निवेश के महत्वपूर्ण विकल्प
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में स्टॉक सम्बंधित जानकारियों के बारे में बताता हूं और इसमें निवेश के लोकप्रिय विकल्प के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दिया है धन्यवाद
।। दोस्तो आपका दिन सुभ हो
निवेश के लोकप्रिय विकल्प
क्या हो निवेश का सही तरीका ?
अपनी मेहनत की कमाई में से पाई-पाई जोड़कर जमा की गई पूँजी को निवेश करते वक्त अक्सर निवेशक के दिमाग मे यह सवाल सबसे पहले कौंधता है कि निवेश का कौन सा ऐसा विकल्प है,जहाँ मैं अपना पैसा निवेश करूँ ? निवेश कर लेने के बाद यदि निवेशक को उचित रिटर्न नही मिलता है तो उसके मन मे हमेशा यह सवाल बना रहता है कि क्यो मेरा निवेश बेहतर फायदा नही दे पा रहा है?ऐसी स्थिति में निवेशक के पास दो पास दो ही रास्ते होते है--पहला,वह उस निवेश से निकल जाए;दूसरा वह उस निवेश में घाटा खाने के बावजूद बना रहे। लेकिन ये दोनों ही रास्ते निवेशक के लिए सही नही है।तो सवाल यह खड़ा होता है कि आख़िर किया क्या जाए, ताकि आयसी स्थिति पैदा ही न होने पाए? इसके लिए जरूरी है कि हर निवेशक निवेश से पहले अपनी निवेश की जरूरत,उद्देश्य और अपनी जोखिम लेने की प्रवित्ति का विश्लेषण करें,इसके बाद ही निवेश के बारे में सोंचे।आइए,जानते है कि निवेश से पहले की प्रक्रिया को।
समझे निवेश की प्रक्रिया को-//
निवेश करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है दरअसल निवेश करते वक्त मुख्य रूप से तीन चीजो की आवश्यकता होती है--योजना ( प्लानिंग ),धैर्य और समय की। यदि इन्हें सही तरीके से कर लिया जाए तो निवेश आपके लिए कभी सिरदर्द नही बनेगा। अब जब आप निवेश के किसी एक माध्यम में निवेश करने का निर्णय ले चुके है तो निम्नलिखित बातो पर गौर करे---
(१)..आपका लक्ष्य क्या है?
(२)..लक्ष्य को प्राप्त करने की "अनुमानतः समय"क्या है?
यदि आपका लक्ष्य भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए निवेश करने की है तो जाहिर है,निवेश के लिए आपका "टाइम फ्रेम"ज्यादा होगा।
महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने निवेश का फायदा कितने समय बाद लेना चाहते है और उसके लिए बेहतर चुनाव कौन सा हो ,सकता है,जो आपके लक्ष्य को पूरा करे।
उदाहरण के लिए,यदि आपका लक्ष्य कार या कोई छोटी-मोटी संपत्ति खरीदना है तो जाहिर है,यह शॉर्ट टर्म लक्ष्य है।इसी तरह बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध करवाना मीडियम टर्म लक्ष्य है तो रिटायरमेंट प्लानिंग आपका लांग टर्म लक्ष्य है। चूँकि यदि लक्ष्य शॉर्ट टर्म,मीडियम टर्म या लांग टर्म है तो उसे प्राप्त करने के लिए निवेश के विभिन्न तरीकों में से उस तरीके का चयन मरना होगा,जो आपके निवेश के लक्ष्य को पूरा कर सके।
अब यदि शेयरो में निवेश की बात करे तो शेयरों में निवेश कॉफी जोखिम भरा होगा। यदि निवेशक शॉर्ट टर्म को ध्यान में रखकर निवेश किया जाए।
