निवेश के तरीके अनेक है
हेलो दोस्तो मैं अपने इस ब्लॉग में इंवेशटिंग के शेअर्स के विभिन्न निवेश करने के तरीके के बारे में बताया हु जिसे आपकी निवेश की जानकारी के बारे में जानेंगे धन्यवाद दोस्तो
स्टॉक में निवेश करने के विभिन्न तरीके
शेयर बाजार में निवेश करने के कई तरीके है छोटे निवेशको,तथा फंड मैनेजर आदि द्वारा शेयरो को चुनने का अपना तरीका होता है और वही तरीका निवेश संबन्धी निर्णय और उससे मिली सफलता को एक "ट्रेंड" के रूप में स्थापित करता है
निवेश के लिए स्टॉक के चयन का भी एक विशेष तरीका होता है। बाजार के दिग्गज खिलाड़ी व फन्ड मैनेजर आदि का निवेश करने का अपना स्टाइल होता है। कुछ निवेशक सिर्फ उन शेयरो में पैसा लगाते है,जो तेजी से बढ़ते है तो कुछ वैल्यू स्टॉक को प्राथमिकता देते है। एक निवेशक के लिए यह जानना जरूरी है कि विभिन्न शेयरो में कौन से शेयर किस तरह का प्रदर्शन करते है और उनमें लाभ पाने के लिए निवेश का कौन सा तरीका अख्तियार करना होगा? आइए,जानते है इन्वेस्टर्स के बीच कितने तरह की स्टाइल लोकप्रिय है!
(१)... ग्रोथ स्टॉक
ग्रोथ इंवेशटिंग स्टाइल के अंतर्गत निवेशक उन स्टॉक का चयन करता है,जिनमे इंडस्ट्री के अन्य प्लेयर्स की अपेक्षा "ग्रोथ पोटेंशियल हाई" हो
यदि तेजी से बढ़ते हुए क्षेत्र से संबंधित स्टॉक है तो उनमें कॉफी ज्यादा ग्रोथ की संभावना होती है। निवेशक तुरन्त ऐसे स्टॉक की पहचान कर लेते है वही कुछ निवेशक पहले तेजी से बढ़ रहे क्षेत्र की पहचान करते है और उस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही कंपनीयो का चयन कर उनमे निवेश करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ग्रोथ स्टॉक में निवेश करने से भविष्य में अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
ग्रोथ स्क्रिप्स का चयन करते समय यह देखना होता है कि उन विशेष शेयरो की अपनी साथी कंपनीयो के शेयरों के मुकाबले अर्निंग्स ग्रोथ कितनी ज्यादा है। ग्रोथ कंपनीयो को परखने का सबसे सरल तरीका यह है कि उनकी बिक्री और मुनाफे का आँकड़ा तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई देता है। यही कारण है कि इन कंपनियों में किया गया निवेश कंपनी की तेज ग्रोथ के कारण बाजार मे ज्यादा लाभ प्रदान करता है। सेंसेक्स की मन्थर गति तथा बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डालनेवाले कारकों से भी ये स्टॉक्स अप्रभावित रहते है। यही कारण है कि बाजार में इन स्टॉक को अलग नजरिए से देखा जाता है। ऐसा मन जाता है कि बाजार में ग्रोथ स्टॉक्स की वैल्यू अलग तरीके से आँकी जाती है और यही कारण है कि यह वैल्युशन में भाग लेते हैं। निवेशक ग्रोथ आधारित शेयरो ने निवेश करने के लिए उच्च राशि अदा करने से भी नही हिचकते। निवेश की यह स्टाइल बहुत लोकप्रिय है:क्योंकि ज्यादातर निवेशक यह सुनिश्चित कर लेना चाहते है कि उनके पोर्टफोलियो में जो शेयर्स है, उनकी कीमत भविष्य में बढ़नेवाली है।
(२).. वैल्यू स्टॉक://
बाजार में कई फन्ड मैनेजर वैल्यू इंवेशटिंग तरीके से निवेश करते है। यह तरीका ग्रोथ इन्वेस्टमेंट से बिल्कुल भिन्न है। वैल्यू इन्वेस्टमेंट तरीके में उन शेयरो का चयन किया जाता है, जिनका तत्कालीन बाजार मूल्य अपेक्षाकृत कम हो। इन शेयरो में निवेश करके ऐसी स्थिति में लाभ उठाया जाता है,जब ये शेयर अपनी कंपनी की आंतरिक मजबूती से वास्तविक मूल्य प्राप्त कर लेते है।
बाजार में इस प्रकार के अंदर वैल्यूड स्टॉक की पहचान करने के कई तरीके है। किसी शेयर का पी/ई ( प्राइस अर्निंग रेशियो ) कम होना इसका सूचक हो सकता है। कंपनी का कैश-फ्लो इसका सूचक हो सकता है। कंपनी के कैश-फ्लो ( नगदी प्रवाह ) तथा डिस्काउंटेड फ्यूचर अर्निंग को पी/ई रेशियो के सापेक्ष में समझकर अंदर वैल्यूड शेयरो की पहचान की जा सकती है।औषत से कम प्राइस बुक रेशियो तथा अधिक डिविडेंट यील्ड भी "अंडर वैल्यूड शेयर" के सूचक है इसके अतिरिक्त इन शेयरो का गुणात्मक विश्लेषण भी जरूरी है कि ये शेयर किस बिजनेस से जुड़े है ? इनका मैनेजमेंट कैसा है तथा इनके बिजनेस की भविष्य में क्या माँग है?
