Success fully tips
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेयर बाजार में निवेश करते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में जानकारी दिया है धन्यवाद दोस्तो आपका दिन मंगलमय हो।
जाँच-परखकर करें निवेश,न कि देखा-देखी
निवेश करना भी एक कला है। यदि आपको यह कला समझ मे नही आती है तो किसी पेशेवर की सलाह ले और इस दौरान अपनी समझ विकसित करने के लिए भी प्रयासरत रहे। यदि आप किसी कॉम्पनी के फंडामेंटल जांचे-परखे बिना रातोरात लखपति बनने की इच्छा के साथ शेयरो का सौदा करेगे तो आपको रातोरात लाखो गवाने की तैयारी भी रखनी पड़ेगी। आप सिर्फ दुसरो को देखकर यह भ्रम पाल ले कि आपको दोस्त ने शेअर बाजार में पैसा कमाया है तो आप भी कम लेंगे, ऐसी मान्यता और आशा झूठी प्रमाणित होती है। शेयर बाजार में निवेश अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग परिणाम देता है। जब बाजार में निरन्तर तेजी का माहौल होता है तो जिन निवेशको ने बाजार में निवेश नही किया होता है वे यह सोचकर दुःखी होने लगते है कि लोग कमाकर ले गए और हम सोचते ही रह गए और इस सोंच के साथ बाजार में छलाँग लगा बैठते है। जल्दबाजी में ऐसे निवेशक न तो कंपनी के प्रबंधन को देख पाते है और न ही उनका पिछला रिकॉर्ड। जाहिर है ऐसे निवेश के साथ जोखिम का अनुपात भी कॉफी बड़ा होता है। यदि आप जुआरी की तरह जुआ समझकर निवेश करेंगे तो शेयर बाजार भी आपको जुआरी ही बनाएगा परन्तु यदि आप "सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट" समझकर निवेश करेगे तो आप एक सफल निवेशक बनेंगे। बाजार के विशेषज्ञ तो अक्सर इस बात पर आश्चर्य प्रकट करते है कि लोग 50-100 रुपये की चीज खरीदने बाजार में जाते है,तब तो उनका भाव,क़्वालिटी और अन्य कई चीजें देखते है,लेकिन हजारो रुपये के शेयर लेते वक्त अपने आंख-कान बन्द कर निवेश कैसे कर देते है?
यदि लाभदायक निवेश करना है तो इन बांतो पर ध्यान दे-//
(१)...केवल सूचीबध्द शेयर ही खरीदे।
(२)...केवल सक्रिय शेयर ही खरीदे।
(३)..बहुत कम शेयर होल्डरोवली कंपनी में निवेश न करे।
(४)..कंपनी का प्रबंधन देखे
(५)..कंपनी के कामकाज की विविधता तथा उसके विकास की संभावनाओ पर गौर करे।
(६)..कंपनी के वित्तीय हालात की जाँच-पड़ताल कर और वित्तीय जाँच-पड़ताल के लिए विभिन्न मापदण्डो जैसे प्रति शेयर बुक वैल्यू,रिजर्व,लाभ पुनर्निवेश,प्रति शेयर आमदनी,पी/ई अनुपात,यील्ड,आर,ओ,सी,ई, व पी/ई अनुपात आदि कसौटियों पर विभिन्न कंपनीयो को कसकर निवेश सबंधी निर्णय ले
( इन सभी वित्तीय मापदण्डो की किस प्रकार समझा जाय,)
निवेश में समय का महत्व-//
निवेश में समय का बहुत महत्व है। शेयर खरीदने या शेयर बेचने के लिए यदि सही समय की नब्ज को आपने पकड़ लिया तो समझिए,आपको निवेश से अच्छी आमदनी होगी। हालाँकि समय की नब्ज पकड़ना एक कला है,और यह कला अनुभव से आती है पर हम आपको कुछ सुझाव दे सकते है---//
