Buy and sells tips
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेयर को सही समय मे कैसे बेचे और कौन से समय मे खरीदे उसके में पूरा डिटेल में बताया हूँ धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ मंगलमय हो
योग्य भाव पर खरीदी और बिक्री करना
( Best Buy And Best Sale )
( Best Buy And Best Sale )
वर्तमान मे सेंसेक्स 14000 से 14500 के भाव के बीच मे चल रहा है। भूतकाल का निवेश अधिक समय के लिए (long term) याने 5 से 6 वर्षो तक का होता था। परंतु आज के समय मे सेंसेक्स की तरह दीर्घ समय की व्याख्या 12 से 15 महीने हो गई है। अब 3 से 5 वर्ष निवेश करने का कोई फायदा नही क्योकि मार्केट में किसी भी समय शॉर्ट करेक्शन ( short correction ) आने की संभावना होती है।
जिस शेयर का भाव बहुत बड़ा है,उसका फायदा समय समय पर लेना चाहिए। उसे अंग्रेजी में "बुक प्रॉफिट"कहते है। इसका अर्थ ऐसा नही की एक ही समय मे अपनी पूरी स्क्रिप्ट बिक जानी चाहिए। उस स्क्रिप्ट के दो तीन हिस्से करके हमे फायदा लेना चाहिए। यह तब होगा जब मार्केट ऊपर की तरफ जायगा। तब हमने बुक किए फायदे में से ही फिरसे खरीदी करे जिससे आपको खरीदी का एवरेज कम होता है और बिके हुऐ शेयर का भी एवरेज मिलता है।
शेयर बाजार में अनुशासन का बहुत महत्व होता है।उस क्षेत्र में एक ही मार्ग से काम करना जरूरी है उसी के साथ लचीलापन भी आवश्यक है। यह दोनों नियम ध्यान में रखकर समय के अनुसार फायदा बुक करते रहकर बिक्री करते रहिए और साथ हिज्ब छोटा करेक्शन होगा तब थोड़ी खरीदी चालू रखनी चाहिए। कभी कभी अगर ऊपर की बात ध्यान में नही रखी तो ऊपर दिखनेवाला मुनाफा नुकसान में आने के लिए देर नही लगती और वह हम सह नही सकते।
बिक्री करने के बाद अगर उस स्क्रिप्ट का भाव एक दम से बढ़ते चले गया और वो हमें नही मिला, तो हमे किसी भी प्रकार का खेद नही करना चाहिए क्योंकि इस शेयर बाजार में बेचने के लिए ऊपर का भाव और खरीदने के लिए नीचे का भाव कभी नही मिलता है।यह इस मार्केट की विशेषता है। इसकी कोई एक बात छोड़कर हमने अपने भाव मे शेयर बेचे है ऐसा समझकर चलेंगे तो ही हम शेयर मार्केट में टिक सकते है।
जब हम शेयर मार्केट में व्यवहार करते है तब उसमें हमे नुकसान हुआ तो उसका श्रेय दुसरो को न देकर वह मेरी गलती थी उसकी जिम्मेदार मैं ही हूँ ऐसा समझकर भविष्य में फिर से वह गलती न करके व्यवहार करनेवाले शेयर मार्केट में टिक सकते है। जिस कंपनी का अहवाल अच्छा आया है या उसे अच्छा आर्डर मिलता है। ऐसी कंपनी भविष्य में अच्छा मुनाफा दिलानेवाली हो सकती है। इस कारण उनके शेयर में निवेश करना फायदेमंद होता है। उसे सट्टेबाजी में भी अच्छी मांग होती है। इसलिए इस शेयर में 20% से25%फायदा लेकर व्यवहार बन्द करना चाहिए।