शेयरों में निवेश कर यदि आप अपनी पूँजी को बढ़ाना चाहते है तो इसके लिए आपको लांग टर्म के लिए निवेश करना होगा।
अपनी वित्तीय स्थिति पर गौर करें-//
आपको वित्तीय स्थिति ही तय करेगी कि आपके लिए निवेश का कौन सा तरीका सबसे बेहतर है। आप कितना पैसा नियमित तौर पर बचा सकते है और कितने लंबे समय तक ऐसा कर सकते है। यदि इसकी फौरी तौर पर गणना कर ली जाए तो निवेश करना कॉफी आसान हो जायेगा।
आप इस बात पर भी गौर करें कि आप पर कितने लोग निर्भर है। शॉर्ट टर्म लक्ष्यों को पाने के लिए यदि ज्यादा जोखिम लेकर आक्रामक निवेश-योजना में निवेश करते है तो पहले इमरजेंसी फण्ड,समुचित इंश्योरेंस और भविष्य को ध्यान में रखकर रिटायरमेंट योजना पर समुचित धन लगाकर ही ऐसा करे,वरना आप परेशानी में पड़ सकते है।
जोखिम लेने की क्षमता;//
निवेश से पहले यह निर्णय कर ले कि आप मे जोखिम लेने की कितनी क्षमता है। कही ऐसा न हो कि शेयरो में निवेश करने के बाद शेयरो की गिनती कीमत आपकी रातो की नींद ही उड़ा दी। आप मे यदि जोखिम लेने की क्षमता है,तभी आप जोखिम से जुड़ी निवेश योजनाएं---जैसे शेयर,म्यूच्यूअल फंड और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान ने निवेश करें। वरना बेहतर है कि फिजिकल असेट,जैसे---प्रॉपटी, सोना या बैंक में सावधि जमा,पोस्ट ऑफिस इंश्योरेंस व पब्लिक प्रोविडेंट फंड,सरकारी प्रतिभूतियों और डिबेंचर में निवेश करें।
यदि आप बिलकुल भी जोखिम नही लेना चाहते है तो शेयर बाजार आपके लिए नही है। यदि थोड़ा जोखिम लेने के लिए तैयार है तो अपनी बचत का 70%फिक्सड रिटर्न ( जैसे बैंक में सावधि जमा पर तयशुदा ब्याज मिलता है ) में निवेश कर और बाकी का इक्विटी में निवेश करें।
एक बार आपने अपना लक्ष्य निश्चित कर लिया, उसके लिए "टाइम फ्रेम" निर्धारित कर लिया,वित्तीय स्थिति का विश्लेषण कर लिया और जोखिम लेने की क्षमता को भी जान लिया तो आप स्वयं इस बात का निर्णय ले सकते है कि आपको विभिन्न असेट क्लास,जैसे इक्विटी ( शेयर ),डेब्ट ( गारंटीशुदा रिटर्न देनेवाले विकल्प ) और अन्य प्रकार,जैसे सोना व रियल एस्टेट में से किसमें, कितना निवेश करना है।
निवेश द्वारा महँगाई की दर से ज्यादा रिटर्न मील,यह जरूरी-//
निर्धारित "टाइम फ्रेम"में निवेश का सबसे अच्छा ऑप्शन तलाशते वक्त आपका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि बचत को जहाँ निवेश किया जा रहा है, वहाँ से सबसे ज्यादा रिटर्न मिले। लेकिन पूँजी के डूब जाने की खतरा और भय के चलते ज्यादातर निवेशक सिर्फ फिक्सड रिटर्न इंस्टुमेंट ( गारंटीशुदा रिटर्न देनेवाले निवेश के प्रकार ) में ही निवेश करना उचित समझते है। हालाँकि ऐसे इंस्टुमेंट निवेशक को निश्चनत्ता प्रदान करते है लेकिन यह भी सही है कि यहाँ आपके निवेश की ग्रोथ सीमित हो जाती है। कई बार तो ऐसे निवेश से मिलनेवाले रिटर्न महँगाई की दर से भी कम होता है। उन पर बैंक डिपॉज़िट,आर,बी,आई, बांड और छोटी बचत के अन्य तरीकों से मिलनेवाले रिटर्न पर जो टैक्स लगता है,उससे रिटर्न का प्रतिशत और भी कम हो जाता है।