(१)..यदि शेयर का दाम बुरी तरह गिर गया है तो उसके तुरन्त बाद उसे न बेचे।
(२)..शेयर के भाव का गिरना,उसे खरीदने का संकेत देता है।
(३)..अगर आप किसी मजबूत फ़ंडमेंटलवाली कंपनी के शेयर खरीदना चाहते है,लेकिन उसके भाव आपको ज्यादा लग रहे है तो आप तब तक सही भाव की तक मे बैठे रहे,जब तक कि निवेशको की भीड़ का उत्साह का शेयर के प्रति ठंडा नही पड़ जाता।
(४)...कंपनीयो की वार्षिक व अर्धवार्षिक रिपोर्ट पर नजर रखे और कंपनीयो द्वारा नई योजनाओं की घोषणा की खबर संचार माध्यमो द्वारा जानने के बाद यदि आपकी रुचि है तो उस शेयर को उसी दिन खरीद ले। इन जानकारियों से शेयरो की खरीदारों का दबाव बनता है और आपके द्वारा खरीदने से पहले शेयर की कीमत में वृद्धि हो जाती है।
(५).. यदि किसी शेयर में अचानक उछाल आये तो उसे खरीदने मत दौड़िये क्योकि यह देख गया है कि इस तरह अचानक भाव चढ़ने के बाद दुबारा 20%से 25%तक किमते नीचे गिर जाती है। यदि आप इस समय शेयर खरीदे तो आपको मुनाफा होगा।
तेजी व मंदी दोनों का लाभ उठाएं-//
ऐसा मन जाता है कि न तो तेजी लम्बे समय तक टिकती है और न ही मंदी का माहौल बहुत लंबे समय तक चलता है। तेजी के बाद मंदी और मंदी के बाद फिर तेजी---ये चक्र हर बाजार की नियति है तो शेयर बाजार इससे अछूता कैसे रह सकता है?इसलिए यदि निवेशक भी चक्र के अनुसार अपनी निवेश-नीति बनाए तो वह सफल हो सकता है।यदि तेजी के समय शेयरो को बेचा जाय और मंदी के समय खरीदा जाए तो निवेशक इस चक्र का फायदा उठा सकते है। लेकिन होता इसका एकदम उलटा-- तेजी के दौरान जब शेयर बाजार में उछाल आता है और ज्यादा शेयरों के दाम चढ़ने लगते है,तब निवेशक शेयर खरीदते है और जब मंदी का दौर आता है,तब उनके पास कम कीमतों पर अच्छी कंपनियां के शेअर खरीदने के लिए पैसे ही नही होते;क्योकि उन्होंने ऊँचे भावो में शेअर खरीदकर पैसों को फँसा दिया होता है।ऐसे में दोनों ही अवस्था का लाभ निवेशक नही उठा पाता। इसलिए बेहतर है कि आप अर्थव्यवस्था के नियम को भली-भांति समझ ले। तेजी का मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था में उसकी क्षमता से अधिक कार्य हो रहा है। जाहिर है,उसे सामान्य स्तर पर जाने के लिए मंदी का आना जरूरी है।
अधिकतम दाम की प्रतीक्षा न करे-///
ज्यादातर निवेशक इसी कोशिश में रहते है कि वे उस समय शेयर बेंचे,जब शेयर अधिकतम स्तर पर हो, ताकि उन्हें ज्यादा-से-ज्यादा मुनाफा हो। लेकिन निन्यानवे के फेर में पड़कर निवेशक सिर्फ अपने फायदे का कागजी प्रतिशत ही निकलते रह जाते है; क्योकि यह पाया गया है कि शेयरो के दाम अधिकतम स्तर पर पहुँचने के बाद अचानक कॉफी गिर जाते है इसलिए अधिकतम कीमत पाने की प्रतीक्षा न करे। जैसे ही पर्याप्त मुनाफा हो,शेयर बेंच दे।
रोजाना अपने शेयरो के नफे-नुकसान की गणना न करे-/