आज के मार्केट में ऐसी परिस्थिति है कि अगर निवेशक 8 से 10 स्क्रिप्ट लेकर ठीक तरह मर्यादा से बेचकर एक दो बार मुनाफा कमाते है तो वह फायदा दीर्घ समय के लिए निवेश से मिलने वाली फायदे से अधिक होता है। उसे अंग्रेजी में चरनिंग कहते है।
जब संस्था के पास बहुत पैसा होता है और साथ ही सामान्य आदमी की खरीदने की क्षमता अधिक होती है तब हमें ऐसा समझना चाहिए कि मार्केट की परिस्थिति अच्छी है। उस वक्त शेयर मार्केट के भाव बढ़ते जाते है और तेजी से उसके स्क्रिप्ट के भाव भी बढ़ते जाते है। जिससे मार्केट का चढ़ाव ऊपर होते जाता है। तब ऐसा दर्शाया जाता है कि बाहरी निवेशक और संस्था खरीदी के लिए तैयार है। दूसरे शब्दों में बताना हो तो माल की क्षमता के मुकाबले मांग अधिक होती है।
जब बाजार नीचे आता है तब वॉल्यूम कम हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि जब बाजार का झुकाव नीचे होता है तब शेयर धारक खुद के शेयर कम भाव मे बेचने को तैयार नही होते जब करेक्शन होता है उस समय वॉल्यूम बढ़ा तो मंदी के दौर का निर्माण होता है। तब छोटे बड़े नुकसान से बाहर निकलना अच्छा और जब बाजार में तेजी का माहौल दिखने लगे तब थोड़ी थोड़ी खरीदी करके स्क्रिप्ट में फायदा बुक करके बाहर निकलना चाहिए।
कंपनी का फुण्डामेंटल अच्छा नही होगा तो वह स्क्रिप्ट नही खरीदनी चाहिए।वह सस्ते में मिल रही हो तो भी वह नही खरीदनि चाहिए क्योंकि उस कंपनी का भविष्य उज्जवल नही है।
जिस कंपनी की कार्यक्षमता अच्छी है साथ ही वह कम निवेश में अधिक फायदा दिलाती है और उसकी भीतरी प्रगति करने की क्षमता भी अच्छी है तब ऐसी कंपनी की स्क्रिप्ट ने निवेश करने में कोई हर्ज नही। यहाँ यह भी देखना जरूरी है कि वह कंपनी निवेशक को भविष्य में 3 से 5 वर्षो तक फायदा दे सकती है या नही। एक बात ध्यान में रखिए कि अगर कंपनी की कमाई बढ़ी तो भी उसके कुल मुनाफे में उतनी बढ़ोतरी नही होती। तो उस कंपनी के शेयर लेकर कोई फायदा नही होता।
सेकंडरी कंपनी में 20 से 30%से अधिक निवेश करना आपके पोर्टफोलियो के हित का नही होता। आज खास करके जब कंपनी में तेजी आती है तब बिना डगमगाए वहाँ से निकल जाइए और किसी भी कारण से करेक्शन में फंसने से पहले निकलना जरूरी है। नही तो वह माल बेचते समय आपको बहुत दिक्कत होगी।
अगर किसी स्क्रिप्ट का भाव आपके भाव के ऊपर या नीचे हुआ तो तुरन्त फायदा बुक करना अच्छा है। कभी भी संपूर्ण निवेश एक ही स्क्रिप्ट में नही करना चाहिए। हमारे पोर्टफोलियो (खाते) में 10 से 12 स्क्रिप्ट रखनी चाहिए। तेजी का दौर कम हुआ तो खरीदी में जल्दबाजी नही करनी चाहिए और आपको लगता हो कि कोई स्क्रिप्ट बढ़ेगी पर वह बढ़ती नही और उसके भाव मे खास हलचल नही होती तब उसे वैसे ही रहने देना चाहिए। सिर्फ अच्छे फुंदमेंट्स वाली स्क्रिप्ट में निवेश करना चाहिए।
जो स्क्रिप्ट के भाव मे वर्तमान में बहुत बढ़ी हलचल हो रही है उसमें से तुरन्त मुनाफा लेकर बाहर निकल जाना चाहिए। वहाँ पर लालच नही करना चाहिए और अपने लालच पर नियंत्रण रखना चाहिए।
