इंवेशटिंग टिप्स
स्टॉक सिलेक्शन करने की स्ट्रेटेजी
नमस्कार दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे आप सभी दोस्तों के इंवेटिंग की महत्व पूर्ण टिप्स के बारे में बताया हु जिसे आप अपने निवेश के लिए काफी मदद करेगा जो इस प्रकार से है

( Strategies for Stock Selection)
एक डे ट्रेडर के रूप में सफल होने के लिए आवश्यक हर गुण आप मे होने पर भी आप कामयाब होंगे ऐसा मत समझिए। डे ट्रेडिंग के लिए सही शेअर्स का चुनाव करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। परंतु इस बारे में ज्यादातर डे ट्रेडर असफल हुए है ऐसा नजर आता है क्योंकि डे ट्रेडिंग करने के लिए वह सही शेअर्स का चुनाव नही करते है।
डे ट्रेडिंग करने के लिए सही शेअर्स का चुनाव कैसे करना चाहिए इसकी चर्चा हम इस पाठ में करनेवाले है।इन नियमो का तुरन्त अध्ययन करना आवश्यक है। इसलिए डे ट्रेडिंग में होनेवाले नुकसान से आप बच सकते है। उनमें से कुछ नियम नीचे दिए है।
*.... ज्यादा वॉल्यूम वाले लिक्विड स्टॉक में ही डे ट्रेडिंग कीजिए।
*.... जिन शेअर्स के बारे में कुछ अंदाजा नही लगाया जा सकता उन शेअर्स में डे ट्रेडिंग नही करनी चाहिए।
*.....एक दूसरे केसाथ अच्छी तरह से कोरिलेशन वाले शेअर्स में ही ट्रेडिंग कीजिए।
*.... बाजार की चाल के साथ चाल मिलाकर ही आगे बढ़िए।
*..... शेअर्स चुनाव करने से पहले उनका पूरी तरह से संशोधन कीजिए।
(1)*..... लिक्विड स्टॉक में ही ट्रेडिंग कीजिए।
( Trade Liquid Stocks )
....बारबार ऐसा कहा जाता है कि बाजार में लिक्विडिटी होना ट्रेडर के लिए ऑक्सीजन होने के बराबर है। बाजार में लिक्विडिटी ना हो तो आपका अस्तित्व भी नही होता है। इसलिए जिन शेअर्स में लिक्विडिटी हो उन शेअर्स का ही डे ट्रेडिंग के लिए चुनाव कीजिए। जिन शेअर्स का बाजार में लेन-देन का प्रमाण अधिक होता है उन शेअर्स को लिक्विड शेअर्स कहके पहचाना जाता है। इस प्रकार के शेअर्स के ट्रेडिंग का बाजार के भाव पर बहुत प्रभाव होता है।इस प्रकार की लिक्विडिटी धारण करनेवाले शेअर्स में ही ट्रेडिंग करने की सलाह दी जाती है।जिन शेअर्स की लिक्विडिटी कम हो ऐसे शेअर्स का ट्रेडिंग करने के लिए चुनाव करने पर ट्रेडिंग करनेवाले का जोखिम अधिक बढ़ता है। ऐसे शेअर्स को इल्लिकविड कहा जाता है। मगर कुछ ट्रेडर्स ऐसे इल्लिकविड शेअर्स में ट्रेडिंग करते है।क्योंकि कम लिक्विडिटी वाले शेअर्स का भाव एकदम से बदलकर बढ़ सकता है। मगर इस प्रकार के शेअर्स के भाव मे बदलाव इतनी तेजी से होता है कि डे ट्रेडर के ट्रेडिंग करने से पहले ही उसमे बहुत बड़ा बदलाव आता है। उसी तरह इन शेअर्स मे डे ट्रेडिंग करने के लिए मिलनेवाले सँख्याबद्ध मौके का फायदा लेने से पहले ही वह अपने हाथ से निकल जाते है ऐसा नजर आता है। इस के साथ ही डे ट्रेडर ने जिन भाव मे शेअर्स खरीदे है वह भाव गिरकर नीचे जाने का डर भी होता है।
