शेअर्स के क्वांटिटी और प्रकार
हेलो दोस्त मै प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेअर मार्केट के बारे में शेयरो के प्रकार और शेयर टिप्स तथा कंपनीयो के फंडामेंटल जानकारी भी दिया हु धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो
शेयर बाजार की शब्दावली
शेयर बाजार में कई प्रचलित है, जो बाजार, शेयर, कंपनी,स्टॉक इत्यादि की स्थिति के बारे में जानकारी देते है। ये शब्द तकनीकी तथा पारंपरिक भी हो सकता है। निवेशक के लिए इस शब्दावाली की जानकारी रुचिकर तथा आवश्यक है , जैसे-बुल्स,बेयर्स,ए, डी, आर,/जी डी आर,एनालिस्ट,एक्स एंड कम डेट्स,वॉल्यूम, आबिर्ट्रेज, हेजिंग,पैनी स्टॉक।
पेनी स्टॉक-//
ये वे शेयर्स होते है,जिनकी बाजार कीमत उनकी फेस वैल्यू से भी नीचे होती है। यधपि शेयर बाजार में इनकी नियमित ट्रेडिंग होती रहती है। इन शेयरो की ट्रेडिंग के साथ स्पेक्युलेशन (सट्टेबाजी ) जुड़ा रहता है। इन शेयरो की कीमत में थोड़ी सी वृद्धि भी बहुत बड़ा प्रतिशत लाभ ( हाई रिटर्न ) देती है। ये शेयर बड़े जोखिमवाले शेयर होते है तथा विपरीत परिस्थितियों में औंधे मुँह भी गिरते है और निवेशक को नुकसान पहुचाते है।
ए, डी, आर,/जी,डी, आर--ये विदेशी स्टॉक एक्सचेंज में उपलब्ध सेक्युरिटिज होती है,जिनके माध्यम से विदेशी निवेशक भारतीय कंपनीयो के शेयर बिना भारतीय बाजार में उतरे खरीद सकते है। किसी बैंक के माध्यम से ए, डी, आर,/जी,डी, आर, का कारोबार किया जाता है।
भारत की किसी डिपाजिटरी में विदेशी निवेशक द्वारा खरीद गए शेयर दर्ज रहते है। किसी एक ए, डी, आर,द्वारा निश्चित संख्या में शेअर खरीदे जा सकते है। इसे "स्पेसिफिक रेशियो"कहते है।
ए, डी, आर,/जी,डी, आर, द्वारा ट्रांजेक्शन का तरीका लगभग वैसा ही है,जैसा विदेशी निवेशकों द्वारा उनके एक्सचेंज में किया जाता है। इसलिए विदेशी निवेशक इस तरीके से निवेश का रास्ता पसन्द करते है। भारतीय कंपनियों को भी इस तरीके से विदेशी एक्सचेंज में सूचीबध्द होने का मौका मिलता है। ए, डी, आर,/जी,डी, आर, धारक जब चाहे ए, डी, आर,/जी,डी, आर, को कंपनी के वास्तविक शेयरो में परिवर्तित कर सकता है। ए, डी, आर, अमेरिका के स्टॉक एक्सचेंज में प्रचलित है,वही जी,डी, आर,दूसरे विदेशी एक्सचेंज, जैसे लक्जमबर्ग इत्यादि के एक्सचेंजो में प्रचलित है।
ऐट पार--/
किसी शेयर को उसी कीमत पर जारी करना या बेचना,जो उस शेयर के शेअर प्रमाण-पत्र पर अंकित हो।
ऐट प्रीमियम-/
शेयर प्रमाण-पत्र पर अंकित मूल्य की तुलना में अधिक मूल्य पर शेयर को जारी करना या बेचना।
उच्च व निम्न-/
पिछले 52 सप्ताह की अवधि में प्रत्येक शेयर का अधिकतम और न्यूनतम मूल्य।
