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हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेयर में सफलता प्राप्त करने का महत्वपूर्ण फार्मूला के बारे में बताया हु जिसे आपलोग अपनाकर अपने इंवेशटिंग मे कामयाबी पा सकते है धन्यवाद दोस्तो
शेयर बाजार में सफलता का सुपर हिट्स फार्मूला
शेयर बाजार धन-लाभ कमाकर आपका बेड़ा पार भी करा सकता है तो आपको गाड़ी कमाई को निगलकर आपका बेड़ा डुबो भी सकता है। यदि किसी निवेशक को यह बात भली-भांति समझ मे आ जाए कि शेयर बाजार के कुछ नियम और मंत्र होते है,जिन पर यदि चला जाए तो शेअर बाजार में आपका बेड़ा आसानी से पर हो सकता है। सबसे पहले तो आप यह बात गाँठ बाँध लीजिए कि सामान्य स्थिति में शेयरो में निवेश भी अन्य कारोबार की तरह ही होता है,जहाँ सफलता के लिए धैर्य,परिश्रम और लगन की आवश्यकता होती है। हमे सफल निवेश के लिए कुछ जरूरी बातो पर ध्यान देना जरूरी है । हो सकता है कि कुछ बातें आपको परस्पर विरोधी लगे; लेकिन इससे आपको परेशान होने की जरूरत नही है,क्योकि शेयर बाजार की स्थिति हमेशा बदलती रहती है। अतः बाजार की बदलती स्थितियों के अनुसार अलग-अलग नीति का प्रयोग करना आवश्यक हो जाता है और निवेशक को इस बात का पूरा अधिकार है कि वह अपनी जरूरत तथा अपने विवेक से सही नीति का चयन करें । लेकिन फिर भी,कुछ नियम ऐसे है,जिनका पालन करना फायदेमंद साबित होता है।
टिप्स पर नही,विवेक के आधार पर निर्णय लेवें;//
शेयर बाजार में टिप्स की टिप-टिप बारिस की बूंदों की तरह गिरती है। निवेशक को ब्रोकर के द्वारा तथा अपने आस-पास के लोगो से टिप्स थोक मात्रा में बिल्कुल मुफ्त मिलती है। इन टिप्स में सलाहों का पुलिंदा होता है कि अमुक शेयर खरीद लो,2 महीने में इसकी कीमत 2 गुनी मिल जायेगी या इस शेयर को बेंच दो,क्योकि यह कंपनी दिवालिया होने वाली है आदि। बाजार की भाषा मे इसे "टिप्स" कहा जाता है। दरअसल आपरेटर और सटोरियों भारी मात्रा में "टिप्स कल्चर" को फैलाते है,जिससे बाजार में अफवाहों पर आधारित जानकारी फैलती है। इसलिए निवेशको को बाजार में फैली अफवाहों--जो उसे "टिप्स" के रूप में मिलती है---से सावधान रहना चाहिए। चूँकि टिप्स का कोई ठोस आधार नही होता है,इसलिए यदि निवेशक टिप्स के आधार पर निवेश करता है तो ऐसे सौदे में जोखिम कहि ज्यादा होती है। बाजार में जब तेजी का दौर होता है,तब बाजार में "टिप्स कल्चर" इतनी तेजी से विकसित हो जाती है कि बहुत से निवेशक टिप्स के प्रलोभन में आकर निवेश कर बैठते हैऔर जब उनकी मेहनत की कमाई से खरीदे गए शेयर कुछ समय बाद तेजी से नीचे गिरते है तो सिवाय पश्चाताप के वे कुछ नही कर पाते।