लिक्विडिटी के लिए कोई खास नियम नही होते है। यह कुछ अंश में आपके ट्रेडिंग के गुणवत्ता पर निर्भर होती है। समझ लीजिए कि आपने रुपये, 50,000 से रु ,75,000 तक के वेल्युम वाले शेअर्स के ट्रेडिंग केलिए 50 से 100 शेअर्स खरीदे तो उनमें खास कोई भी अड़चन नही होती। अगर आपने दे ट्रेडिंग के लिए 5 से 15 हजार शेअर्स खरीदे तो ऐसे वक्त उसका वेल्युम लाखो शेअर्स का होना जरूरी है।इस तरह की लिक्विडिटी वाले कुछ शेअर्स रिलायन्स इंडस्ट्रीज,एस बीआय,इंफोसिस,ओ,एन, जी,सी आदि है।
( 2)*.... जिन शेअर्स का भाव का अंदाजा नही लगाया जा सकता उनका ट्रेडिंग नही करना चाहिए
( Avoid Unpredictable - Chaotic Stock ):
आम तौर पर ऐसा नजर आता है कि कम वेल्युम वाले शेअर्स के बारे में कुछ खास खबर आनेवाली हो तो उसके कारण ऐसे शेअर्स मेहोनेवाले उत्तर-चढ़ाव का कुछ निश्चित अंदाजा नही लगाया जा सकता। कई बार महत्व का विज्ञापन ( जैसे कि बड़ा आर्डर मिलना, अच्छे रिजल्ट,खराब रिजल्ट,प्लांट बन्द हुआ आदि )
करके भी शेअर्स के भाव मे बढ़त होगी या घटाव होगा इसका अंदाज नही लगाया जासकता ऐसी परिस्थिति में उन शेअर्स का ट्रेडिंग करना टाल देना ही योग्य होता है।कई बार मिड-कप और स्मॉल-कप शेअर्स का ज्यादातर हिस्सा और उनमें खासकर के एस s, टीएस ts, और जेड z ग्रुप में आनेवाले शेअर्स में बड़े पैमाने पर अनियमितता दिखाई देती है। डे ट्रेडिंग में इन शेअर्स का ट्रेडिंग करना टालिए। इन शेअर्स का वेल्युम भी बहुत ही कम होता है।
(3)*......दूसरे शेअर्स के साथ कोरिलेशन वाले शेअर्स का ट्रेडिंग कीजिए
(Trade Stock With Good Correlation ):
एक दूसरे के साथ अच्छी तरह से जुड़े हुए शेअर्स का ट्रेडिंग करने के लिए चुनाव कीजिए।इंडेक्स के साथ चढ़ने वाले या उतरने वाले साथ ही विशेष सेक्टर के परफॉर्मन्स के साथ बढ़ने वाले या घटने वाले शेअर्स कही डे ट्रेडिंग के लिए चुनाव कीजिए। हर एक सेक्टर में दिखाई देनेवाले ट्रेन्ड के अनुसार जिस स्टॉक का परफॉर्मन्स और कंपनी का परफॉर्मन्स बढ़ता है या घटता है उन शेअर्स में ही ट्रेडिंग कीजिए।क्योकि उनके बारे में अच्छा अंदाजा लगाया जा सकता है। उसी तरह इन शेअर्स मे होनेवाले उत्तर-चढ़ाव भी बहुत विश्वसनीय होता है। साथ ही बाजार में अगर कोई अच्छी या बुरी खबर आई और उसका प्रभाव कोई सेक्टर पर हुआ तो उसके कारण उस सेक्टर में आनेवाले परिवर्तन के अनुसार आप अपने शेअर्स के भाव मे होनेवाला उत्तर-चढ़ाव ध्यान में रख सकते है।
(4)*....बाजार के ट्रेन्ड के अनुसार चलिए
( Move with the Trend):
नदी के प्रवाह के साथ तैरना आसान होता है परंतु उसके विरुद्ध दिशा में तैरना बहुत जोखिमभरा और कठिन होता है "It इस always easier to swim along the river rather than across it" डे ट्रेडिंग करते समय यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए।
बाजार में तेजी का माहौल होता है तब जिन शेअर्स या जिन सेक्टर के शेअर्स का भाव बढ़ रहा है उनमें ही डे ट्रेडिंग करनी चाहिए। बाजार में तेजी का माहौल हो तब जिस शेअर्स का भाव कम होने की सभांवना होती है उन शेअर्स में ट्रेडिंग नही करना चाहिये इसी प्रकार बाजार में मंदी का माहौल हो तब जिन शेअर्स का भाव घटने की संभावना होती है उन शेअर्स में ही ट्रेडिंग करनी चाहिए। मंदी के समय मे जिन शेअर्स का भाव बड़ा रहा हो उन शेअर्स में ट्रेडिंग नही करनी चाहिए।
(5)*... संशोधन ( Research ).