कॉल मनी-// कोई भी शेयर जारी करते समय शेयर मूल्य का एक भाग शेअर आवेदनकर्ता से आवेदन-पत्र के साथ कंपनी ले लेती है। शेष भाग शेयर धारकों से आगामी निश्चित तिथि तक किस्ती में माँगा जाता है। इसे "कॉल मनी" कहते है।
मेगा इश्यू--/ किसी कंपनी द्वारा बहुत बड़ी संख्या में जारी किए गए शेयर या ऋण-पत्र,जिनका मूल्य कई सौ करोड़ रुपए हो।
लिमिटेड कंपनी--//
आयसी कंपनी, जिनका स्वामित्व अंशदाताओं के बीच बंटा हुआ हो और प्रत्येक अंशदाता का उत्तरदायित्व उसके अंश तक ही सीमित होता हो।
स्वीट शेयर--//
"स्वीट इक्विटी शेयर" उन्हें कहते है,जिसे कंपनी के कर्मचारियों या किसी अन्य को रियायती मूल्य पर आवंटित किए जाते है। शेयर बाजार पर निगरानी रखनेवाली संस्था ने विशेष श्रेणी के स्वीट शेयरो के लिए 3 वर्ष का "लॉक-इन पीरियड" निर्धारित किया है। इनका मतलब यह है कि 3 वर्ष से पहले इन्हें किसी अन्य को बेंचा नही जा सकता। यह भी सामान्य शेयरो की तरह शेयर बाजार में सूचीबध्द होते है।
तेजड़िया और मंदड़िया (बुल्स एंड बियर्स )--//
यह स्टॉक एक्सचेंज के शब्द है।जो व्यक्ति स्टॉक की कीमतों को बढ़ाना चाहता है, वह "तेजड़िया" कहलाता है और जो व्यक्ति स्टॉक की कीमतें गिरने की आशा करके किसी वस्तु को भविष्य में देने का वायदा करके बेचता है,वह "मंदड़िया" कहलाता है।
ब्रिज लोन-//
कंपनियाँ आमतौर पर विस्तार के लिए पूँजी जुटाने हेतु शेयर तथा डिबेंचर जारी करती है।लेकिन इस पूरी कार्य-प्रणाली में 3 माह से भी अधिक का समय लग जाता है। इसलिए इस दौरान अपना काम जारी रखने के लिए कंपनियाँ बैंकों से निश्चित अवधि के लिए ऋण प्राप्त कर लेती है। इस प्रकार के ऋणों को "ब्रिज लोन" कहते है।
लिवाली और बिकवाली--//
शेयरो की बड़ी मात्रा में खरीदारी "लिवाली" कहलाती है और बड़ी संख्या में शेयरो को बेचना "बिकवाली" कहलाता है।
ब्लूचिप्स कंपनियाँ-//
ऐसी प्रमुख लोकप्रिय कंपनियों के शेयर, जो पिछले कई वर्षों से लगातार उन्नति कर रहे हो,आगे बढ़ रहे हो तथा भविष्य में भी इनमे और विकास की बहुत सम्भावना हो ऐसी कंपनियाँ "ब्लूचिप्स कंपनियाँ" तथा ऐसे शेयर "ब्लूचिप शेयर"कहलाता है।
बाजार पूंजीकरण ( मार्केट कैपिटलाइजेशन )-//
किसी कंपनी के द्वारा जारी किए गए कुल शेयरो की बाजार में कीमत उस कंपनी का "बाजार पूंजीकरण" कहलाता है उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के मार्केट में 10 लाख शेयर है तथा बाजार मे प्रति शेयर कीमत 1,000 हजार रुपये है तो उस कम्पनी का बाजार पूंजीकरण ( मार्केट कैपिटलाइजेशन )100 करोड़ रुपये होगा।
बाजार पूंजीकरण के आधार पर कंपनीयो को तीन श्रेणी में बांटा गया है।
(१)....स्मॉल कैप-//
वे कंपनियाँ, जिनका मार्केट कैप ( बाजार पूंजीकरण )100 करोड़ से कम हो वे "स्मॉल कैप कंपनियाँ कहलाती है।