इसलिए रिटर्न का प्रतिशत निकलते वक्त हमेशा यह देखे की महँगाई की दर कितनी है उदाहरण के लिए महँगाई की दर 10,5% है और बैंक में सावधि जमा पर आपको 10,5%रिटर्न मिल रहा है तो इसका मतलब आपको कोई फायदा नही हो रहा है।
इसलिए बेहतर है कि आप अपनी रिस्क प्रोफाइल ( जोखिम लेने की क्षमता ) टाइम हारिजन ( निर्धारित समय ),निवेश के उद्देश्य और टेक्स संबन्धी पहलुओं पर विचार करने के बाद उस जगह निवेश करें,जो महँगाई दर को पछाड़ने वाला रिटर्न दे सके।
आपके लिए जो बेहतर है वही बेहतर निवेश है
कई निवेशक अपने निवेश संबन्धी निर्णय लोगो की सलाह पर और बाजार की भेड़-चाल को देखकर कहते है। इतना ही नही,वे दूसरे की सलाह पर अपना "असेट अलोकेशन" भी बदल डालते है।
यदि आपको बाजार का उतार-चढ़ाव समझ मे न आए तो बेहतर है कि आप प्रोफेशनल एडवाइजर से सलाह लें, ताकि वह आपकी जरूरत को समझकर ऐसा हल दे सके,जो आपके निवेश के उद्देश्यों को पूरा कर सके।
लेकिन इसके साथ भी उतना ही जरूरी है कि आप अपना पोर्टफोलियो स्वंय जांचे और अपने एडवाइजर से लगातार प्रश्न करते रहे। यदि किसी विशेष योजना में लगातार बने रहने के लिए आपका एडवाइजर कहता है और आपको निवेशित धन लगातार डूबता दिखे तो पूछिये की ऐसा वह क्यो कह रहा है?
खरीदने व बेचने की सलाह जब भी एडवाइजर से मिले,आप उससे उसका कारण जरूर जाने। कभी भी यह सोचकर निवेश में देरी नही करनी चाहिए कि कहि गलत चुनाव आपको ले न दुबे;क्योकि निवेश लम्बी व सतत चलनिवाली प्रक्रिया है।और लंबे समय तक यदि लगातार निवेश किया जाय तो व्यक्ति अच्छी-खासी पूंजी बना सकता है एवं अस्थिरता से भी बच सकता है।
असेट अलोकेशन का महत्व-//
बहुत से निवेशक को यह लगता है कि उच्च रिटर्न पाना बिना ज्यादा जोखिम लिये नामुमकिन है। हालाँकि यह सही है,लेकिन यदि समुचित असेट अलोकेशन को "टूल"के तौर पर इस्तेमाल किया जाए तो न्यूनतम जोखिम में अधिकतम रिटर्न पाया जा सकता है। इसे क्रिकेट की भाषा मे समझे तो सही असेट अलोकेशन क्रिकेट टीम के चयन की तरह है। जैसे टीम का सही चयन जीत का महत्वपूर्ण कारक बनता है उसी तरह सही असेट अलोकेशन वेल्थ गेम को जीतने में महत्वपूर्ण कारक बनता है। दरअसल असेट अलोकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है,जिसमें आप यह निर्णय लेते है कि पूँजी को विभिन्न असेट क्लास और सेक्टर्स में कितना व किस तरह बाँटा जाए।
हाँ, यह पहले से अनुमान लगाना जरा मुश्किल होता है कि कौन सी असेट कैटेगरी निश्चित समय के बाद आपको कितना फायदा देगी। लेकिन इस तरकीब को समझ लिया जाए तो निवेश को सफल बनाया जा सकता है।
परिभाषा;//
असेट अलोकेशन का मतलब है---अपने पैसों को निवेश की विभिन्न श्रेणियों जैसे---शेयर,बांड, व नकदी आदि में निवेश कर विविधता का फायदा उठाना;और इसी विविधता से न सिर्फ जोखिम को कम करने में सहायता मिलती है,अपितु रिटर्न को बढ़ाने ने भी मदद मिलती हैं।आपके वित्तीय लक्ष्य---आपकी उम्र,जीवन-शैली और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर निर्भर करते है। लेकिन मौटे तौर पर यदि 3 मॉडल फोर्टफ़ोलिओ को आधार बनाया जाए तो स्वयं की अप्रोच के आधार पर फोर्टफ़ोलिओ का निर्माण कर सकते है।