वैल्यू इंवेशटिंग के तरीके में निवेश के अच्छे परिणाम आने में समय लगता है क्योंकि वैल्यू इंवेशटिंग के तरीके में निश्चित रूप से यह नही कहा जा सकता कि कोई शेयर कब अपने वास्तविक मूल्य पर आएगा। कई बार ऐसे परिणाम आने में कई साल लग जाते है। अतः लम्बे समय के निवेशक ( लांग टर्म इन्वेस्टर्स ) के लिए यह तरीका सुविधाजनक होता है
निवेश के इन दो (ग्रोथ व वैल्यू इंवेशटिंग ) तरीके के अतिरिक्त अन्य तरीके भी फन्ड मैनेजर व निवेशक द्वारा शेयरो के चयन के लिए अपनाएं जाते है।
मोमेंटम इन्वेस्टमेंट स्टाइल://
जो निवेशक अपने निवेश का शीघ्र लाभ उठाना चाहता है,वे इस प्रकार के निवेश का तरीका अपनाते है। इसके तहत उन कंपनियों के स्टॉक्स का चयन किया जाता है,जो बाजार में तेजी से बढ़ती है। कई कंपनियों में नाटकीय रूप से वृध्दि होती है। उनका पी/ई रेशियो बहुत ऊँचा होता है तथा बाजार में उनके स्टॉक्स का आकार कॉफी ज्यादा होता है। जब ये कंपनियां बाजार में आशा से वृध्दि करने लगे,तब लाभ उठाने के लिए इन कंपनियों के स्टॉक मि किया गया निवेश "मोमेंटम इन्वेस्टमेंट"कहलाता है। ग्रोथ इन्वेस्टमेंट तथा मोमेंटम इन्वेस्टमेंट में मूल अंतर यह है कि जहाँ ग्रोथ इन्वेस्टमेंट में चयनित कंपनियां फंडामेंटल रूप से मजबूत होती है तथा लम्बे समय तक उनकी आय में वृध्दि होती है,वही मोमेंटम इन्वेस्टमेंट के तहत चयनित कंपनियों के फंडामेंटल पर ध्यान नही दिया जाता है,अपितु तत्कालीन ट्रेड का लाभ उठाया जाता है।मोमेंटम इन्वेस्टमेंट कॉफी कम समय के लिए किया जाता है तथा निवेशक में जल्दी से स्टॉक बेचकर बाजार से निकलने की क्षमता होनी चाहिए।
डिविडेंट यील्ड इन्वेस्टमेंट स्टाइल://
निवेश के इस तरीके में शेयर के हाई डिविडेंट यील्ड को ध्यान में रखा जाता है। ऐसा मन जाता है कि हाई डिविडेंड वाले स्टॉक अन्य स्टॉक्स के मुकाबले, कुछ परिस्थितियो में अच्छा रिटर्न देते है। यधपि लम्बी अवधि के निवेश के नजरिया से निवेश का यह तरीका सही नही है;क्योकि लम्बी अवधि में इन शेयरो का डिविडेंड यील्ड उच्च स्तर पर बना रहे,इसकी कोई गारंटी नही होती तथा लम्बी अवधी के दौरान स्टॉक की कीमत में आया हुआ बदलाव डिविडेंड यील्ड के लाभ को महत्वहीन भी कर सकता है।
हेलो दोस्तो मैं अपने इस ब्लॉग में इंवेशटिंग के शेअर्स के विभिन्न निवेश करने के तरीके के बारे में बताया हु जिसे आपकी निवेश की जानकारी के बारे में जानेंगे धन्यवाद दोस्तो
स्टॉक में निवेश करने के विभिन्न तरीके
शेयर बाजार में निवेश करने के कई तरीके है छोटे निवेशको,तथा फंड मैनेजर आदि द्वारा शेयरो को चुनने का अपना तरीका होता है और वही तरीका निवेश संबन्धी निर्णय और उससे मिली सफलता को एक "ट्रेंड" के रूप में स्थापित करता है
निवेश के लिए स्टॉक के चयन का भी एक विशेष तरीका होता है। बाजार के दिग्गज खिलाड़ी व फन्ड मैनेजर आदि का निवेश करने का अपना स्टाइल होता है। कुछ निवेशक सिर्फ उन शेयरो में पैसा लगाते है,जो तेजी से बढ़ते है तो कुछ वैल्यू स्टॉक को प्राथमिकता देते है। एक निवेशक के लिए यह जानना जरूरी है कि विभिन्न शेयरो में कौन से शेयर किस तरह का प्रदर्शन करते है और उनमें लाभ पाने के लिए निवेश का कौन सा तरीका अख्तियार करना होगा? आइए,जानते है इन्वेस्टर्स के बीच कितने तरह की स्टाइल लोकप्रिय है!
