Safeguard to investor

सुरक्षा सम्बंधित जानकारी


हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे आप लोगो केलिए  सुरक्षा सम्बंधित जानकारी इस ब्लॉग में दिया हूँ जिसे आप फॉलो करके अपने इंवेशटिंग के सुरक्षा को जान सकते है धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो
        निवेशको के लिए सुरक्षा के उपाय
   ( Safeguards For Investors )
शेयर धारक ने शेयर बाजार में आने से पूर्व सुरक्षा के लिए नीचे दी हुई बातो का ध्यान रखना चाहिए।
(१)..ब्रोकर --सब ब्रोकर का चयन करते समय ( While selecting the broker /sub-Broker ):
सिर्फ सेबी के पास दर्ज किए दलाल के साथ ही व्यापार कीजिए। दलाल की लिस्ट शेयर बाजार ने प्रसिध्द किए सभासदों की लिस्ट में प्रस्तुत की जाती है।
(२)..करार कीजिए
   ( Enter in to an Agreement ):
(।)..दलाल के पास ग्राहक दर्ज का फॉर्म भरना चाहिए। शेयर बाजार ने प्रस्तुत किया हुआ रिस्क डिस्क्लोजर डॉक्यूमेंट हर ग्राहक को समझलेन चाहिए और व्यापार करने से पूर्व उस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करना चाहिए।
(।।).. ब्रोकर/सब-ब्रोकर क्लाइंट Broker/Sub-Broker-Client करार करना चाहिए। बी.एस. ई या एन. एस. ई के सभासद होने के लिए यह करार निवेशको के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
(३)..व्यवहार करते समय।
(।)..आप जिस स्टॉक एक्सचेंज के जरिये व्यवहार करनेवाले है ( बी,एस, ई,/एन, एस, ई,) उसके ब्रोकर,सब ब्रोकर को जानकारी दीजिए।
(।।)..व्यापार करने के 24 घण्टो के अंदर दलाल से करारनामा लीजिए। करारनामा उस दिन के व्यापार की पुष्टि होती है। इस करारनामे के दो नमूने होते है। एक नमूना दलाल के पास और दूसरा नमूना ग्राहक के पास होता है। ग्राहक को करारनामे के नमूने पर हस्ताक्षर करने पड़ता है जिससे असली करारनामा उनके पास है इस बात की उन्हें तसल्ली हो जाती है।
(।।।)..करारनामे पर सेबी ने दिए हुए दलाल का सभासद नम्बर,व्यापार की सभी जानकारी जैसे कि माँग नंबर,व्यापार नंबर,व्यापार का समय,भाव,संख्या आदि है या नही इसकी तसल्ली करनी चाहिए।
(४).. सेटलमेंट सुनिश्चित करना
( Ensuring Settlement ):
(।)..खरीदी बिक्री के करार पत्र होने के बाद तुरन्त दलाल को सेक्युरिटी की डिलीवरी या पेमेंट दिए गए समय के दिन में करना चाहिए।
(।।)..ग्राहक का पैसा आने के बाद 24 घटों के अंदर दलाल को उनके पैसे या शेयर उन्हें देने चाहिए। डीमेट अकॉउंट में से शेयर की डिलीवरी करने के लिए डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (DP) को डिलीवरी आउन्ट की सूचना करनी चाहिए जिससे शेयर बेनिफिशिरी एकाउंट में से दलाल के पल एकाउंट की जानकारी जिन्हें शेयर की बिक्री की उन्हें देनी चाहिए।
(।।।)..  अगर फिजिकल डिलीवरी ली है तो सेबी ने प्रस्तुत किए हुए डिलीवरी के नियम के साथ उनकी पूछताछ करके फिर डिलीवरी लेनी चाहिए।
(।।।।)..जो बांड डिलीवरी है वो ब्रोकर को मिलकर जल्द से उनका निवारण करना जरूरी है।
(।।।।।)..निवेशक ने अपने एकाउंट की पूछताछ दलाल के साथ 6 महीने में एकबार तो करनी ही चाहिए।
(५)..सेटलमेंट गारंटी
(Settlement Guarantee)://
