बिग्गिंर निवेशक टिप
नमस्कार दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में स्टॉक मार्केट के बारे में अलग-अलग तरीको से जानकारिया देता हूँ जिससे आप सभी दोस्तों का निवेश के सम्बंध में परेशानी को कॉफी हद तक कम कर सकु जिससे आप सभी को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो
30 days for bigginer tip
25th= days
खरीदे और "होल्ड"करे जैसी कोई चीज नही होती लेकिन निवेशक फिर भी बार-बार यही कर रहे है। यदि आप "खरीदो" और "होल्ड" करो कि नीति अपनाते है तो नुकसान होना अवश्यभावी है।
बाजार की दिशा ओर मिजाज के आधार पर और आपके शेयर खरीदने के बाद से शेयर की दिशा के आधार पर,आपको अपनी रणनीति परिवर्तित करनी पड़ेगी।
जो भी हो आपको बाजार के प्रवाह को अनुसरण करना होगा न कि सैद्धांतिक "खरीदो" और "होल्ड" करो कि रणनीति का
"बुल-मार्किट", तेजी से आगे बढ़ने वाले शेयरों को खरीदे और उन्हें सिर्फ वृद्धि जारी रखने तक होल्ड करे। अपने आप को मूल्य और विकास आदि के बारे में समझाने का प्रयास न करे। यदि शेयर बढ़ना बन्द कर देते है तो उन्हें बेच दे। मन्दी बाजारों में,आपको मन्दी के बाजार की प्रकृति के आधार पर ही निर्णय लेना होगा। यदि बाजार की यह मन्दी, बिगड़ती आर्थिक स्थितियों के कारण है तो खरीद की कोई आवश्यकता नही है। यदि यह मन्दी इस कारण है कि लोगो ने अपनी क्षमता से अधिक निवेश कर लिया हो और अब उन्हें पैसे की तत्काल आवश्यकता है तो शेयरों में और गिरावट आएगी और ऐसे में, खरीदारी की कोई जरूरत नही है। यदि आपके पास कोई शेयर रखे है और अब बाजार में मन्दी है और यदि शेयर अपने क्रय-मूल्य से 10 प्रतिशत तक नीचे गिर जाते है तो उन्हें "होल्ड" करने की आवश्यकता नही है या उनमे उनके अधिकतम मूल्य से 10-20 प्रतिशत की गिरावट हुई है तो आपको पहले ही उन्हें बेच देना चाहिए था।
दुनिया का एक सबसे बड़ा वित्तीय केंद्र बड़ी दिलचस्प तस्वीर प्रस्तुत करता है कि क्यों "खरीदे" और होल्ड करे' कि रणनीति बेकार है।यदि आप "रियल एस्टेट' के क्षेत्र में होते,आप कोचीन में 17वी सदी में अचल संपत्ति के मालिक होते,18वी सदी में कलकत्ता में,19वी सदी में मुंबई में और शायद 1980 की शुरुवात में गुड़गांव में अचल संपत्ति के स्वामी होते। स्टॉक चुनने वाले के लिए, "खरीदे" और "होल्ड" करे की अपेक्षा पिछले बीस वर्षों में,टेक्सटाइल स्टॉक से सीमेंट स्टॉक में, वहां से टैक्नोलॉजी स्टॉक में, फिर वहां स्टील स्टॉक में स्थानांतरण अधिक समझदारी होती।
जब एक बड़ा बाजार-उन्माद ( जैसी प्रौधोगिकी ) या एक देश-उन्माद ( जैसे जापान, भारत ) ठंडा पड़ जाता है तो निवेशको की दिलचस्पी कहि और हो जाती है। एक बार बाजार की तेजी ठप्प होने पर ( विशेष रूप से उन्माद से भरी तेजी ) निवेशक शेयरों के विरुद्ध हो जाते है,विशेष रूप से पहली बार बने निवेशक (युवा जोड़ो की तरह, जो एक दूसरे से अलग होकर, परस्पर विद्वेषपूर्ण हो उठते है ) जो सबसे अधिक पीड़ित होते है। फिर से खरीदारी की शुरुआत करने के लिए आमतौर पर एक पीढ़ी का समय लग जाता है ( उन्मादपूर्ण बाजार के अंत पर ) इस तरह के बाजारों में, शेयरों लो होल्ड करने या और शेयर खरीदने की कोशिश न करे।
किसी किसी समय,कुछ सेक्टर अच्छा प्रदर्शन मरते है लेकिन अन्य नही। निवेशको को उन सेक्टरों की ओर मुड़ जाना चाहिए, जो लोगो का ध्यान अपनी ओर खींच रहे है और "रिटर्न" दे रहे है। इसके लिए आपको वे शेयर बेचने होंगे, जिनकी कीमते स्थिर है और आप उन शेयरों की ओर रुख कर जिनकी कीमते ऊपर उठ रही है।