(१)... ग्रोथ स्टॉक
ग्रोथ इंवेशटिंग स्टाइल के अंतर्गत निवेशक उन स्टॉक का चयन करता है,जिनमे इंडस्ट्री के अन्य प्लेयर्स की अपेक्षा "ग्रोथ पोटेंशियल हाई" हो
यदि तेजी से बढ़ते हुए क्षेत्र से संबंधित स्टॉक है तो उनमें कॉफी ज्यादा ग्रोथ की संभावना होती है। निवेशक तुरन्त ऐसे स्टॉक की पहचान कर लेते है वही कुछ निवेशक पहले तेजी से बढ़ रहे क्षेत्र की पहचान करते है और उस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही कंपनीयो का चयन कर उनमे निवेश करते हैं। ऐसा माना जाता है कि ग्रोथ स्टॉक में निवेश करने से भविष्य में अच्छा रिटर्न मिलने की उम्मीद की जा सकती है।
ग्रोथ स्क्रिप्स का चयन करते समय यह देखना होता है कि उन विशेष शेयरो की अपनी साथी कंपनीयो के शेयरों के मुकाबले अर्निंग्स ग्रोथ कितनी ज्यादा है। ग्रोथ कंपनीयो को परखने का सबसे सरल तरीका यह है कि उनकी बिक्री और मुनाफे का आँकड़ा तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई देता है। यही कारण है कि इन कंपनियों में किया गया निवेश कंपनी की तेज ग्रोथ के कारण बाजार मे ज्यादा लाभ प्रदान करता है। सेंसेक्स की मन्थर गति तथा बाजार पर नकारात्मक प्रभाव डालनेवाले कारकों से भी ये स्टॉक्स अप्रभावित रहते है। यही कारण है कि बाजार में इन स्टॉक को अलग नजरिए से देखा जाता है। ऐसा मन जाता है कि बाजार में ग्रोथ स्टॉक्स की वैल्यू अलग तरीके से आँकी जाती है और यही कारण है कि यह वैल्युशन में भाग लेते हैं। निवेशक ग्रोथ आधारित शेयरो ने निवेश करने के लिए उच्च राशि अदा करने से भी नही हिचकते। निवेश की यह स्टाइल बहुत लोकप्रिय है:क्योंकि ज्यादातर निवेशक यह सुनिश्चित कर लेना चाहते है कि उनके पोर्टफोलियो में जो शेयर्स है, उनकी कीमत भविष्य में बढ़नेवाली है।
(२).. वैल्यू स्टॉक://
बाजार में कई फन्ड मैनेजर वैल्यू इंवेशटिंग तरीके से निवेश करते है। यह तरीका ग्रोथ इन्वेस्टमेंट से बिल्कुल भिन्न है। वैल्यू इन्वेस्टमेंट तरीके में उन शेयरो का चयन किया जाता है, जिनका तत्कालीन बाजार मूल्य अपेक्षाकृत कम हो। इन शेयरो में निवेश करके ऐसी स्थिति में लाभ उठाया जाता है,जब ये शेयर अपनी कंपनी की आंतरिक मजबूती से वास्तविक मूल्य प्राप्त कर लेते है।
बाजार में इस प्रकार के अंदर वैल्यूड स्टॉक की पहचान करने के कई तरीके है। किसी शेयर का पी/ई ( प्राइस अर्निंग रेशियो ) कम होना इसका सूचक हो सकता है। कंपनी का कैश-फ्लो इसका सूचक हो सकता है। कंपनी के कैश-फ्लो ( नगदी प्रवाह ) तथा डिस्काउंटेड फ्यूचर अर्निंग को पी/ई रेशियो के सापेक्ष में समझकर अंदर वैल्यूड शेयरो की पहचान की जा सकती है।औषत से कम प्राइस बुक रेशियो तथा अधिक डिविडेंट यील्ड भी "अंडर वैल्यूड शेयर" के सूचक है इसके अतिरिक्त इन शेयरो का गुणात्मक विश्लेषण भी जरूरी है कि ये शेयर किस बिजनेस से जुड़े है ? इनका मैनेजमेंट कैसा है तथा इनके बिजनेस की भविष्य में क्या माँग है?