(२)..मिड कैप-//
वे कंपनियाँ, जिनका मार्केट कैप ( बाजार पूंजीकरण ) 100 करोड़ से 1,000 करोड़ के बीच हो, वे "मिड कैप कंपनियाँ" कहलाती है।
(३)..लार्ज कैप-//
वे कंपनियाँ, जिनका मार्केट कैप ( बाजार पूंजीकरण ) 1,000 करोड़ से ज्यादा हो, वे कंपनियाँ "लार्ज कैप" श्रेणी में आती है।
वार्षिक-रिपोर्ट ( एनुअल-रिपोर्ट )-//
प्रत्येक कंपनी की कानूनी रूप से वार्षिक-रिपोर्ट बनाकर एकाउंटिंग ईयर (लेखा-वर्ष ) के अंत मे तैयार की जाती है। इसमें कंपनी के डायरेक्टरो,कंपनी की गतिविधियों के बारे में वार्षिक रिव्यू, कंपनी के वित्तीय परिणाम,आगामी प्रस्ताव,ऑडिट रिपोर्ट,बैलेंस शीट, लाभ-हानि का लेखा-जोखा इत्यादि समाहित होता है।
बायबैक -//
किसी कंपनी द्वारा जब अपने ही शेयरो को दुबारा खरीदने का निर्णय लिया जाता है तो उसे "बायबैक"कहा जाता है। इस निर्णय के पीछे का मकसद होता है----कंपनी द्वारा बाजार में उपलब्ध उस्केशेरो की संख्या को घटना। इस प्रक्रिया में प्रति शेयर लाभ में इजाफा होता है और बैलेंस शीट भी बेहतर होती है। कंपनी जिस टेंडर ऑफर या खुले बाजार के द्वारा बायबैक के माध्यम से शेयर वापस खरीदती है, उसमे टेंडर ऑफर बायबैक की कीमत ओपन मार्केट में शेअर के दाम से ज्यादा होती है? और जिस निवेशक के पास उस कंपनी के शेयर होते है,वह बायबैक के समय चाहे तो फायदा ले सकता है।
हेलो दोस्त मै प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेअर मार्केट के बारे में शेयरो के प्रकार और शेयर टिप्स तथा कंपनीयो के फंडामेंटल जानकारी भी दिया हु धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो
शेयर बाजार की शब्दावली
शेयर बाजार में कई प्रचलित है, जो बाजार, शेयर, कंपनी,स्टॉक इत्यादि की स्थिति के बारे में जानकारी देते है। ये शब्द तकनीकी तथा पारंपरिक भी हो सकता है। निवेशक के लिए इस शब्दावाली की जानकारी रुचिकर तथा आवश्यक है , जैसे-बुल्स,बेयर्स,ए, डी, आर,/जी डी आर,एनालिस्ट,एक्स एंड कम डेट्स,वॉल्यूम, आबिर्ट्रेज, हेजिंग,पैनी स्टॉक।
पेनी स्टॉक-//
ये वे शेयर्स होते है,जिनकी बाजार कीमत उनकी फेस वैल्यू से भी नीचे होती है। यधपि शेयर बाजार में इनकी नियमित ट्रेडिंग होती रहती है। इन शेयरो की ट्रेडिंग के साथ स्पेक्युलेशन (सट्टेबाजी ) जुड़ा रहता है। इन शेयरो की कीमत में थोड़ी सी वृद्धि भी बहुत बड़ा प्रतिशत लाभ ( हाई रिटर्न ) देती है। ये शेयर बड़े जोखिमवाले शेयर होते है तथा विपरीत परिस्थितियों में औंधे मुँह भी गिरते है और निवेशक को नुकसान पहुचाते है।
ए, डी, आर,/जी,डी, आर--ये विदेशी स्टॉक एक्सचेंज में उपलब्ध सेक्युरिटिज होती है,जिनके माध्यम से विदेशी निवेशक भारतीय कंपनीयो के शेयर बिना भारतीय बाजार में उतरे खरीद सकते है। किसी बैंक के माध्यम से ए, डी, आर,/जी,डी, आर, का कारोबार किया जाता है।