डे ट्रेडिंग में कामयाब होने के लिए बहुत सारा रिसर्च करना जरूरी है साधारण रूप से ऐसा नजर आता है कि ट्रेडर बहुत ही कम रिसर्च करते है।
सबसे पहले डे ट्रेडिंग के लिए आपकी शैली के अनुसार योग्य इंडेक्स को ढूंढकर अलग निकालिए। इस इंडेक्स में सेंसेक्स को या निफ़्टी को शामिल किया जा सकता है। उसी तरह आपका हिट जिसमे है उस सेक्टर का भी चुनाव कीजिए। इसके बाद डे ट्रेडर को इस सेक्टर के साथ जुड़ी हुई उत्तम कंपनीयो के शेअर्स का लिस्ट बनाना चाहिए। डे ट्रेडर को एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जिन शेअर्स का उन्होंने चुनाव किया है वह उस सेक्टर की प्रमुख कंपनी होनी चाहिए और उन शेअर्स का अच्छा वेल्युम होना चाहिए।
इस सेक्टर के शेअर्स का चुनाव करने के बाद इन शेअर्स का लगातार टेक्निकल अनालिसिस करना जरूरी है। टेक्निकल अनालिसिस की मदद से यह अंदाजा लगाया जा सकता है साथ ही आने वाले दिनों में उन शेअर्स का भाव बढेगा या घटेगा। यह शेअर्स ओव्हर बाँट है या ओव्हर सोल्ड है यह जानना भी आवश्यक है। आपको उसके व्हलयुम में कुछ महत्व का परिवर्तन दिखता है या नही इसका अभ्यास भी करना जरूरी है।
इन कंपनीयो के फंडामेंटल्स का भी अभ्यास करना चाहिए। यह कंपनीया उनका आर्थिक परिणाम कब जाहिर करती है वह जान लेने का प्रयास करना चाहिए।
स्टॉक सिलेक्शन करने की स्ट्रेटेजी
नमस्कार दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे आप सभी दोस्तों के इंवेटिंग की महत्व पूर्ण टिप्स के बारे में बताया हु जिसे आप अपने निवेश के लिए काफी मदद करेगा जो इस प्रकार से है

( Strategies for Stock Selection)
एक डे ट्रेडर के रूप में सफल होने के लिए आवश्यक हर गुण आप मे होने पर भी आप कामयाब होंगे ऐसा मत समझिए। डे ट्रेडिंग के लिए सही शेअर्स का चुनाव करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। परंतु इस बारे में ज्यादातर डे ट्रेडर असफल हुए है ऐसा नजर आता है क्योंकि डे ट्रेडिंग करने के लिए वह सही शेअर्स का चुनाव नही करते है।
डे ट्रेडिंग करने के लिए सही शेअर्स का चुनाव कैसे करना चाहिए इसकी चर्चा हम इस पाठ में करनेवाले है।इन नियमो का तुरन्त अध्ययन करना आवश्यक है। इसलिए डे ट्रेडिंग में होनेवाले नुकसान से आप बच सकते है। उनमें से कुछ नियम नीचे दिए है।
*.... ज्यादा वॉल्यूम वाले लिक्विड स्टॉक में ही डे ट्रेडिंग कीजिए।
*.... जिन शेअर्स के बारे में कुछ अंदाजा नही लगाया जा सकता उन शेअर्स में डे ट्रेडिंग नही करनी चाहिए।
*.....एक दूसरे केसाथ अच्छी तरह से कोरिलेशन वाले शेअर्स में ही ट्रेडिंग कीजिए।
*.... बाजार की चाल के साथ चाल मिलाकर ही आगे बढ़िए।