(१)..आक्रामक पोर्टफोलियो
इस पोर्टफोलियो को बनानेवाले निवेशक में ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता होनी चाहिए,क्योकि ग्रोथ पर जोर देनेवाले इस पोर्टफोलियो में निवेश के लिए उपलब्ध धन का 65%स्टॉक्स में या इक्विटी म्यूच्यूअल फन्ड में 25%फिक्सड इनकम फन्ड के बांड में और 10%को शॉर्ट टर्म मनी मार्केट फन्ड में या नकदी के रूप में रखे जाने का सुझाव होता है।
विशेषग्यो का कहना है कि ऐसा पोर्टफ़ोलिओ उन निवेशको के लिए है जो लंबी अवधि को ध्यान में रखकर निवेश करते है।
यह पोर्टफोलियो शार्ट टर्म इमरजेंसी और मीडियम टर्म के लक्ष्य, जैसे घर बनाना आदि में सहायक हो सकता है,लेकिन मुख्य तौर पर यह लम्बी अवधि के लक्ष्यों जैसे रिटायरमेंट आदि को पूरा करने में मददगार साबित होता है---,
25%बांड में निवेश
10%नकदी या शार्ट टर्म में निवेश
65%शेयर में निवेश
(२)..मॉडरेट फोर्टफ़ोलिओ;//
50%बॉन्ड में निवेश
30% स्टॉक्स में निवेश
20% शॉर्ट टर्म में निवेश
इस पोर्टफोलियो में ग्रोथ और स्थायित्व दोनों को संतुलित किया जाता है। यहाँ कुल निवेश का 50% स्टॉक्स या इक्विटी में 30% पूँजी को बांड्स या फिक्सड इन्कम फन्ड और 20% शॉर्ट टर्म मनी फन्ड या नगदी योग्य रखा जाता है। यह पोर्टफोलियो निवेश को थोड़ी-,बहुत सुरक्षा के साथ नियमित आय भी प्रदान करता है। जहाँ इक्विटी घटक ग्रोथ के लिए पोर्टफोलियो प्रदान करता है,वही बांड्स और शॉर्ट टर्म इंस्टुमेंट शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाता है।
(३)..परंपरावादी पोर्टफोलियो
इस पोर्टफोलियो के अनुसार, निवेशित धन का 25% इक्विटी फन्ड में या शेयर में निवेश किया जाना चाहिए,25% मनी मार्केट फन्ड या नगदी समान योग्य स्थान पर निवेशित किया जाना चाहिए तथा 50% बांड या फिक्सड इन्कम फन्ड में निवेश किया जाना चाहिए। ये पोर्टफोलियो उनके लिए है,जो बहुत कम जोखिम लेने चाहते है या उनके लिए है जो सेवानिवृत्त है यहाँ 25% शेयरो में किया गया निवेश महँगाई दर को पछाड़ने में मदद साबित होता है।
50% बॉन्ड्स
25% स्टॉक्स
25% शॉर्ट टर्म
उपरोक्त असेट अलोकेशन का मतलब यह नही है कि आप इस निर्धारित,या वर्गीकरण पर हमेशा बने रहे,बल्कि जरूरी है कि आप अपने पोर्टफोलियो को समय-समय बदलते रहे,ताकि आप अपने लक्ष्य को पा सके। आप पोर्टफोलियो का पुनर्गठन करने के लिए फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद भी ले सकते है।
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में स्टॉक सम्बंधित जानकारियों के बारे में बताता हूं और इसमें निवेश के लोकप्रिय विकल्प के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दिया है धन्यवाद
।। दोस्तो आपका दिन सुभ हो
निवेश के लोकप्रिय विकल्प
क्या हो निवेश का सही तरीका ?