नमस्कार दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में स्टॉक मार्केट के बारे में अलग-अलग तरीको से जानकारिया देता हूँ जिससे आप सभी दोस्तों का निवेश के सम्बंध में परेशानी को कॉफी हद तक कम कर सकु जिससे आप सभी को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो
30 days for bigginer tip
25th= days
"खरीदे" और "होल्ड" करें
खरीदे और "होल्ड"करे जैसी कोई चीज नही होती लेकिन निवेशक फिर भी बार-बार यही कर रहे है। यदि आप "खरीदो" और "होल्ड" करो कि नीति अपनाते है तो नुकसान होना अवश्यभावी है।
बाजार की दिशा ओर मिजाज के आधार पर और आपके शेयर खरीदने के बाद से शेयर की दिशा के आधार पर,आपको अपनी रणनीति परिवर्तित करनी पड़ेगी।
जो भी हो आपको बाजार के प्रवाह को अनुसरण करना होगा न कि सैद्धांतिक "खरीदो" और "होल्ड" करो कि रणनीति का
"बुल-मार्किट", तेजी से आगे बढ़ने वाले शेयरों को खरीदे और उन्हें सिर्फ वृद्धि जारी रखने तक होल्ड करे। अपने आप को मूल्य और विकास आदि के बारे में समझाने का प्रयास न करे। यदि शेयर बढ़ना बन्द कर देते है तो उन्हें बेच दे। मन्दी बाजारों में,आपको मन्दी के बाजार की प्रकृति के आधार पर ही निर्णय लेना होगा। यदि बाजार की यह मन्दी, बिगड़ती आर्थिक स्थितियों के कारण है तो खरीद की कोई आवश्यकता नही है। यदि यह मन्दी इस कारण है कि लोगो ने अपनी क्षमता से अधिक निवेश कर लिया हो और अब उन्हें पैसे की तत्काल आवश्यकता है तो शेयरों में और गिरावट आएगी और ऐसे में, खरीदारी की कोई जरूरत नही है। यदि आपके पास कोई शेयर रखे है और अब बाजार में मन्दी है और यदि शेयर अपने क्रय-मूल्य से 10 प्रतिशत तक नीचे गिर जाते है तो उन्हें "होल्ड" करने की आवश्यकता नही है या उनमे उनके अधिकतम मूल्य से 10-20 प्रतिशत की गिरावट हुई है तो आपको पहले ही उन्हें बेच देना चाहिए था।
दुनिया का एक सबसे बड़ा वित्तीय केंद्र बड़ी दिलचस्प तस्वीर प्रस्तुत करता है कि क्यों "खरीदे" और होल्ड करे' कि रणनीति बेकार है।यदि आप "रियल एस्टेट' के क्षेत्र में होते,आप कोचीन में 17वी सदी में अचल संपत्ति के मालिक होते,18वी सदी में कलकत्ता में,19वी सदी में मुंबई में और शायद 1980 की शुरुवात में गुड़गांव में अचल संपत्ति के स्वामी होते। स्टॉक चुनने वाले के लिए, "खरीदे" और "होल्ड" करे की अपेक्षा पिछले बीस वर्षों में,टेक्सटाइल स्टॉक से सीमेंट स्टॉक में, वहां से टैक्नोलॉजी स्टॉक में, फिर वहां स्टील स्टॉक में स्थानांतरण अधिक समझदारी होती।
जब एक बड़ा बाजार-उन्माद ( जैसी प्रौधोगिकी ) या एक देश-उन्माद ( जैसे जापान, भारत ) ठंडा पड़ जाता है तो निवेशको की दिलचस्पी कहि और हो जाती है। एक बार बाजार की तेजी ठप्प होने पर ( विशेष रूप से उन्माद से भरी तेजी ) निवेशक शेयरों के विरुद्ध हो जाते है,विशेष रूप से पहली बार बने निवेशक (युवा जोड़ो की तरह, जो एक दूसरे से अलग होकर, परस्पर विद्वेषपूर्ण हो उठते है ) जो सबसे अधिक पीड़ित होते है। फिर से खरीदारी की शुरुआत करने के लिए आमतौर पर एक पीढ़ी का समय लग जाता है ( उन्मादपूर्ण बाजार के अंत पर ) इस तरह के बाजारों में, शेयरों लो होल्ड करने या और शेयर खरीदने की कोशिश न करे।
किसी किसी समय,कुछ सेक्टर अच्छा प्रदर्शन मरते है लेकिन अन्य नही। निवेशको को उन सेक्टरों की ओर मुड़ जाना चाहिए, जो लोगो का ध्यान अपनी ओर खींच रहे है और "रिटर्न" दे रहे है। इसके लिए आपको वे शेयर बेचने होंगे, जिनकी कीमते स्थिर है और आप उन शेयरों की ओर रुख कर जिनकी कीमते ऊपर उठ रही है।

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