शेयर खरीदते समय अपने देश की आर्थिक परिस्थिति और साथ ही दुनिया भर की आर्थिक परिस्थिति भी देखनी चाहिए। अपना ध्यान सेंसेक्स पर केंद्रित कीजिए और साथ ही दुनिया भर के सूचकांक पर भी नजर रखिए। मार्केट के सभी सेक्टर्स की हलचल पर भी ध्यान दीजिए। यह सब विश्लेषण करने के बाद ही कोई भी स्क्रिप्ट खरीदिए।
हर कोई किसी विशेष कंपनी के शेयर खरीद रहे है इसलिए हमें भी लेने चाहिए ऐसा जरूरी नही।
ऊपर की सभी बांतो पर ध्यान दिया तो हम योग्य प्रकार से खरीदी और बिक्री कर पाएगें।
शेयर बाजार में अनुशासन का बहुत महत्व होता है।उस क्षेत्र में एक ही मार्ग से काम करना जरूरी है उसी के साथ लचीलापन भी आवश्यक है। यह दोनों नियम ध्यान में रखकर समय के अनुसार फायदा बुक करते रहकर बिक्री करते रहिए और साथ हिज्ब छोटा करेक्शन होगा तब थोड़ी खरीदी चालू रखनी चाहिए। कभी कभी अगर ऊपर की बात ध्यान में नही रखी तो ऊपर दिखनेवाला मुनाफा नुकसान में आने के लिए देर नही लगती और वह हम सह नही सकते।
बिक्री करने के बाद अगर उस स्क्रिप्ट का भाव एक दम से बढ़ते चले गया और वो हमें नही मिला, तो हमे किसी भी प्रकार का खेद नही करना चाहिए क्योंकि इस शेयर बाजार में बेचने के लिए ऊपर का भाव और खरीदने के लिए नीचे का भाव कभी नही मिलता है।यह इस मार्केट की विशेषता है। इसकी कोई एक बात छोड़कर हमने अपने भाव मे शेयर बेचे है ऐसा समझकर चलेंगे तो ही हम शेयर मार्केट में टिक सकते है।
जब हम शेयर मार्केट में व्यवहार करते है तब उसमें हमे नुकसान हुआ तो उसका श्रेय दुसरो को न देकर वह मेरी गलती थी उसकी जिम्मेदार मैं ही हूँ ऐसा समझकर भविष्य में फिर से वह गलती न करके व्यवहार करनेवाले शेयर मार्केट में टिक सकते है। जिस कंपनी का अहवाल अच्छा आया है या उसे अच्छा आर्डर मिलता है। ऐसी कंपनी भविष्य में अच्छा मुनाफा दिलानेवाली हो सकती है। इस कारण उनके शेयर में निवेश करना फायदेमंद होता है। उसे सट्टेबाजी में भी अच्छी मांग होती है। इसलिए इस शेयर में 20% से25%फायदा लेकर व्यवहार बन्द करना चाहिए।
आज के मार्केट में ऐसी परिस्थिति है कि अगर निवेशक 8 से 10 स्क्रिप्ट लेकर ठीक तरह मर्यादा से बेचकर एक दो बार मुनाफा कमाते है तो वह फायदा दीर्घ समय के लिए निवेश से मिलने वाली फायदे से अधिक होता है। उसे अंग्रेजी में चरनिंग कहते है।
जब संस्था के पास बहुत पैसा होता है और साथ ही सामान्य आदमी की खरीदने की क्षमता अधिक होती है तब हमें ऐसा समझना चाहिए कि मार्केट की परिस्थिति अच्छी है। उस वक्त शेयर मार्केट के भाव बढ़ते जाते है और तेजी से उसके स्क्रिप्ट के भाव भी बढ़ते जाते है। जिससे मार्केट का चढ़ाव ऊपर होते जाता है। तब ऐसा दर्शाया जाता है कि बाहरी निवेशक और संस्था खरीदी के लिए तैयार है। दूसरे शब्दों में बताना हो तो माल की क्षमता के मुकाबले मांग अधिक होती है।