अपनी मेहनत की कमाई में से पाई-पाई जोड़कर जमा की गई पूँजी को निवेश करते वक्त अक्सर निवेशक के दिमाग मे यह सवाल सबसे पहले कौंधता है कि निवेश का कौन सा ऐसा विकल्प है,जहाँ मैं अपना पैसा निवेश करूँ ? निवेश कर लेने के बाद यदि निवेशक को उचित रिटर्न नही मिलता है तो उसके मन मे हमेशा यह सवाल बना रहता है कि क्यो मेरा निवेश बेहतर फायदा नही दे पा रहा है?ऐसी स्थिति में निवेशक के पास दो पास दो ही रास्ते होते है--पहला,वह उस निवेश से निकल जाए;दूसरा वह उस निवेश में घाटा खाने के बावजूद बना रहे। लेकिन ये दोनों ही रास्ते निवेशक के लिए सही नही है।तो सवाल यह खड़ा होता है कि आख़िर किया क्या जाए, ताकि आयसी स्थिति पैदा ही न होने पाए? इसके लिए जरूरी है कि हर निवेशक निवेश से पहले अपनी निवेश की जरूरत,उद्देश्य और अपनी जोखिम लेने की प्रवित्ति का विश्लेषण करें,इसके बाद ही निवेश के बारे में सोंचे।आइए,जानते है कि निवेश से पहले की प्रक्रिया को।
समझे निवेश की प्रक्रिया को-//
निवेश करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है दरअसल निवेश करते वक्त मुख्य रूप से तीन चीजो की आवश्यकता होती है--योजना ( प्लानिंग ),धैर्य और समय की। यदि इन्हें सही तरीके से कर लिया जाए तो निवेश आपके लिए कभी सिरदर्द नही बनेगा। अब जब आप निवेश के किसी एक माध्यम में निवेश करने का निर्णय ले चुके है तो निम्नलिखित बातो पर गौर करे---
(१)..आपका लक्ष्य क्या है?
(२)..लक्ष्य को प्राप्त करने की "अनुमानतः समय"क्या है?
यदि आपका लक्ष्य भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए निवेश करने की है तो जाहिर है,निवेश के लिए आपका "टाइम फ्रेम"ज्यादा होगा।
महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने निवेश का फायदा कितने समय बाद लेना चाहते है और उसके लिए बेहतर चुनाव कौन सा हो ,सकता है,जो आपके लक्ष्य को पूरा करे।
उदाहरण के लिए,यदि आपका लक्ष्य कार या कोई छोटी-मोटी संपत्ति खरीदना है तो जाहिर है,यह शॉर्ट टर्म लक्ष्य है।इसी तरह बच्चों को अच्छी शिक्षा उपलब्ध करवाना मीडियम टर्म लक्ष्य है तो रिटायरमेंट प्लानिंग आपका लांग टर्म लक्ष्य है। चूँकि यदि लक्ष्य शॉर्ट टर्म,मीडियम टर्म या लांग टर्म है तो उसे प्राप्त करने के लिए निवेश के विभिन्न तरीकों में से उस तरीके का चयन मरना होगा,जो आपके निवेश के लक्ष्य को पूरा कर सके।
अब यदि शेयरो में निवेश की बात करे तो शेयरों में निवेश कॉफी जोखिम भरा होगा। यदि निवेशक शॉर्ट टर्म को ध्यान में रखकर निवेश किया जाए।
शेयरों में निवेश कर यदि आप अपनी पूँजी को बढ़ाना चाहते है तो इसके लिए आपको लांग टर्म के लिए निवेश करना होगा।
अपनी वित्तीय स्थिति पर गौर करें-//