*..... शेअर्स चुनाव करने से पहले उनका पूरी तरह से संशोधन कीजिए।
(1)*..... लिक्विड स्टॉक में ही ट्रेडिंग कीजिए।
( Trade Liquid Stocks )
....बारबार ऐसा कहा जाता है कि बाजार में लिक्विडिटी होना ट्रेडर के लिए ऑक्सीजन होने के बराबर है। बाजार में लिक्विडिटी ना हो तो आपका अस्तित्व भी नही होता है। इसलिए जिन शेअर्स में लिक्विडिटी हो उन शेअर्स का ही डे ट्रेडिंग के लिए चुनाव कीजिए। जिन शेअर्स का बाजार में लेन-देन का प्रमाण अधिक होता है उन शेअर्स को लिक्विड शेअर्स कहके पहचाना जाता है। इस प्रकार के शेअर्स के ट्रेडिंग का बाजार के भाव पर बहुत प्रभाव होता है।इस प्रकार की लिक्विडिटी धारण करनेवाले शेअर्स में ही ट्रेडिंग करने की सलाह दी जाती है।जिन शेअर्स की लिक्विडिटी कम हो ऐसे शेअर्स का ट्रेडिंग करने के लिए चुनाव करने पर ट्रेडिंग करनेवाले का जोखिम अधिक बढ़ता है। ऐसे शेअर्स को इल्लिकविड कहा जाता है। मगर कुछ ट्रेडर्स ऐसे इल्लिकविड शेअर्स में ट्रेडिंग करते है।क्योंकि कम लिक्विडिटी वाले शेअर्स का भाव एकदम से बदलकर बढ़ सकता है। मगर इस प्रकार के शेअर्स के भाव मे बदलाव इतनी तेजी से होता है कि डे ट्रेडर के ट्रेडिंग करने से पहले ही उसमे बहुत बड़ा बदलाव आता है। उसी तरह इन शेअर्स मे डे ट्रेडिंग करने के लिए मिलनेवाले सँख्याबद्ध मौके का फायदा लेने से पहले ही वह अपने हाथ से निकल जाते है ऐसा नजर आता है। इस के साथ ही डे ट्रेडर ने जिन भाव मे शेअर्स खरीदे है वह भाव गिरकर नीचे जाने का डर भी होता है।
लिक्विडिटी के लिए कोई खास नियम नही होते है। यह कुछ अंश में आपके ट्रेडिंग के गुणवत्ता पर निर्भर होती है। समझ लीजिए कि आपने रुपये, 50,000 से रु ,75,000 तक के वेल्युम वाले शेअर्स के ट्रेडिंग केलिए 50 से 100 शेअर्स खरीदे तो उनमें खास कोई भी अड़चन नही होती। अगर आपने दे ट्रेडिंग के लिए 5 से 15 हजार शेअर्स खरीदे तो ऐसे वक्त उसका वेल्युम लाखो शेअर्स का होना जरूरी है।इस तरह की लिक्विडिटी वाले कुछ शेअर्स रिलायन्स इंडस्ट्रीज,एस बीआय,इंफोसिस,ओ,एन, जी,सी आदि है।
( 2)*.... जिन शेअर्स का भाव का अंदाजा नही लगाया जा सकता उनका ट्रेडिंग नही करना चाहिए
( Avoid Unpredictable - Chaotic Stock ):
आम तौर पर ऐसा नजर आता है कि कम वेल्युम वाले शेअर्स के बारे में कुछ खास खबर आनेवाली हो तो उसके कारण ऐसे शेअर्स मेहोनेवाले उत्तर-चढ़ाव का कुछ निश्चित अंदाजा नही लगाया जा सकता। कई बार महत्व का विज्ञापन ( जैसे कि बड़ा आर्डर मिलना, अच्छे रिजल्ट,खराब रिजल्ट,प्लांट बन्द हुआ आदि )
