Index fund aur nifty ke vishesh tips
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इंडेक्स
"इंडेक्स" बाजार की स्थिति को दर्शानेवाला पैमाना है तथा यह बाजार के रुझान को दर्शाता है। किसी भी इंडेक्स में वे स्टॉक शामिल रहते है,जिनकी लिक्विडिटी भरपूर हो तथा जिनका मार्केट पूंजीकरण ( कैपिटलाइजेशन ) बड़ा है। इंडेक्स की गणना में इन स्टॉक को इनके बाजार में पूंजीकरण की तुलना के अनुसार महत्व दिया जाता है। इन इंडेक्स की डेरिवेटिव् मार्केट में भी ट्रेडिंग होती है। भारत मे सेक्युरिटिज की ट्रेडिंग के लिए 2 प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज, बॉमबे स्टॉक एक्सचेंज ( bse ) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स ( सूचकांक ) सेंसेक्स ( sensex ) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स निफ़्टी ( nifty ) है।
"इंडेक्स" बाजार की स्थिति को दर्शानेवाला पैमाना है तथा यह बाजार के रुझान को दर्शाता है। किसी भी इंडेक्स में वे स्टॉक शामिल रहते है,जिनकी लिक्विडिटी भरपूर हो तथा जिनका मार्केट पूंजीकरण ( कैपिटलाइजेशन ) बड़ा है। इंडेक्स की गणना में इन स्टॉक को इनके बाजार में पूंजीकरण की तुलना के अनुसार महत्व दिया जाता है। इन इंडेक्स की डेरिवेटिव् मार्केट में भी ट्रेडिंग होती है। भारत मे सेक्युरिटिज की ट्रेडिंग के लिए 2 प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज, बॉमबे स्टॉक एक्सचेंज ( bse ) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स ( सूचकांक ) सेंसेक्स ( sensex ) तथा नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का इंडेक्स निफ़्टी ( nifty ) है।
निफ़्टी://
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज द्वारा सर्वप्रथम जारी किया गया इंडेक्स "निफ़्टी" है। निफ़्टी का गठन सेंसेक्स के गठन से कुछ भिन्न है। सेंसेक्स के गठन में जहाँ स्टॉक के फ्लोटिंग कैपिटलाइजेशन का उपयोग किया जाता है,वही निफ़्टी के गठन में इसके 50 स्टॉक के पूरे कैपिटलाइजेशन का प्रयोग होता है।
भारत के अन्य मुख्य इंडेक्स
(१)..बी,एस, ई, स्मॉलकैप इंडेक्स
(२).. बी,एस, ई, मिडकैप इंडेक्स
(३).. सी, एन, एक्स, निफ़्टी जूनियर
(४)..सी, एन, एक्स, मिडकैप
(५)..सी, एन, एक्स,आई,टी
(६).. बैंक निफ़्टी
(७)..निफ़्टी मिनी फ्यूचर्स
(१)..बी,एस, ई, स्मॉलकैप इंडेक्स
(२).. बी,एस, ई, मिडकैप इंडेक्स
(३).. सी, एन, एक्स, निफ़्टी जूनियर
(४)..सी, एन, एक्स, मिडकैप
(५)..सी, एन, एक्स,आई,टी
(६).. बैंक निफ़्टी
(७)..निफ़्टी मिनी फ्यूचर्स
विश्व के प्रमुख इंडेक्स
इंडेक्स। देश
(१).डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल। यू,एस, ए (अमेरिका )
(२)..एस एंड पी500 इंडेक्स यू,एस, ए
(३)..नैस्डेक कंपोजिट यू,एस ए
(४)..एफ टीएस ई 100 इंडेक्स यू,के ( ब्रिटेन )
(५)..सीएससी 40 इंडेक्स। फ्रांस
(६)..डेक्स जर्मनी
(७)..निक्की 225 जापान
(८)..हेंग-सेंग इंडेक्स। हांगकांग
(९)..कॉसपी इंडेक्स। दक्षिण किरिया
(१०).स्ट्रेट्स टाइम्स सिंगापुर
इंडेक्स। देश
(१).डाऊ जोन्स इंडस्ट्रियल। यू,एस, ए (अमेरिका )
(२)..एस एंड पी500 इंडेक्स यू,एस, ए
(३)..नैस्डेक कंपोजिट यू,एस ए
(४)..एफ टीएस ई 100 इंडेक्स यू,के ( ब्रिटेन )
(५)..सीएससी 40 इंडेक्स। फ्रांस
(६)..डेक्स जर्मनी
(७)..निक्की 225 जापान
(८)..हेंग-सेंग इंडेक्स। हांगकांग
(९)..कॉसपी इंडेक्स। दक्षिण किरिया
(१०).स्ट्रेट्स टाइम्स सिंगापुर
सेंसेक्स क्या है://
दरसअल स्टॉक एक्सचेंज में जिन कंपनीयो का कारोबार हो रहा है,उनकी सामान्य स्थिति को दर्शाने के लिए एक औसत निकाला जाता है,जिसे "सेंसिटिव इंडेक्स" कहते है। "सेंसेक्स" शब्द का प्रयोग सन 1990 में दीपक मोहोंनी नामक पत्रकार ने शुरू किया था,जो अब प्रचलित हो गया है।
सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बी,एस, ई, ) में सूचीबध्द 30 सबसे बड़ी और सबसे अधिक खरीदी-बेची जानेवाली कंपनीयो का एक इंडेक्स है। यह सूचकांक सन 1986 में अस्तित्व में आया था। सेंसेक्स का पूरा नाम "सेंसिटिव इंडेक्स" है। इस इंडेक्स में शामिल कंपनीया अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों को प्रभावित करती है। बी एस ई के कुल बाजार पूंजीकरण का पाँचवे से भी ज्यादा हिस्सा इन कंपनियों का ही है। सेंसेक्स भारतीय शेयर बाजार का सबसे लोकप्रिय व सटीक बैरोमीटर मन जाता है। यदि अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी है तो इंडेक्स या सेंसेक्स ऊपर उठता है,यानी शेयरो का भाव उछलता है और यदि अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी नही है तो सेंसेक्स नीचे गिरता है,अर्थात शेयरो के गिरते भाव की तरफ इशारा करता है। लेकिन अब ग्लोबल हो चुके शेयर बाजार में जहाँ खरबो रुपए विदेशी संस्थागत निवेशको ( एफ, आई,आई) का लगा है,ऐसे में ग्लोबल कारकों का भी शेयर बाजार पर कॉफी प्रभाव पड़ता है। हमने बहुत बार ऐसा पाया है कि इंडिया की ग्रोथ स्टोरी बुलिश है,फंडामेंटल् मजबूत है,कंपनीयो के नतीजे अच्छे है,बावजूद इसके सेंसेक्स इसलिए नीचे गिर गया,क्योकि ग्लोबल कारक नकारात्मक थे। हालांकि अब भी हमारा इंडेक्स अर्थव्यवस्था को मजबूरी का आईना है, जिसे कभी-कभी अमेरिका का सब-प्राइस संकट,एशियाई बाजारों की मंदी तो कभी स्थानीय सेंटीमेंट्स धुंए की एक परत के रूप में आकर आईने को कुछ देर के लिए धुंधला जरूर कर देते है,लेकिन लॉन्ग टर्म ( लंबी अवधि ) में धुंए के ये बादल छट जाते है और दुबारा हमे हमारी बुलिश इकोनॉमी की तस्वीर दिखाई पड़ने लगती है।
कई बार ऐसा भी होता है कि वास्तविक अर्थव्यवस्था घोर मंदी का शिकार होती है,तो भी शेयर बाजार कुलाँचे भरता दिखाई देता है। इसका कारण यह है कि अब शेयर बाजार में कंपनीयो के शेयरो के बाजार मूल्य का उनकी वास्तविक संपत्ति के मूल्य से सीधा संबन्ध नही लगाया जा सकता। इसका वास्तविक कारण कारोबार में कमी होना और सट्टेबाजी से पैसों को इधर-उधर करना है। हालांकि डी-मैट प्रणाली व सेबी के कसते रवैए से अब इसमें बहुत गिरावट आई है।
सेंसेक्स के आधारित वर्ष की शुरुवात 1 अप्रैल 1979 से मानी जाती है,क्योकि उस वर्ष से सेंसेक्स की गणना 100 से शुरू की गई थी। सेंसेक्स की गणना करने के लिए "फ्री फ्लोर मार्केट कैपिटलाइजेशन" ( बाजार पूंजीकरण ) विधि का इस्तेमाल किया जाता है। इस विधि में सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों का "फ्री फ्लोर मार्केट कैप" निकाला जाता है। इसके बाद इन सभी कंपनीयो के मार्केट कैप को जोड़कर कुल गणना की जाती है। फिर इसकी गणना सेंसेक्स के आधार वर्ष के सापेक्ष की जाती है।इस आधार पर जो भी परिणाम आता है, वह सेंसेक्स का अंक है। उदाहरण के लिए,यदि 100 करोड के लिए सेंसेक्स का अंक 4 था तो 200 करोड़ के लिए यह 8 पर निर्धारित होगा और 400 करोड़ के लिए यह 16 अंक पर निर्धारित होगा। मार्केट कैप में बदलाव शेयरो में वृद्धि या फिर शेयरो की कीमत ( मूल्य ) में बढ़ोतरी या कमी के चलते हो सकता है। सेंसेक्स में कंपनीयो का चयन एक "इंडेक्स समिति" करती है। इसमें शामिल होनेवाली कंपनीयो को निर्धारित नियमो का पालन करना पड़ता है। उनमें से एक नियम यह है कि कंपनी बी,एस, ई की पहली 100 मार्केट कैप्वाली कंपनीयो में से एक होनी चाहिए और उसका कुल मार्केट कैप बी,एस, ई के कुल मार्केट कैप का 0,5 % से ज्यादा होना चाहिए।
सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बी,एस, ई, ) में सूचीबध्द 30 सबसे बड़ी और सबसे अधिक खरीदी-बेची जानेवाली कंपनीयो का एक इंडेक्स है। यह सूचकांक सन 1986 में अस्तित्व में आया था। सेंसेक्स का पूरा नाम "सेंसिटिव इंडेक्स" है। इस इंडेक्स में शामिल कंपनीया अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों को प्रभावित करती है। बी एस ई के कुल बाजार पूंजीकरण का पाँचवे से भी ज्यादा हिस्सा इन कंपनियों का ही है। सेंसेक्स भारतीय शेयर बाजार का सबसे लोकप्रिय व सटीक बैरोमीटर मन जाता है। यदि अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी है तो इंडेक्स या सेंसेक्स ऊपर उठता है,यानी शेयरो का भाव उछलता है और यदि अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी नही है तो सेंसेक्स नीचे गिरता है,अर्थात शेयरो के गिरते भाव की तरफ इशारा करता है। लेकिन अब ग्लोबल हो चुके शेयर बाजार में जहाँ खरबो रुपए विदेशी संस्थागत निवेशको ( एफ, आई,आई) का लगा है,ऐसे में ग्लोबल कारकों का भी शेयर बाजार पर कॉफी प्रभाव पड़ता है। हमने बहुत बार ऐसा पाया है कि इंडिया की ग्रोथ स्टोरी बुलिश है,फंडामेंटल् मजबूत है,कंपनीयो के नतीजे अच्छे है,बावजूद इसके सेंसेक्स इसलिए नीचे गिर गया,क्योकि ग्लोबल कारक नकारात्मक थे। हालांकि अब भी हमारा इंडेक्स अर्थव्यवस्था को मजबूरी का आईना है, जिसे कभी-कभी अमेरिका का सब-प्राइस संकट,एशियाई बाजारों की मंदी तो कभी स्थानीय सेंटीमेंट्स धुंए की एक परत के रूप में आकर आईने को कुछ देर के लिए धुंधला जरूर कर देते है,लेकिन लॉन्ग टर्म ( लंबी अवधि ) में धुंए के ये बादल छट जाते है और दुबारा हमे हमारी बुलिश इकोनॉमी की तस्वीर दिखाई पड़ने लगती है।
कई बार ऐसा भी होता है कि वास्तविक अर्थव्यवस्था घोर मंदी का शिकार होती है,तो भी शेयर बाजार कुलाँचे भरता दिखाई देता है। इसका कारण यह है कि अब शेयर बाजार में कंपनीयो के शेयरो के बाजार मूल्य का उनकी वास्तविक संपत्ति के मूल्य से सीधा संबन्ध नही लगाया जा सकता। इसका वास्तविक कारण कारोबार में कमी होना और सट्टेबाजी से पैसों को इधर-उधर करना है। हालांकि डी-मैट प्रणाली व सेबी के कसते रवैए से अब इसमें बहुत गिरावट आई है।
सेंसेक्स के आधारित वर्ष की शुरुवात 1 अप्रैल 1979 से मानी जाती है,क्योकि उस वर्ष से सेंसेक्स की गणना 100 से शुरू की गई थी। सेंसेक्स की गणना करने के लिए "फ्री फ्लोर मार्केट कैपिटलाइजेशन" ( बाजार पूंजीकरण ) विधि का इस्तेमाल किया जाता है। इस विधि में सेंसेक्स में शामिल 30 कंपनियों का "फ्री फ्लोर मार्केट कैप" निकाला जाता है। इसके बाद इन सभी कंपनीयो के मार्केट कैप को जोड़कर कुल गणना की जाती है। फिर इसकी गणना सेंसेक्स के आधार वर्ष के सापेक्ष की जाती है।इस आधार पर जो भी परिणाम आता है, वह सेंसेक्स का अंक है। उदाहरण के लिए,यदि 100 करोड के लिए सेंसेक्स का अंक 4 था तो 200 करोड़ के लिए यह 8 पर निर्धारित होगा और 400 करोड़ के लिए यह 16 अंक पर निर्धारित होगा। मार्केट कैप में बदलाव शेयरो में वृद्धि या फिर शेयरो की कीमत ( मूल्य ) में बढ़ोतरी या कमी के चलते हो सकता है। सेंसेक्स में कंपनीयो का चयन एक "इंडेक्स समिति" करती है। इसमें शामिल होनेवाली कंपनीयो को निर्धारित नियमो का पालन करना पड़ता है। उनमें से एक नियम यह है कि कंपनी बी,एस, ई की पहली 100 मार्केट कैप्वाली कंपनीयो में से एक होनी चाहिए और उसका कुल मार्केट कैप बी,एस, ई के कुल मार्केट कैप का 0,5 % से ज्यादा होना चाहिए।

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