हमारे देश मे शेयरो में निवेश को लेकर मानसिक कॉफी भिन्न है। लोगो को लगता है कि यदि शेयरो में पैसा निवेश किया है तो तुरन्त दोगुना हो जायगा। ऐसी अपेक्षाएं रखनेवाले निवेशक निवेश के बाद प्रायः रोजाना उस शेयर की कीमत में हुई घट-बड़ को देखकर दुःखी व सुखी होते रहते है। कई बार ऐसा होता है कि कई महीनों तक कुछ शेयर बाजार में चलते ही नही है,क्योकि ऐसा सेक्टर में आई नकारात्मक खबर या सरकारी घोषणा के परिणामस्वरूप होता है। ऐसे में वे रिटेल निवेशक,जो रोजाना अपने शेयरो की कीमतों को देखते है,वे महीनों तक शेयर की यथावत स्थिति को देखकर तनाव से गुजरते है। ऐसे निवेशको के लिए आर्थिक सलाहकारो की सलाह है कि जब सावधि जमा (फिक्सड डिपॉज़िट),पी,पी,एफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड)आदि में निवेश कर निवेशक रोजाना बैंक जाकर यह नही पूछता की उसके निवेश में कितना वृद्धि हुई है तो शेयर खरीदने के दूसरे ही दिन से भाव जानने और उसके आधार पर कितना कमाया या कितना गवाया,यह जानने की इतनी उत्सुकता क्यो होती है? बेहतर तो यह होगा कि उसी तरह धैर्य रखें, जिस तरह अन्य जगह निवेश करते वक्त आप रखते है।
निवेशक क्या करें और क्या न करें://
क्या करें://
(१)..हमेशा सिक्यूरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) के द्वारा पंजीकृत वित्तीय बाजार संस्थाओं के साथ संबन्ध रखे।
(२)..अपने ब्रोकर से कॉन्ट्रेक्ट नोट लेना न भूले,क्योकि ट्रांजेक्शन पर एकाउंट स्टेटमेंट जरूर प्राप्त करे।
(३)..जिस दस्तावेज या कागजात को आप कॉम्पनी को भेजनेवाले है,उसकी फोटोकॉपी अपने पास रखे।
(४)..शेयर खरीदने से पहले यह सुनिशिचत कर ले कि आपके पास समुचित धन है या नही।
(५)..निवेश के सभी दस्तावेज जैसे एप्लीकेशन फॉर्म,कॉन्ट्रेक्ट नोट, अक्नॉलेजमेंट स्लिप आदि की कॉपी हमेसा अपने पास रखे।
(६)..यदि किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज को कहि भेजना है तो उसके लिए रजिस्टर्ड पोस्ट का इस्तेमालकरे ताकि डिलीवरी की सूचना आपको मिल जाए।
(७)..ब्रोकर/एजेंट/डिपाजिटरी पार्टिसिपेंट को हमेशा स्पष्ट निर्देश दे।
(८)..यदि ब्रोकर के साथ हुए सौदे में आपको सन्देह है तो एक्सचेंज की वेबसाइट पर उसकी वास्तविकता की पुष्टि कर।
(९)...कारोबार निवेश नीतियां अपनाते समय जोखिम उठाने की क्षमता का ख्याल रखे और यह जान ले कि शेयर बाजार में निवेश पर गारंटीशुदा रिटर्न नही मिलता।
क्या न करे-//
(१)..ऐसे ब्रोकर/सब ब्रोकर या बिचौलिए के साथ कारोबार न करे, जो गैर-पंजीकृत हो
(२)..टिप्स के आधार पर ट्रेडिंग न करे।
(३)..अपने डी-मैट रोजगार की रसीद बुक किसी को न दे और इंस्ट्रक्शन स्लिप को सँभालकर रखे।
(४)..अफवाहों के आधार पर ट्रेडिंग का निर्णय न ले।
(५)..गारंटीशुदा रिटर्न के वायदे के बहकावे में न आये।
(६)..पोस्टडेटेड चेक को भुगतान की गारंटी न माने।
(७)..सही व अधिकृत व्यक्ति से सलाह लेने में न हिचके।
(८)..निवेश करते समय आँख-कान खुले रखे।
(९)..कंपनीयो की विज्ञापनबाजी के बहकावे में न आएं।