इसीलिए यदि शेयर बाजार में सफल होना है तो आस-पास से मिली टिप्स पर ध्यान न दे।यदि आपको ब्रोकर अन्य साथियों द्वारा यह सूचना मिली कि अमुक शेयर में लगातार तेजी दिखाई दे रही है,इसलिए इसे खरीद लेना चाहिए तो आप उस टिप्स को सुने और उस पर विचार करे कि कही ये शेयर सिर्फ इसलिए तो नही चल रहा,क्योकि बाजार में तेजी है या वास्तव में कंपनी द्वारा कुछ सकारात्मक घोषणाएं हुई है।
कई बार ऐसा भी पाया गया है कि ऑपरेटर्स व सटोरिए निजी स्वार्थों के लिए किसी शेयर-विशेष के भाव कृत्रिम रूप से बड़ा देते है,और ऐसा वे खुद खरितदारी करके करते है,ताकि उनके कथन की पुष्टि हो जाए। आयसी स्थिति में कई बार नए निवेशक के साथ अनुभवी भी इस जाल में फँस जाते है;क्योकि इस कृत्रिम खरीद के दौरान रोजाना अमुक शेयर के भाव बढ़ते जाए है, जिससे नए लोगो का भी ऐसे शेयर में विश्वास बढ़ने लगता है। ऐसे में निवेशको द्वारा जब भारी पैमाने पर ऊँचे दाम पर खरीद होने लगती है तो जिन लोगो ने इस कृत्रिम तेजी का जाल बना था, वे लोग अपने कम भाव पर खरीदे गए शेयर ऊँचे भाव पर इन नए निवेशको को बेचते जाते है। एक स्थिति ऐसी आती है जब शेयरो का भाव बढ़ना बन्द हो जाता है और ऊँचे भाब पर शेयर बाजार के खिलाड़ी शेयर खरीदना बन्द कर देते है और फिर बिकवाली के दबाव में भाव गिरने शुरू हो जाते हैं। "पंप एंड डंप"की इस रणनीति में मुश्किल में वे निवेशक पड़ जाते है,जिन्होंने ऊँचे भाव मे शेयर खरीदे थे। ऐसी स्थिति में वे या तो घाटे में शेअर बेचकर इस तंत्र का शिकार बनते है या फिर इस आशा में ऐसे शेयर को संजोकर रखते है कि शायद कभी उसका भाव ऊँचा आ जाए। लेकिन ज्यादातर देखा गया है कि ऐसे गुमनाम शेयर वापस कभी ऊपर नही आते और बाद में ऐसी स्थिति आती है कि उन्हें रद्दी की टोकरी में फेंक देना पड़ता है। इसलिए "टिप्स"सुनिए जरूर,लेकिन निर्णय अपने विवेक से ही कीजिए।
इसीलिए यदि शेयर बाजार में सफल होना है तो आस-पास से मिली टिप्स पर ध्यान न दे।यदि आपको ब्रोकर अन्य साथियों द्वारा यह सूचना मिली कि अमुक शेयर में लगातार तेजी दिखाई दे रही है,इसलिए इसे खरीद लेना चाहिए तो आप उस टिप्स को सुने और उस पर विचार करे कि कही ये शेयर सिर्फ इसलिए तो नही चल रहा,क्योकि बाजार में तेजी है या वास्तव में कंपनी द्वारा कुछ सकारात्मक घोषणाएं हुई है।
कई बार ऐसा भी पाया गया है कि ऑपरेटर्स व सटोरिए निजी स्वार्थों के लिए किसी शेयर-विशेष के भाव कृत्रिम रूप से बड़ा देते है,और ऐसा वे खुद खरितदारी करके करते है,ताकि उनके कथन की पुष्टि हो जाए। आयसी स्थिति में कई बार नए निवेशक के साथ अनुभवी भी इस जाल में फँस जाते है;क्योकि इस कृत्रिम खरीद के दौरान रोजाना अमुक शेयर के भाव बढ़ते जाए है, जिससे नए लोगो का भी ऐसे शेयर में विश्वास बढ़ने लगता है। ऐसे में निवेशको द्वारा जब भारी पैमाने पर ऊँचे दाम पर खरीद होने लगती है तो जिन लोगो ने इस कृत्रिम तेजी का जाल बना था, वे लोग अपने कम भाव पर खरीदे गए शेयर ऊँचे भाव पर इन नए निवेशको को बेचते जाते है। एक स्थिति ऐसी आती है जब शेयरो का भाव बढ़ना बन्द