जब बाजार नीचे आता है तब वॉल्यूम कम हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि जब बाजार का झुकाव नीचे होता है तब शेयर धारक खुद के शेयर कम भाव मे बेचने को तैयार नही होते जब करेक्शन होता है उस समय वॉल्यूम बढ़ा तो मंदी के दौर का निर्माण होता है। तब छोटे बड़े नुकसान से बाहर निकलना अच्छा और जब बाजार में तेजी का माहौल दिखने लगे तब थोड़ी थोड़ी खरीदी करके स्क्रिप्ट में फायदा बुक करके बाहर निकलना चाहिए।
कंपनी का फुण्डामेंटल अच्छा नही होगा तो वह स्क्रिप्ट नही खरीदनी चाहिए।वह सस्ते में मिल रही हो तो भी वह नही खरीदनि चाहिए क्योंकि उस कंपनी का भविष्य उज्जवल नही है।
जिस कंपनी की कार्यक्षमता अच्छी है साथ ही वह कम निवेश में अधिक फायदा दिलाती है और उसकी भीतरी प्रगति करने की क्षमता भी अच्छी है तब ऐसी कंपनी की स्क्रिप्ट ने निवेश करने में कोई हर्ज नही। यहाँ यह भी देखना जरूरी है कि वह कंपनी निवेशक को भविष्य में 3 से 5 वर्षो तक फायदा दे सकती है या नही। एक बात ध्यान में रखिए कि अगर कंपनी की कमाई बढ़ी तो भी उसके कुल मुनाफे में उतनी बढ़ोतरी नही होती। तो उस कंपनी के शेयर लेकर कोई फायदा नही होता।
सेकंडरी कंपनी में 20 से 30%से अधिक निवेश करना आपके पोर्टफोलियो के हित का नही होता। आज खास करके जब कंपनी में तेजी आती है तब बिना डगमगाए वहाँ से निकल जाइए और किसी भी कारण से करेक्शन में फंसने से पहले निकलना जरूरी है। नही तो वह माल बेचते समय आपको बहुत दिक्कत होगी।
अगर किसी स्क्रिप्ट का भाव आपके भाव के ऊपर या नीचे हुआ तो तुरन्त फायदा बुक करना अच्छा है। कभी भी संपूर्ण निवेश एक ही स्क्रिप्ट में नही करना चाहिए। हमारे पोर्टफोलियो (खाते) में 10 से 12 स्क्रिप्ट रखनी चाहिए। तेजी का दौर कम हुआ तो खरीदी में जल्दबाजी नही करनी चाहिए और आपको लगता हो कि कोई स्क्रिप्ट बढ़ेगी पर वह बढ़ती नही और उसके भाव मे खास हलचल नही होती तब उसे वैसे ही रहने देना चाहिए। सिर्फ अच्छे फुंदमेंट्स वाली स्क्रिप्ट में निवेश करना चाहिए।
जो स्क्रिप्ट के भाव मे वर्तमान में बहुत बढ़ी हलचल हो रही है उसमें से तुरन्त मुनाफा लेकर बाहर निकल जाना चाहिए। वहाँ पर लालच नही करना चाहिए और अपने लालच पर नियंत्रण रखना चाहिए।
शेयर खरीदते समय अपने देश की आर्थिक परिस्थिति और साथ ही दुनिया भर की आर्थिक परिस्थिति भी देखनी चाहिए। अपना ध्यान सेंसेक्स पर केंद्रित कीजिए और साथ ही दुनिया भर के सूचकांक पर भी नजर रखिए। मार्केट के सभी सेक्टर्स की हलचल पर भी ध्यान दीजिए। यह सब विश्लेषण करने के बाद ही कोई भी स्क्रिप्ट खरीदिए।
हर कोई किसी विशेष कंपनी के शेयर खरीद रहे है इसलिए हमें भी लेने चाहिए ऐसा जरूरी नही।
ऊपर की सभी बांतो पर ध्यान दिया तो हम योग्य प्रकार से खरीदी और बिक्री कर पाएगें।
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