भारत की किसी डिपाजिटरी में विदेशी निवेशक द्वारा खरीद गए शेयर दर्ज रहते है। किसी एक ए, डी, आर,द्वारा निश्चित संख्या में शेअर खरीदे जा सकते है। इसे "स्पेसिफिक रेशियो"कहते है।
ए, डी, आर,/जी,डी, आर, द्वारा ट्रांजेक्शन का तरीका लगभग वैसा ही है,जैसा विदेशी निवेशकों द्वारा उनके एक्सचेंज में किया जाता है। इसलिए विदेशी निवेशक इस तरीके से निवेश का रास्ता पसन्द करते है। भारतीय कंपनियों को भी इस तरीके से विदेशी एक्सचेंज में सूचीबध्द होने का मौका मिलता है। ए, डी, आर,/जी,डी, आर, धारक जब चाहे ए, डी, आर,/जी,डी, आर, को कंपनी के वास्तविक शेयरो में परिवर्तित कर सकता है। ए, डी, आर, अमेरिका के स्टॉक एक्सचेंज में प्रचलित है,वही जी,डी, आर,दूसरे विदेशी एक्सचेंज, जैसे लक्जमबर्ग इत्यादि के एक्सचेंजो में प्रचलित है।
ऐट पार--/
किसी शेयर को उसी कीमत पर जारी करना या बेचना,जो उस शेयर के शेअर प्रमाण-पत्र पर अंकित हो।
ऐट प्रीमियम-/
शेयर प्रमाण-पत्र पर अंकित मूल्य की तुलना में अधिक मूल्य पर शेयर को जारी करना या बेचना।
उच्च व निम्न-/
पिछले 52 सप्ताह की अवधि में प्रत्येक शेयर का अधिकतम और न्यूनतम मूल्य।
कॉल मनी-// कोई भी शेयर जारी करते समय शेयर मूल्य का एक भाग शेअर आवेदनकर्ता से आवेदन-पत्र के साथ कंपनी ले लेती है। शेष भाग शेयर धारकों से आगामी निश्चित तिथि तक किस्ती में माँगा जाता है। इसे "कॉल मनी" कहते है।
मेगा इश्यू--/ किसी कंपनी द्वारा बहुत बड़ी संख्या में जारी किए गए शेयर या ऋण-पत्र,जिनका मूल्य कई सौ करोड़ रुपए हो।
लिमिटेड कंपनी--//
आयसी कंपनी, जिनका स्वामित्व अंशदाताओं के बीच बंटा हुआ हो और प्रत्येक अंशदाता का उत्तरदायित्व उसके अंश तक ही सीमित होता हो।
स्वीट शेयर--//
"स्वीट इक्विटी शेयर" उन्हें कहते है,जिसे कंपनी के कर्मचारियों या किसी अन्य को रियायती मूल्य पर आवंटित किए जाते है। शेयर बाजार पर निगरानी रखनेवाली संस्था ने विशेष श्रेणी के स्वीट शेयरो के लिए 3 वर्ष का "लॉक-इन पीरियड" निर्धारित किया है। इनका मतलब यह है कि 3 वर्ष से पहले इन्हें किसी अन्य को बेंचा नही जा सकता। यह भी सामान्य शेयरो की तरह शेयर बाजार में सूचीबध्द होते है।
तेजड़िया और मंदड़िया (बुल्स एंड बियर्स )--//
यह स्टॉक एक्सचेंज के शब्द है।जो व्यक्ति स्टॉक की कीमतों को बढ़ाना चाहता है, वह "तेजड़िया" कहलाता है और जो व्यक्ति स्टॉक की कीमतें गिरने की आशा करके किसी वस्तु को भविष्य में देने का वायदा करके बेचता है,वह "मंदड़िया" कहलाता है।
ब्रिज लोन-//