आपको वित्तीय स्थिति ही तय करेगी कि आपके लिए निवेश का कौन सा तरीका सबसे बेहतर है। आप कितना पैसा नियमित तौर पर बचा सकते है और कितने लंबे समय तक ऐसा कर सकते है। यदि इसकी फौरी तौर पर गणना कर ली जाए तो निवेश करना कॉफी आसान हो जायेगा।
आप इस बात पर भी गौर करें कि आप पर कितने लोग निर्भर है। शॉर्ट टर्म लक्ष्यों को पाने के लिए यदि ज्यादा जोखिम लेकर आक्रामक निवेश-योजना में निवेश करते है तो पहले इमरजेंसी फण्ड,समुचित इंश्योरेंस और भविष्य को ध्यान में रखकर रिटायरमेंट योजना पर समुचित धन लगाकर ही ऐसा करे,वरना आप परेशानी में पड़ सकते है।
जोखिम लेने की क्षमता;//
निवेश से पहले यह निर्णय कर ले कि आप मे जोखिम लेने की कितनी क्षमता है। कही ऐसा न हो कि शेयरो में निवेश करने के बाद शेयरो की गिनती कीमत आपकी रातो की नींद ही उड़ा दी। आप मे यदि जोखिम लेने की क्षमता है,तभी आप जोखिम से जुड़ी निवेश योजनाएं---जैसे शेयर,म्यूच्यूअल फंड और यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान ने निवेश करें। वरना बेहतर है कि फिजिकल असेट,जैसे---प्रॉपटी, सोना या बैंक में सावधि जमा,पोस्ट ऑफिस इंश्योरेंस व पब्लिक प्रोविडेंट फंड,सरकारी प्रतिभूतियों और डिबेंचर में निवेश करें।
यदि आप बिलकुल भी जोखिम नही लेना चाहते है तो शेयर बाजार आपके लिए नही है। यदि थोड़ा जोखिम लेने के लिए तैयार है तो अपनी बचत का 70%फिक्सड रिटर्न ( जैसे बैंक में सावधि जमा पर तयशुदा ब्याज मिलता है ) में निवेश कर और बाकी का इक्विटी में निवेश करें।
एक बार आपने अपना लक्ष्य निश्चित कर लिया, उसके लिए "टाइम फ्रेम" निर्धारित कर लिया,वित्तीय स्थिति का विश्लेषण कर लिया और जोखिम लेने की क्षमता को भी जान लिया तो आप स्वयं इस बात का निर्णय ले सकते है कि आपको विभिन्न असेट क्लास,जैसे इक्विटी ( शेयर ),डेब्ट ( गारंटीशुदा रिटर्न देनेवाले विकल्प ) और अन्य प्रकार,जैसे सोना व रियल एस्टेट में से किसमें, कितना निवेश करना है।
निवेश द्वारा महँगाई की दर से ज्यादा रिटर्न मील,यह जरूरी-//
निर्धारित "टाइम फ्रेम"में निवेश का सबसे अच्छा ऑप्शन तलाशते वक्त आपका मुख्य उद्देश्य यह होता है कि बचत को जहाँ निवेश किया जा रहा है, वहाँ से सबसे ज्यादा रिटर्न मिले। लेकिन पूँजी के डूब जाने की खतरा और भय के चलते ज्यादातर निवेशक सिर्फ फिक्सड रिटर्न इंस्टुमेंट ( गारंटीशुदा रिटर्न देनेवाले निवेश के प्रकार ) में ही निवेश करना उचित समझते है। हालाँकि ऐसे इंस्टुमेंट निवेशक को निश्चनत्ता प्रदान करते है लेकिन यह भी सही है कि यहाँ आपके निवेश की ग्रोथ सीमित हो जाती है। कई बार तो ऐसे निवेश से मिलनेवाले रिटर्न महँगाई की दर से भी कम होता है। उन पर बैंक डिपॉज़िट,आर,बी,आई, बांड और छोटी बचत के अन्य तरीकों से मिलनेवाले रिटर्न पर जो टैक्स लगता है,उससे रिटर्न का प्रतिशत और भी कम हो जाता है।