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेयर बाजार में निवेश करते समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए उसके बारे में जानकारी दिया है धन्यवाद दोस्तो आपका दिन मंगलमय हो।
जाँच-परखकर करें निवेश,न कि देखा-देखी
निवेश करना भी एक कला है। यदि आपको यह कला समझ मे नही आती है तो किसी पेशेवर की सलाह ले और इस दौरान अपनी समझ विकसित करने के लिए भी प्रयासरत रहे। यदि आप किसी कॉम्पनी के फंडामेंटल जांचे-परखे बिना रातोरात लखपति बनने की इच्छा के साथ शेयरो का सौदा करेगे तो आपको रातोरात लाखो गवाने की तैयारी भी रखनी पड़ेगी। आप सिर्फ दुसरो को देखकर यह भ्रम पाल ले कि आपको दोस्त ने शेअर बाजार में पैसा कमाया है तो आप भी कम लेंगे, ऐसी मान्यता और आशा झूठी प्रमाणित होती है। शेयर बाजार में निवेश अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग परिणाम देता है। जब बाजार में निरन्तर तेजी का माहौल होता है तो जिन निवेशको ने बाजार में निवेश नही किया होता है वे यह सोचकर दुःखी होने लगते है कि लोग कमाकर ले गए और हम सोचते ही रह गए और इस सोंच के साथ बाजार में छलाँग लगा बैठते है। जल्दबाजी में ऐसे निवेशक न तो कंपनी के प्रबंधन को देख पाते है और न ही उनका पिछला रिकॉर्ड। जाहिर है ऐसे निवेश के साथ जोखिम का अनुपात भी कॉफी बड़ा होता है। यदि आप जुआरी की तरह जुआ समझकर निवेश करेंगे तो शेयर बाजार भी आपको जुआरी ही बनाएगा परन्तु यदि आप "सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट" समझकर निवेश करेगे तो आप एक सफल निवेशक बनेंगे। बाजार के विशेषज्ञ तो अक्सर इस बात पर आश्चर्य प्रकट करते है कि लोग 50-100 रुपये की चीज खरीदने बाजार में जाते है,तब तो उनका भाव,क़्वालिटी और अन्य कई चीजें देखते है,लेकिन हजारो रुपये के शेयर लेते वक्त अपने आंख-कान बन्द कर निवेश कैसे कर देते है?
यदि लाभदायक निवेश करना है तो इन बांतो पर ध्यान दे-//
(१)...केवल सूचीबध्द शेयर ही खरीदे।
(२)...केवल सक्रिय शेयर ही खरीदे।
(३)..बहुत कम शेयर होल्डरोवली कंपनी में निवेश न करे।
(४)..कंपनी का प्रबंधन देखे
(५)..कंपनी के कामकाज की विविधता तथा उसके विकास की संभावनाओ पर गौर करे।
(६)..कंपनी के वित्तीय हालात की जाँच-पड़ताल कर और वित्तीय जाँच-पड़ताल के लिए विभिन्न मापदण्डो जैसे प्रति शेयर बुक वैल्यू,रिजर्व,लाभ पुनर्निवेश,प्रति शेयर आमदनी,पी/ई अनुपात,यील्ड,आर,ओ,सी,ई, व पी/ई अनुपात आदि कसौटियों पर विभिन्न कंपनीयो को कसकर निवेश सबंधी निर्णय ले
( इन सभी वित्तीय मापदण्डो की किस प्रकार समझा जाय,)
निवेश में समय का महत्व-//
निवेश में समय का बहुत महत्व है। शेयर खरीदने या शेयर बेचने के लिए यदि सही समय की नब्ज को आपने पकड़ लिया तो समझिए,आपको निवेश से अच्छी आमदनी होगी। हालाँकि समय की नब्ज पकड़ना एक कला है,और यह कला अनुभव से आती है पर हम आपको कुछ सुझाव दे सकते है---//
