आधारित अन्य तरीकों पर निर्भर करता है। निवेशक शेयर तब खरीदते है जब उन्हें महसूस होता है कि खरीदना चाहिए लेकिन अच्छी "रिटर्न" देने वाले खरीद के अवसर हमेशां नही उपलब्ध होते। कई बार निवेशक, कीमत और मात्रा की दिशा देखे बगैर खरीद लेते है। यही कारण है कि बहुत से निवेशको को हानि उठानी पड़ती है।
आवेग,उत्तेजना या खरीदने की सिफारिश पड़ने देखने से संचालित शेयर खरीदने के निर्णयों के अंत बुरा होता है। सर्वप्रथम, आपकी खरीद,आपके द्वारा मूल्य-निवेश के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली, किसी भी पद्धति के प्रयोग पर आधारित होनी चाहिए और उसके बाद शेयर की कीमत और मात्रा में वृद्धि की जांच करनी चाहिए। जब कीमते, मात्रा के साथ न बढ़ रही हो तो शेयर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकते,बेशक उन्हें चुनने का आपने कोई भी सिद्धांत प्रयोग किया हो।
आपके द्वारा शेयर खरीदने और बेचने के बीच की समयावधि में ही आपको लाभ या हानि का पता चलेगा। आपको किसी शेयर में बने रहने या उससे बाहर निकलने का निर्णय लेने की आवश्यकता पड़ेगी।अधिकांश निवेशक लाभ देने वाले शेयरों को बहुत जल्द,हानि देने वाले शेयरों को बहुत देर से बेचते है या फिर वे पैसे की आवश्यकता के कारण शेयर बेचने को मजबूर हो जाते है।
आपका शेयर बेचना पैसे की आवश्यकता के कारण प्रभावित नही होना चाहिए। ऐसी बिक्री, हो सकता है,आपको शेयर की पूरी क्षमता प्राप्त न करने दे या आपको ऐसे समय शेयर बेचने को बाध्य कर दे,जो सही समय नही है।यह बिक्री लाभ और हानि के आधार पर होनी चाहिए। हानि पैदा करने वाले शेयर को बेच देना चाहिए। एक नुकसान देने वाले शेयर को "होल्ड' करके रखने का कोई कारण नही बनता,बेशक आपको लगता है कि बाद में यह भरपाई कर लेगा या अच्छा प्रदर्शन करेगा। लाभ देने वाले शेयरों को तभी बेचना चाहिए जब उनकी "मात्रा" में गिरावट आनी शुरू हो जाए और शेयर की कीमत स्थिर हो जाय या गिरने लगे।
निवेश की गलतियां,निवेशको के मन मे बैठे कई मिथकों के कारण होती है। "बाजार के समय" को नियंत्रित न करना, उनमे से एक है। आप बाजार की "टाइमिंग" करके पैसा बना सकते है। यहां तक कि सबसे अच्छे मूल्य निवेशक भी बाजार की "टाइमिंग" करते है। वे तब बाजार में प्रवेश करते है जब शेयर सस्ते होते है । 12 महीनों में 20 प्रतिशत का लाभ अर्जित करना व्यवहारिक नही है, जबकि आप यही लाभ एक सप्ताह में कमा सकते है।यह मिथक एक और बड़ा निवेश-दोष पैदा करता है और वह है "औषत" बनाना। कई बाजार विशेषज्ञ और विशेष रूप से म्यूच्यूअल फंड "नियमित निवेश करें" जैसे मिथक को बनाये रखते है। जो कि बाजार को "टाइमिंग" न करने की बात बताने का दूसरा तरीका है। हालांकि यह बिक्री की तकनीक के रूप में, म्यूच्यूअल फंडों के लिए काम कर सकता है। और उनमे नियमित धन की उपलब्धि करवा सकता है,लेकिन एक निवेशक के तौर पर यह आपको चोट पहुँचा सकता है।यदि आपने निवेज़ के लिए पांच शेयर चुने है तो उनमे से 1-2 ऐसे चुने जो कीमत में तेज वृद्धि दिखा सके और जिन्हें "मात्रा" में तेज वृद्धि का समर्थन प्राप्त हो।

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