इसलिए रिटर्न का प्रतिशत निकलते वक्त हमेशा यह देखे की महँगाई की दर कितनी है उदाहरण के लिए महँगाई की दर 10,5% है और बैंक में सावधि जमा पर आपको 10,5%रिटर्न मिल रहा है तो इसका मतलब आपको कोई फायदा नही हो रहा है।
इसलिए बेहतर है कि आप अपनी रिस्क प्रोफाइल ( जोखिम लेने की क्षमता ) टाइम हारिजन ( निर्धारित समय ),निवेश के उद्देश्य और टेक्स संबन्धी पहलुओं पर विचार करने के बाद उस जगह निवेश करें,जो महँगाई दर को पछाड़ने वाला रिटर्न दे सके।
आपके लिए जो बेहतर है वही बेहतर निवेश है
कई निवेशक अपने निवेश संबन्धी निर्णय लोगो की सलाह पर और बाजार की भेड़-चाल को देखकर कहते है। इतना ही नही,वे दूसरे की सलाह पर अपना "असेट अलोकेशन" भी बदल डालते है।
यदि आपको बाजार का उतार-चढ़ाव समझ मे न आए तो बेहतर है कि आप प्रोफेशनल एडवाइजर से सलाह लें, ताकि वह आपकी जरूरत को समझकर ऐसा हल दे सके,जो आपके निवेश के उद्देश्यों को पूरा कर सके।
लेकिन इसके साथ भी उतना ही जरूरी है कि आप अपना पोर्टफोलियो स्वंय जांचे और अपने एडवाइजर से लगातार प्रश्न करते रहे। यदि किसी विशेष योजना में लगातार बने रहने के लिए आपका एडवाइजर कहता है और आपको निवेशित धन लगातार डूबता दिखे तो पूछिये की ऐसा वह क्यो कह रहा है?
खरीदने व बेचने की सलाह जब भी एडवाइजर से मिले,आप उससे उसका कारण जरूर जाने। कभी भी यह सोचकर निवेश में देरी नही करनी चाहिए कि कहि गलत चुनाव आपको ले न दुबे;क्योकि निवेश लम्बी व सतत चलनिवाली प्रक्रिया है।और लंबे समय तक यदि लगातार निवेश किया जाय तो व्यक्ति अच्छी-खासी पूंजी बना सकता है एवं अस्थिरता से भी बच सकता है।
असेट अलोकेशन का महत्व-//
बहुत से निवेशक को यह लगता है कि उच्च रिटर्न पाना बिना ज्यादा जोखिम लिये नामुमकिन है। हालाँकि यह सही है,लेकिन यदि समुचित असेट अलोकेशन को "टूल"के तौर पर इस्तेमाल किया जाए तो न्यूनतम जोखिम में अधिकतम रिटर्न पाया जा सकता है। इसे क्रिकेट की भाषा मे समझे तो सही असेट अलोकेशन क्रिकेट टीम के चयन की तरह है। जैसे टीम का सही चयन जीत का महत्वपूर्ण कारक बनता है उसी तरह सही असेट अलोकेशन वेल्थ गेम को जीतने में महत्वपूर्ण कारक बनता है। दरअसल असेट अलोकेशन एक ऐसी प्रक्रिया है,जिसमें आप यह निर्णय लेते है कि पूँजी को विभिन्न असेट क्लास और सेक्टर्स में कितना व किस तरह बाँटा जाए।
हाँ, यह पहले से अनुमान लगाना जरा मुश्किल होता है कि कौन सी असेट कैटेगरी निश्चित समय के बाद आपको कितना फायदा देगी। लेकिन इस तरकीब को समझ लिया जाए तो निवेश को सफल बनाया जा सकता है।
परिभाषा;//