(१)..यदि शेयर का दाम बुरी तरह गिर गया है तो उसके तुरन्त बाद उसे न बेचे।
(२)..शेयर के भाव का गिरना,उसे खरीदने का संकेत देता है।
(३)..अगर आप किसी मजबूत फ़ंडमेंटलवाली कंपनी के शेयर खरीदना चाहते है,लेकिन उसके भाव आपको ज्यादा लग रहे है तो आप तब तक सही भाव की तक मे बैठे रहे,जब तक कि निवेशको की भीड़ का उत्साह का शेयर के प्रति ठंडा नही पड़ जाता।
(४)...कंपनीयो की वार्षिक व अर्धवार्षिक रिपोर्ट पर नजर रखे और कंपनीयो द्वारा नई योजनाओं की घोषणा की खबर संचार माध्यमो द्वारा जानने के बाद यदि आपकी रुचि है तो उस शेयर को उसी दिन खरीद ले। इन जानकारियों से शेयरो की खरीदारों का दबाव बनता है और आपके द्वारा खरीदने से पहले शेयर की कीमत में वृद्धि हो जाती है।
(५).. यदि किसी शेयर में अचानक उछाल आये तो उसे खरीदने मत दौड़िये क्योकि यह देख गया है कि इस तरह अचानक भाव चढ़ने के बाद दुबारा 20%से 25%तक किमते नीचे गिर जाती है। यदि आप इस समय शेयर खरीदे तो आपको मुनाफा होगा।
तेजी व मंदी दोनों का लाभ उठाएं-//
ऐसा मन जाता है कि न तो तेजी लम्बे समय तक टिकती है और न ही मंदी का माहौल बहुत लंबे समय तक चलता है। तेजी के बाद मंदी और मंदी के बाद फिर तेजी---ये चक्र हर बाजार की नियति है तो शेयर बाजार इससे अछूता कैसे रह सकता है?इसलिए यदि निवेशक भी चक्र के अनुसार अपनी निवेश-नीति बनाए तो वह सफल हो सकता है।यदि तेजी के समय शेयरो को बेचा जाय और मंदी के समय खरीदा जाए तो निवेशक इस चक्र का फायदा उठा सकते है। लेकिन होता इसका एकदम उलटा-- तेजी के दौरान जब शेयर बाजार में उछाल आता है और ज्यादा शेयरों के दाम चढ़ने लगते है,तब निवेशक शेयर खरीदते है और जब मंदी का दौर आता है,तब उनके पास कम कीमतों पर अच्छी कंपनियां के शेअर खरीदने के लिए पैसे ही नही होते;क्योकि उन्होंने ऊँचे भावो में शेअर खरीदकर पैसों को फँसा दिया होता है।ऐसे में दोनों ही अवस्था का लाभ निवेशक नही उठा पाता। इसलिए बेहतर है कि आप अर्थव्यवस्था के नियम को भली-भांति समझ ले। तेजी का मतलब यह है कि अर्थव्यवस्था में उसकी क्षमता से अधिक कार्य हो रहा है। जाहिर है,उसे सामान्य स्तर पर जाने के लिए मंदी का आना जरूरी है।
अधिकतम दाम की प्रतीक्षा न करे-///
ज्यादातर निवेशक इसी कोशिश में रहते है कि वे उस समय शेयर बेंचे,जब शेयर अधिकतम स्तर पर हो, ताकि उन्हें ज्यादा-से-ज्यादा मुनाफा हो। लेकिन निन्यानवे के फेर में पड़कर निवेशक सिर्फ अपने फायदे का कागजी प्रतिशत ही निकलते रह जाते है; क्योकि यह पाया गया है कि शेयरो के दाम अधिकतम स्तर पर पहुँचने के बाद अचानक कॉफी गिर जाते है इसलिए अधिकतम कीमत पाने की प्रतीक्षा न करे। जैसे ही पर्याप्त मुनाफा हो,शेयर बेंच दे।
रोजाना अपने शेयरो के नफे-नुकसान की गणना न करे-/