हो जाता है और ऊँचे भाब पर शेयर बाजार के खिलाड़ी शेयर खरीदना बन्द कर देते है और फिर बिकवाली के दबाव में भाव गिरने शुरू हो जाते हैं। "पंप एंड डंप"की इस रणनीति में मुश्किल में वे निवेशक पड़ जाते है,जिन्होंने ऊँचे भाव मे शेयर खरीदे थे। ऐसी स्थिति में वे या तो घाटे में शेअर बेचकर इस तंत्र का शिकार बनते है या फिर इस आशा में ऐसे शेयर को संजोकर रखते है कि शायद कभी उसका भाव ऊँचा आ जाए। लेकिन ज्यादातर देखा गया है कि ऐसे गुमनाम शेयर वापस कभी ऊपर नही आते और बाद में ऐसी स्थिति आती है कि उन्हें रद्दी की टोकरी में फेंक देना पड़ता है। इसलिए "टिप्स"सुनिए जरूर,लेकिन निर्णय अपने विवेक से ही कीजिए।
निवेश का नजरिया हो दीर्घकालिन://
प्रतिदिन या सप्ताह बदलनेवाले शेयरो के भाव अफवाहों,गलत जानकारी,ग्लोबल कारकों,सरकारी उठा-पटक या कंपनी के बारे में उड़ाई गई गलत खबरों से भी प्रभावित हो जाते है; क्योकि खबरों पर होनेवाली जनता की प्रतिक्रिया का शेयरो की कीमत पर भी खासा प्रभाव पड़ता है। यदि आपने दीर्घकालीन नजरिए ( लॉन्ग टर्म ) के आधार पर शेयर खरीदे है तो धीरे-धीरे शेयर का भाव उसके सही मूल्य को दर्शाने लगता है।अतः जब आप निवेश करें, तब दीर्घकालिन आंकड़ो को ही ध्यान में रखें।यदि आपने लंबे समय की लिए विविधतापूर्ण निवेश किया है तो नुकसान का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा,यदि आप अपने निवेश को लंबे समय तक बनाए रखते है तो मूलधन में हुई वृध्दि पर लगनेवाले कर में भी अच्छी-खासी राहत मिलती है। अगर यह कहा जाय कि दीर्घकालिन निवेश बाजार में उतार-चढ़ाव का इलाज है तो कोई अतिशयोक्ति नही होगी। विश्व के महसूर निवेशक वारेन बफेट तो यहाँ तक कहते है कि "एक निवेशक की जिंदगी में 20-30 ट्रेड कॉफी होते है।"लेकिन जिस तरह से भारत के शेयर बाजार में निरन्तर तेजी डेज हो रही है,ऐसे में बहुत से नए निवेशक भी बाजार से जुड़ रहे है और इस तेजी का लाभ जल्द-से-जल्द उठाने के लिए डे-ट्रेडिंग की फिसलन भरी राह पर भी चलने से नही चूक रहे है। लेकिन ऐसे लोगो का अल्पकालीन नजरिया एक दिन का होता है और वे दिन भर निरन्तर खरीद-बिक्री करते है,जो विशुद्ध रूप से सट्टा है। हालाँकि बहुत से निवेशक "स्टॉप लास" की सहायता से खरीद-बिक्री कर सफल भी होते है;लेकिन ऐसे लोगो की संख्या बहुत कम होती है। यदि शेयर बाजार में निवेश के लिए आपका "दीर्घकालीन नजरिया" नही है तो शेअर बाजार में सफल होना मुश्किल है क्योंकि "शॉर्ट टर्म नजरिया" लालच के भाव को जगाता है,जो असफलता को लेकर आता है। यदि आपका नजरिया दीर्घकालीन है तो आप किसी भी समय अच्छे फुंदमेंटलवाली कंपनीयो के शेअर खरीदकर बाजार में निवेश कर सकते है। बाजार कितना भी ऊपर हो, भले ही आपको इस वजह से महँगे शेयर मीले हो ,लेकिन लंबी अवधि तक आप यदि इन्हें होल्ड करके रखेगे तो आपको जरूर लाभ होगा। कम में खरीदे,ऊँचे में बेंचे और मुनाफा वसूली करते रहे।