Nsccl व्यवहार होने के बाद दोषी पार्टी को पैसे और माल की डिलीवरी हुई है या नही उसकी तसल्ली करता है। उनके पास सेटल मेन्ट गारंटी है। 31 मार्च 2003 में सेटलमेंट गारंटी का अमाउंट 1487 करोड़ था और अगर वापसी (settlement) में कठिनाई हुई तो सेटलमेंट गारंटी फण्ड तसल्ली देता है कि शेयर धारक को उनके पैसे अथवा माल की डिलीवरी मिलेगी। जब शेयर दलाल (Treding Member) सेटलमेंट अथवा पेमेंट में गलती करते है तब यह  सेटलमेंट गारंटी फंड सुधरता है। इसके लिए सेटलमेंट गारंटी फन्ड दान जमा हुए पैसे का उपयोग करता है।इसमें काउंटर पार्टी का धोखा नही रहता मार्केट को पूरी तसल्ली है कि अगर शेयर दलाल की गलती हो तो भी सेटलमेंट तो होगा ही इसकी गारंटी सेटलमेंट गारंटी फन्ड के वजह से मिलती है।
निवेशक सुरक्षा फन्ड
( Investers Protection Fund ):
इस फन्ड की स्थापना निवेशको के लिए की गई है जब शेयर दलाल अपनी जवाबदारी में असफल होते है तब इस फन्ड से निवेशको को उनके पैसे वापिस मिलते है। यह फन्ड चरिटी कमीशन में दर्ज किया होता है।
बी,एस,ई के निवेशक सुरक्षा फन्ड
(Investors Protection Fund of BSI )
इस फन्ड की स्थापना करने में बी,एस, ई सर्वप्रथम है।इस फन्ड की स्थापना दलाल विरोधी ग्राहकों के संरक्षण के लिए की गई है। इसकी स्थापना 10 जुलाई 1986 में हुई है और चरिटी कमीशन के पास उसे दर्ज किया है। बी,एस, ई दलाल की गलतिपर अधिक से अधिक 10 लाख रुपयो तक नुकसान भरकर दे सकती है। शेयर दलाल 10 लाख रुपयो के टर्नओवर पर 1,50 पैसे के हिसाब से रक्कम फन्ड में जमा करते है और स्टॉक एक्सचेंज नई कंपनी के लिस्टेड से 2,5 उस फन्ड में जमा करते है।
इन्वेस्टर्स प्रोटेक्शन फन्ड (आइपीएफ )
(Investors Protection fund IPF)
बॉम्बे पब्लिक ट्रस्ट1950 के नाम पर यह फण्ड ट्रस्ट कहकर स्थापित किया गया है। आइपीएफ का संचालन एन एस ई के हाथ के नीचे होता है।अगर दोषी दलाल ने काम की सेटलमेंट नही की तो ग्राहक की माँग का हक्क सुरक्षित रखने के लिए ऐसी योजना की गई है जब दलाल दोषी होता है तब आइपीएफ के फन्ड की रक्कम से ग्राहक को उनकी रक्कम वापिस दी जाती है आइपीएफ ग्राहकों को 5 लाख तक का नुकसान भरकर देता है।
ट्रेड गारंटी फन्ड
( Trade Guarantee Fund ):
व्यापार की समस्याएं मिटाने  के लिए और दलाल से तसल्ली का व्यवहार करने के लिए और मार्केट में समतल रखने के लिए 12 मई 1996 से ट्रेड गारंटी फन्ड अस्तित्व में आया। ट्रेड गारंटी का हेतु नीचे दिया गया है।
(।)..स्टॉक एक्सचेंज के व्यापार का व्यवहार समय पर पूरा करना और शेयर धारकों का और स्टॉक एक्सचेंज के सभासदों का विश्वास कायम रखने के लिए मदद करना।
(।।)..द्वितीय मार्केट के भारतीय और विदेशी बाजार में भारतीय निवेशक और अफ, आय,आय, का विश्वास मार्केट में कायम रखने के लिए।
(।।।)..निवेशको का विश्वास संपादन करना और वह कायम रखना, द्वितीय बाजार की प्रगति करना। इस फन्ड का संचालन डिफाल्टर कमिटी करती है। यह कमिटी एक्सचेंज ने बनाई है और सेबी ने उसे मंजूरी भी दी है।

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Milan Tomic

Hi. I’m Designer of Blog Magic. I’m CEO/Founder of ThemeXpose. I’m Creative Art Director, Web Designer, UI/UX Designer, Interaction Designer, Industrial Designer, Web Developer, Business Enthusiast, StartUp Enthusiast, Speaker, Writer and Photographer. Inspired to make things looks better.

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