वैल्यू इंवेशटिंग के तरीके में निवेश के अच्छे परिणाम आने में समय लगता है क्योंकि वैल्यू इंवेशटिंग के तरीके में निश्चित रूप से यह नही कहा जा सकता कि कोई शेयर कब अपने वास्तविक मूल्य पर आएगा। कई बार ऐसे परिणाम आने में कई साल लग जाते है। अतः लम्बे समय के निवेशक ( लांग टर्म इन्वेस्टर्स ) के लिए यह तरीका सुविधाजनक होता है
निवेश के इन दो (ग्रोथ व वैल्यू इंवेशटिंग ) तरीके के अतिरिक्त अन्य तरीके भी फन्ड मैनेजर व निवेशक द्वारा शेयरो के चयन के लिए अपनाएं जाते है।
मोमेंटम इन्वेस्टमेंट स्टाइल://
जो निवेशक अपने निवेश का शीघ्र लाभ उठाना चाहता है,वे इस प्रकार के निवेश का तरीका अपनाते है। इसके तहत उन कंपनियों के स्टॉक्स का चयन किया जाता है,जो बाजार में तेजी से बढ़ती है। कई कंपनियों में नाटकीय रूप से वृध्दि होती है। उनका पी/ई रेशियो बहुत ऊँचा होता है तथा बाजार में उनके स्टॉक्स का आकार कॉफी ज्यादा होता है। जब ये कंपनियां बाजार में आशा से वृध्दि करने लगे,तब लाभ उठाने के लिए इन कंपनियों के स्टॉक मि किया गया निवेश "मोमेंटम इन्वेस्टमेंट"कहलाता है। ग्रोथ इन्वेस्टमेंट तथा मोमेंटम इन्वेस्टमेंट में मूल अंतर यह है कि जहाँ ग्रोथ इन्वेस्टमेंट में चयनित कंपनियां फंडामेंटल रूप से मजबूत होती है तथा लम्बे समय तक उनकी आय में वृध्दि होती है,वही मोमेंटम इन्वेस्टमेंट के तहत चयनित कंपनियों के फंडामेंटल पर ध्यान नही दिया जाता है,अपितु तत्कालीन ट्रेड का लाभ उठाया जाता है।मोमेंटम इन्वेस्टमेंट कॉफी कम समय के लिए किया जाता है तथा निवेशक में जल्दी से स्टॉक बेचकर बाजार से निकलने की क्षमता होनी चाहिए।
डिविडेंट यील्ड इन्वेस्टमेंट स्टाइल://
निवेश के इस तरीके में शेयर के हाई डिविडेंट यील्ड को ध्यान में रखा जाता है। ऐसा मन जाता है कि हाई डिविडेंड वाले स्टॉक अन्य स्टॉक्स के मुकाबले, कुछ परिस्थितियो में अच्छा रिटर्न देते है। यधपि लम्बी अवधि के निवेश के नजरिया से निवेश का यह तरीका सही नही है;क्योकि लम्बी अवधि में इन शेयरो का डिविडेंड यील्ड उच्च स्तर पर बना रहे,इसकी कोई गारंटी नही होती तथा लम्बी अवधी के दौरान स्टॉक की कीमत में आया हुआ बदलाव डिविडेंड यील्ड के लाभ को महत्वहीन भी कर सकता है।
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