कम में खरीदे,ऊँचे में बेंचे;//
शेयर बाजार में सफल होने के सुपर हिट फार्मूलों में से यह फार्मूला सबसे ज्यादा दमदार है। लेकिन पढ़ने और सुनने में यह जितना आसान नजर आता है,उतना है नही; क्योकि तार्किक रूप से हिट यह फॉर्मूला निवेशक के लिए अमल में लाना खासा मुश्किल होता है। इसकी वजह यह है कि यह आदमी के स्वभाव से बिल्कुल मेल नही खाता जब सेंसेक्स अपने शबाब पर होता है,तब चारो ओर एक ऐसा सकारात्मक वातावरण छा जाता है कि सभी तरफ सेंसेक्स के और आगे जाने की तथा इस तेजी के लिए विभिन्न कारकों के बारे में बढ़-चढ़कर बाटे होने लगती है। लिहाजा, निवेशको को लगता है कि वे भी इस तेजी का हिस्सा बनकर लाभ कमा सकते है और ऐसे में वे शेयरो की ऊँचे भाव पर लिवाली कर लेते है। दरअसल होता यह है कि जब तेजी का दौर होता है,तब प्रायः अच्छी कंपनीयो के शेयरो में अप्रत्याशित तेजी दर्ज की जाती है और वे शेयर ओवरवैल्यूड हो जाते है। निवेशक तेजी में इन ओवरवैल्यूड शेयरो को खरीद लेते है,जो इस हिट फार्मूला (जिसके अनुसार सस्ते में खरीदना चाहिए ) के एकदम विपरीत है जब तेजी का दौर थमता है,शेयरो की कीमतें घटने लगती है,तब बाजार में अफरा-तफरी मच जाती है। शेयरो की कीमतें घटती देख तब लोग बिकवाली करने लगते है। ऐसा निवेशक इस डर से करते है कि कहि शेयर की कीमत इतनी नीचे न चली जाए कि उन्हें बरबाद होना पड़े! जाहिर है,ऐसे में निवेश के हिट फार्मूला ( ऊँचे में बेंचे ) के एकदम विपरीत निवेशक का व्यवहार होता है। ऊंची कीमत में शेअर खरीदकर कम कीमत पर बेचना --- यह गलत चक्र तक चलता रहता है, जब तक कि निवेशक इसमे से निकलने की पूरे मन से कोशिश नही करता। इस गलत चक्र का अनुसरण सन 2008 में बहुत से निवेशक ने किया। कई निवेशको ने सेंसेक्स के 20,000 के आंकड़े को पार करता देख भारी मात्रा में शेयरो में पैसा लगाया और ऊंचे मूल्य पर शेयर खरीदे। लेकिन 21 जनवरी, 2008 से सेंसेक्स में आई अभूतपूर्व गिरावट से ऐसे निवेशको के पाँव के नीचे से जमीन सरक गई। 20 व 21 हजार पर पहुंचे सेंसेक्स के समय जिन निवेशको ने आनन-फानन में जल्दी पैसा कमा लेने का लिहाज से बाजार में पैसा लगाया,उन्हें बाजार में आई मंदी से सेंसेक्स के वापस10,000 सेनीचे पहुँच जाने पर कैसा महसूस हुआ होगा,यह समझा जा सकता है। चिंताजनक स्थिति तो तब पैदा हो जाती है,जब ऐसे निवेशक बाजार में तेजी आने का बेसब्री से इंतजार करते है और जब उनके खरीद मूल्य से ऊपर उन्हें 20-30% का लाभ दिखाई देता है,तब भी वे इस लालच में शेयर नही बेचते की शायद उन्हें उस शेअर से 100% फायदा हो जाए! आशा का यह गुब्बारा फिर उस समय अचानक फुट जाता है,जब बाजार में किन्ही कारणों से दुबारा मंदी का दौर शुरू होता है। इसलिए एक निवेशक के लिए जरूरी है कि वह शेयर बाजार की प्रकृति को समझे और