कंपनियाँ आमतौर पर विस्तार के लिए पूँजी जुटाने हेतु शेयर तथा डिबेंचर जारी करती है।लेकिन इस पूरी कार्य-प्रणाली में 3 माह से भी अधिक का समय लग जाता है। इसलिए इस दौरान अपना काम जारी रखने के लिए कंपनियाँ बैंकों से निश्चित अवधि के लिए ऋण प्राप्त कर लेती है। इस प्रकार के ऋणों को "ब्रिज लोन" कहते है।
लिवाली और बिकवाली--//
शेयरो की बड़ी मात्रा में खरीदारी "लिवाली" कहलाती है और बड़ी संख्या में शेयरो को बेचना "बिकवाली" कहलाता है।
ब्लूचिप्स कंपनियाँ-//
ऐसी प्रमुख लोकप्रिय कंपनियों के शेयर, जो पिछले कई वर्षों से लगातार उन्नति कर रहे हो,आगे बढ़ रहे हो तथा भविष्य में भी इनमे और विकास की बहुत सम्भावना हो ऐसी कंपनियाँ "ब्लूचिप्स कंपनियाँ" तथा ऐसे शेयर "ब्लूचिप शेयर"कहलाता है।
बाजार पूंजीकरण ( मार्केट कैपिटलाइजेशन )-//
किसी कंपनी के द्वारा जारी किए गए कुल शेयरो की बाजार में कीमत उस कंपनी का "बाजार पूंजीकरण" कहलाता है उदाहरण के लिए, किसी कंपनी के मार्केट में 10 लाख शेयर है तथा बाजार मे प्रति शेयर कीमत 1,000 हजार रुपये है तो उस कम्पनी का बाजार पूंजीकरण ( मार्केट कैपिटलाइजेशन )100 करोड़ रुपये होगा।
बाजार पूंजीकरण के आधार पर कंपनीयो को तीन श्रेणी में बांटा गया है।
(१)....स्मॉल कैप-//
वे कंपनियाँ, जिनका मार्केट कैप ( बाजार पूंजीकरण )100 करोड़ से कम हो वे "स्मॉल कैप कंपनियाँ कहलाती है।
(२)..मिड कैप-//
वे कंपनियाँ, जिनका मार्केट कैप ( बाजार पूंजीकरण ) 100 करोड़ से 1,000 करोड़ के बीच हो, वे "मिड कैप कंपनियाँ" कहलाती है।
(३)..लार्ज कैप-//
वे कंपनियाँ, जिनका मार्केट कैप ( बाजार पूंजीकरण ) 1,000 करोड़ से ज्यादा हो, वे कंपनियाँ "लार्ज कैप" श्रेणी में आती है।
वार्षिक-रिपोर्ट ( एनुअल-रिपोर्ट )-//
प्रत्येक कंपनी की कानूनी रूप से वार्षिक-रिपोर्ट बनाकर एकाउंटिंग ईयर (लेखा-वर्ष ) के अंत मे तैयार की जाती है। इसमें कंपनी के डायरेक्टरो,कंपनी की गतिविधियों के बारे में वार्षिक रिव्यू, कंपनी के वित्तीय परिणाम,आगामी प्रस्ताव,ऑडिट रिपोर्ट,बैलेंस शीट, लाभ-हानि का लेखा-जोखा इत्यादि समाहित होता है।
बायबैक -//
किसी कंपनी द्वारा जब अपने ही शेयरो को दुबारा खरीदने का निर्णय लिया जाता है तो उसे "बायबैक"कहा जाता है। इस निर्णय के पीछे का मकसद होता है----कंपनी द्वारा बाजार में उपलब्ध उस्केशेरो की संख्या को घटना। इस प्रक्रिया में प्रति शेयर लाभ में इजाफा होता है और बैलेंस शीट भी बेहतर होती है। कंपनी जिस टेंडर ऑफर या खुले बाजार के द्वारा बायबैक के माध्यम से शेयर वापस खरीदती है, उसमे टेंडर ऑफर बायबैक की कीमत ओपन मार्केट में शेअर के दाम से ज्यादा होती है? और जिस निवेशक के पास उस कंपनी के शेयर होते है,वह बायबैक के समय चाहे तो फायदा ले सकता है।

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