असेट अलोकेशन का मतलब है---अपने पैसों को निवेश की विभिन्न श्रेणियों जैसे---शेयर,बांड, व नकदी आदि में निवेश कर विविधता का फायदा उठाना;और इसी विविधता से न सिर्फ जोखिम को कम करने में सहायता मिलती है,अपितु रिटर्न को बढ़ाने ने भी मदद मिलती हैं।आपके वित्तीय लक्ष्य---आपकी उम्र,जीवन-शैली और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर निर्भर करते है। लेकिन मौटे तौर पर यदि 3 मॉडल फोर्टफ़ोलिओ को आधार बनाया जाए तो स्वयं की अप्रोच के आधार पर फोर्टफ़ोलिओ का निर्माण कर सकते है।
(१)..आक्रामक पोर्टफोलियो
इस पोर्टफोलियो को बनानेवाले निवेशक में ज्यादा जोखिम लेने की क्षमता होनी चाहिए,क्योकि ग्रोथ पर जोर देनेवाले इस पोर्टफोलियो में निवेश के लिए उपलब्ध धन का 65%स्टॉक्स में या इक्विटी म्यूच्यूअल फन्ड में 25%फिक्सड इनकम फन्ड के बांड में और 10%को शॉर्ट टर्म मनी मार्केट फन्ड में या नकदी के रूप में रखे जाने का सुझाव होता है।
विशेषग्यो का कहना है कि ऐसा पोर्टफ़ोलिओ उन निवेशको के लिए है जो लंबी अवधि को ध्यान में रखकर निवेश करते है।
यह पोर्टफोलियो शार्ट टर्म इमरजेंसी और मीडियम टर्म के लक्ष्य, जैसे घर बनाना आदि में सहायक हो सकता है,लेकिन मुख्य तौर पर यह लम्बी अवधि के लक्ष्यों जैसे रिटायरमेंट आदि को पूरा करने में मददगार साबित होता है---,
25%बांड में निवेश
10%नकदी या शार्ट टर्म में निवेश
65%शेयर में निवेश
(२)..मॉडरेट फोर्टफ़ोलिओ;//
50%बॉन्ड में निवेश
30% स्टॉक्स में निवेश
20% शॉर्ट टर्म में निवेश
इस पोर्टफोलियो में ग्रोथ और स्थायित्व दोनों को संतुलित किया जाता है। यहाँ कुल निवेश का 50% स्टॉक्स या इक्विटी में 30% पूँजी को बांड्स या फिक्सड इन्कम फन्ड और 20% शॉर्ट टर्म मनी फन्ड या नगदी योग्य रखा जाता है। यह पोर्टफोलियो निवेश को थोड़ी-,बहुत सुरक्षा के साथ नियमित आय भी प्रदान करता है। जहाँ इक्विटी घटक ग्रोथ के लिए पोर्टफोलियो प्रदान करता है,वही बांड्स और शॉर्ट टर्म इंस्टुमेंट शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाता है।
(३)..परंपरावादी पोर्टफोलियो
इस पोर्टफोलियो के अनुसार, निवेशित धन का 25% इक्विटी फन्ड में या शेयर में निवेश किया जाना चाहिए,25% मनी मार्केट फन्ड या नगदी समान योग्य स्थान पर निवेशित किया जाना चाहिए तथा 50% बांड या फिक्सड इन्कम फन्ड में निवेश किया जाना चाहिए। ये पोर्टफोलियो उनके लिए है,जो बहुत कम जोखिम लेने चाहते है या उनके लिए है जो सेवानिवृत्त है यहाँ 25% शेयरो में किया गया निवेश महँगाई दर को पछाड़ने में मदद साबित होता है।
50% बॉन्ड्स
25% स्टॉक्स
25% शॉर्ट टर्म
उपरोक्त असेट अलोकेशन का मतलब यह नही है कि आप इस निर्धारित,या वर्गीकरण पर हमेशा बने रहे,बल्कि जरूरी है कि आप अपने पोर्टफोलियो को समय-समय बदलते रहे,ताकि आप अपने लक्ष्य को पा सके। आप पोर्टफोलियो का पुनर्गठन करने के लिए फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद भी ले सकते है।
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