हमारे देश मे शेयरो में निवेश को लेकर मानसिक कॉफी भिन्न है। लोगो को लगता है कि यदि शेयरो में पैसा निवेश किया है तो तुरन्त दोगुना हो जायगा। ऐसी अपेक्षाएं रखनेवाले निवेशक निवेश के बाद प्रायः रोजाना उस शेयर की कीमत में हुई घट-बड़ को देखकर दुःखी व सुखी होते रहते है। कई बार ऐसा होता है कि कई महीनों तक कुछ शेयर बाजार में चलते ही नही है,क्योकि ऐसा सेक्टर में आई नकारात्मक खबर या सरकारी घोषणा के परिणामस्वरूप होता है। ऐसे में वे रिटेल निवेशक,जो रोजाना अपने शेयरो की कीमतों को देखते है,वे महीनों तक शेयर की यथावत स्थिति को देखकर तनाव से गुजरते है। ऐसे निवेशको के लिए आर्थिक सलाहकारो की सलाह है कि जब सावधि जमा (फिक्सड डिपॉज़िट),पी,पी,एफ (पब्लिक प्रोविडेंट फंड)आदि में निवेश कर निवेशक रोजाना बैंक जाकर यह नही पूछता की उसके निवेश में कितना वृद्धि हुई है तो शेयर खरीदने के दूसरे ही दिन से भाव जानने और उसके आधार पर कितना कमाया या कितना गवाया,यह जानने की इतनी उत्सुकता क्यो होती है? बेहतर तो यह होगा कि उसी तरह धैर्य रखें, जिस तरह अन्य जगह निवेश करते वक्त आप रखते है।
निवेशक क्या करें और क्या न करें://
क्या करें://
(१)..हमेशा सिक्यूरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड (सेबी) के द्वारा पंजीकृत वित्तीय बाजार संस्थाओं के साथ संबन्ध रखे।
(२)..अपने ब्रोकर से कॉन्ट्रेक्ट नोट लेना न भूले,क्योकि ट्रांजेक्शन पर एकाउंट स्टेटमेंट जरूर प्राप्त करे।
(३)..जिस दस्तावेज या कागजात को आप कॉम्पनी को भेजनेवाले है,उसकी फोटोकॉपी अपने पास रखे।
(४)..शेयर खरीदने से पहले यह सुनिशिचत कर ले कि आपके पास समुचित धन है या नही।
(५)..निवेश के सभी दस्तावेज जैसे एप्लीकेशन फॉर्म,कॉन्ट्रेक्ट नोट, अक्नॉलेजमेंट स्लिप आदि की कॉपी हमेसा अपने पास रखे।
(६)..यदि किसी महत्वपूर्ण दस्तावेज को कहि भेजना है तो उसके लिए रजिस्टर्ड पोस्ट का इस्तेमालकरे ताकि डिलीवरी की सूचना आपको मिल जाए।
(७)..ब्रोकर/एजेंट/डिपाजिटरी पार्टिसिपेंट को हमेशा स्पष्ट निर्देश दे।
(८)..यदि ब्रोकर के साथ हुए सौदे में आपको सन्देह है तो एक्सचेंज की वेबसाइट पर उसकी वास्तविकता की पुष्टि कर।
(९)...कारोबार निवेश नीतियां अपनाते समय जोखिम उठाने की क्षमता का ख्याल रखे और यह जान ले कि शेयर बाजार में निवेश पर गारंटीशुदा रिटर्न नही मिलता।
क्या न करे-//
(१)..ऐसे ब्रोकर/सब ब्रोकर या बिचौलिए के साथ कारोबार न करे, जो गैर-पंजीकृत हो
(२)..टिप्स के आधार पर ट्रेडिंग न करे।
(३)..अपने डी-मैट रोजगार की रसीद बुक किसी को न दे और इंस्ट्रक्शन स्लिप को सँभालकर रखे।
(४)..अफवाहों के आधार पर ट्रेडिंग का निर्णय न ले।
(५)..गारंटीशुदा रिटर्न के वायदे के बहकावे में न आये।
(६)..पोस्टडेटेड चेक को भुगतान की गारंटी न माने।
(७)..सही व अधिकृत व्यक्ति से सलाह लेने में न हिचके।
(८)..निवेश करते समय आँख-कान खुले रखे।
(९)..कंपनीयो की विज्ञापनबाजी के बहकावे में न आएं।
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