थोड़े-थोड़े अंतराल पर मुनाफा वसूली करता रहे; क्योकि शेयर बाजार में यह कहा जाता है कि बाजार का उच्चतम स्तर तथा न्यूनतम स्तर कोई नही आँक सकता। बेहतर है कि जब आपको हैंडसम रिटर्न मिल रहा है तो आप कुल शेयर में से उतने शेयर बेच दे, जिससे आपको इतना रिटर्न मिल जाए कि आपका शेयर को खरीदने में हुआ खर्च निकल आए। ऐसा कर आप अपनी लगाई गई पूंजी को वापस पा लेते है और सुरक्षित स्थिति में बचे हुए शेयरो को दीर्घ अवधि में और अच्छा रिटर्न पाने की आस में रख सकते है उदाहरण के लिए,यदि निवेशक ने वलचन्द इंडस्ट्री के 40 शेयर 1,400 रुपए प्रति शेयर मूल्य हिसाब से खरीदे। यदि छह महीने में शेअर की कीमत 3,000 रुपए प्रति शेयर हो जाती है तो ऐसी स्थिति में बेहतर यह होगा कि निवेशक 20 शेयर बेचकर 60,000 रुपए प्राप्त कर ले। इससे एक तो उसको 40 शेयर खरीदने में लगी 56,000 रुपए की पूँजी वापस प्राप्त हो जायेगी तथा 4,000 रुपए अतिरिक्त भी प्राप्त हो जाएंगे। अब निवेशक सुरक्षित होकर उस शेयर के ऊपर जाने का इंतजार कर सकता है। इसलिए मुनाफा वसूली करने जरूरी है। दरअसल,शेयरो की उच्चतम स्तर पर बिकवाली और न्यूनतम स्तर पर लिवाली करना नामुमकिन है। इसलिए बाजार विश्लेषण का भी कहना है कि शेयरो की ठीक-ठीक कीमत मिलने पर थोड़ी सी प्रॉफिट बुकिंग की जानी चाहिए। मुनाफा वसूली करते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि यदि लिवाली के एक साल के भीतर बिकवाली की जाती है तो निवेशक को अल्पकालीन पूंजीगत लाभ कर देना होता है। इसके प्रॉफिट की गणना करते वक्त निवेशक को सेक्युरिटि ट्रांजेक्शन टैक्स ( एस, टी,टी ) का भी ध्यान रखना चाहिए।
भीड़ का अनुसरण कभी न करें://
विश्व-प्रसिध्द निवेशक वारेन बफे का मानना है कि "जब भीड़ निवेश (इन्वेस्ट ) करे तो बाजार से दूरी बना लेनी चाहिए और जब लोग मार्केट से दूरी बना ले,तब एक समझदार निवेशक को अच्छी कंपनीयो में निवेश करना चाहिए।" बफे की कही इस बात को निवेशक यदि "गुरुमंत्र" समझकर प्रयोग में लाए तो वह एक सफल निवेशक बन सकता है। बफे की इस बात को रिलायंस पावर के इश्यू से समझा जा सकता है। जब रिलायंस पावर का इश्यू बाजार में आ गया तो इस तरफ निवेशको का इतना झुकाव हुआ कि ये इश्यू की गुना भरा गया। परन्तु उसके बाद बाजार का सेंटीमेंट अन्य कारणों से खराब होने के कारण इसका भाव डिस्काउंट में आ गया। जिन लोगो ने पावर के इश्यू पर टूट पड़ी भीड़ को देखकर कहि से उधार पैसा लेकर यह सोचकर निवेश किया होगा कि इश्यू ऊँचे दाम पर सूचीबध्द होगा और वे तुरन्त पैसा बना लेंगे,उन्हें जबरदस्त झटका लगा होगा। हालांकि बाद में कंपनी के प्रमोटर अनिल अंबानी ने बोनस शेयर जारी करके निवेशको को हुए नुकसान की भरपाई करने की कोशिश की परन्तु ऐसे प्रमोटर बाजार में बहुत कम है और रिलायंस पॉवर को तो बाजार विश्लेषको ने अच्छी फुंदमेंटलवाली कंपनी बताया था। लेकिन ऐसा देखा गया है कि बाजार की तेजी का लाभ उठाने के लिए तेजी के दौर में अनेक इनिशियल पब्लिक ऑफर ( आई,पी,ओ ) बाजार में आते है और निवेशक ऊँचे प्रीमियम के लालच में बिना कंपनीयो का फुण्डामेंटल जाने भीड़ को देखकर निवेश कर देते है। उस दौरान यदि बाजार में अस्थिरता का दौर जारी रहे तो प्रीमियम तो दूर,इश्यू सुचिबध्द होने के बाद कुछ कंपनीयो के शेयर की कीमत उनके प्राइस बैंड की आधी या एक-चौथाई हो जाती है। हमने देखा भी है कि एक के बाद एक कई कंपनियों ने अपने पब्लिक इश्यू भारी-भरकम प्राइस बैंड के साथ बाजार में उतारे और जिन निवेशको ने बिना कंपनी का फुण्डामेंटल जाने निवेश किया वे बाद में बुरी तरह पछताए।
भावनाओ से नही,विवेक से करे शेयर कारोबार;//
लालच और भय मन की 2 ऐसी अवस्थाएं है,जिनके शेयर निवेशक पूरी तरह ओत-प्रोत रहते है।इतना ही नही भावनाएं तो खुदरा निवेशको के मन पर राज करती है। यही कारण है कि बाजार चढ़ता है तो एक आम निवेशक लोभ व लालच के कारण बिकवाली नही करता है;क्योकि उसे लगता है कि शायद शेयरो की कीमत और बढ़ेगा,और इस तरह बिकवाली का मौका वह खो देता है। इसी तरह भय या डर की भावना निवेशक में इस कदर व्याप्त रहती है कि जैसे ही बाजार गिरता है, वह भय के कारण अपने शेयरो को कम दाम में बेच देता है।
लालच और भय जैसी भावनाओ के चलते भी बार शेयर बाजार में इतने उतार-चढ़ाव देखे जाते है,जिसे बाजार की भाषा मे "मार्केट सेंटीमेंट्स" कहा जाता है।इसलिए जरूरी है कि इन भावनाओ पर काबू पाए और जब बाजार में तेजी अपने उच्चतम शिखर पर पहुँच गई हो और चारो ओर तेजी की प्राथमिकता पर सवाल उठने शुरू हो गए हो तो समझ लीजिए कि आपका शेयरो को बेचकर प्रॉफिट बुक करने का समय आ गया है यदि उस समय आपने विवेक से काम नही लिया और समय पर बिकवाली नही की तो आप स्वयं अपनी सफलता को असफलता में बदल डालेंगे। यह सच है कि शेयर बाजार में निवेश दीर्घवधि के लिए करना चाहिए, लेकिन यदि मध्यावधि या अल्पावधि में लाभ नजर आए तो शेयरो को बेचकर मुनाफा वसूली कर लेनी चाहिए। वरना जनवरी 2008 के तीसरे सप्ताह में जिस तरह लाखो निवेशको का जो हश्र हुआ,वैसा आपका भी हो सकता है। जनवरी 2008 के तीसरे सप्ताह में जब बाजार 5,000 पॉइंट टूटा, तब लाखो निवेशक मुनाफे से घांटे ने चले गए। इसीलिए शेयर बाजार में प्रॉफिट बुक करते रहे क्योकि जो निवेशक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से योजना बध्द तरीके से नियमित निवेश करते है, उन्हें निश्चित तौर पर सफलता मिलती है। यही कारण है कि जानकारी और विश्लेषण से किए गए निवेश में नुकसान की सभांवना कम होती है। अतः कोई भी निर्णय लेने से पहले भावनाओ से नही,बल्कि उससे जुड़े आंकड़ो का अध्ययन कर अपने विवेक से निर्णय ले।
जाँच-परखकर करें निवेश,न कि देखा-देखी;//
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