करके भी शेअर्स के भाव मे बढ़त होगी या घटाव होगा इसका अंदाज नही लगाया जासकता ऐसी परिस्थिति में उन शेअर्स का ट्रेडिंग करना टाल देना ही योग्य होता है।कई बार मिड-कप और स्मॉल-कप शेअर्स का ज्यादातर हिस्सा और उनमें खासकर के एस s, टीएस ts, और जेड z ग्रुप में आनेवाले शेअर्स में बड़े पैमाने पर अनियमितता दिखाई देती है। डे ट्रेडिंग में इन शेअर्स का ट्रेडिंग करना टालिए। इन शेअर्स का वेल्युम भी बहुत ही कम होता है।
(3)*......दूसरे शेअर्स के साथ कोरिलेशन वाले शेअर्स का ट्रेडिंग कीजिए
(Trade Stock With Good Correlation ):
एक दूसरे के साथ अच्छी तरह से जुड़े हुए शेअर्स का ट्रेडिंग करने के लिए चुनाव कीजिए।इंडेक्स के साथ चढ़ने वाले या उतरने वाले साथ ही विशेष सेक्टर के परफॉर्मन्स के साथ बढ़ने वाले या घटने वाले शेअर्स कही डे ट्रेडिंग के लिए चुनाव कीजिए। हर एक सेक्टर में दिखाई देनेवाले ट्रेन्ड के अनुसार जिस स्टॉक का परफॉर्मन्स और कंपनी का परफॉर्मन्स बढ़ता है या घटता है उन शेअर्स में ही ट्रेडिंग कीजिए।क्योकि उनके बारे में अच्छा अंदाजा लगाया जा सकता है। उसी तरह इन शेअर्स मे होनेवाले उत्तर-चढ़ाव भी बहुत विश्वसनीय होता है। साथ ही बाजार में अगर कोई अच्छी या बुरी खबर आई और उसका प्रभाव कोई सेक्टर पर हुआ तो उसके कारण उस सेक्टर में आनेवाले परिवर्तन के अनुसार आप अपने शेअर्स के भाव मे होनेवाला उत्तर-चढ़ाव ध्यान में रख सकते है।
(4)*....बाजार के ट्रेन्ड के अनुसार चलिए
( Move with the Trend):
नदी के प्रवाह के साथ तैरना आसान होता है परंतु उसके विरुद्ध दिशा में तैरना बहुत जोखिमभरा और कठिन होता है "It इस always easier to swim along the river rather than across it" डे ट्रेडिंग करते समय यह बात हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए।
बाजार में तेजी का माहौल होता है तब जिन शेअर्स या जिन सेक्टर के शेअर्स का भाव बढ़ रहा है उनमें ही डे ट्रेडिंग करनी चाहिए। बाजार में तेजी का माहौल हो तब जिस शेअर्स का भाव कम होने की सभांवना होती है उन शेअर्स में ट्रेडिंग नही करना चाहिये इसी प्रकार बाजार में मंदी का माहौल हो तब जिन शेअर्स का भाव घटने की संभावना होती है उन शेअर्स में ही ट्रेडिंग करनी चाहिए। मंदी के समय मे जिन शेअर्स का भाव बड़ा रहा हो उन शेअर्स में ट्रेडिंग नही करनी चाहिए।
(5)*... संशोधन ( Research ).
डे ट्रेडिंग में कामयाब होने के लिए बहुत सारा रिसर्च करना जरूरी है साधारण रूप से ऐसा नजर आता है कि ट्रेडर बहुत ही कम रिसर्च करते है।
सबसे पहले डे ट्रेडिंग के लिए आपकी शैली के अनुसार योग्य इंडेक्स को ढूंढकर अलग निकालिए। इस इंडेक्स में सेंसेक्स को या निफ़्टी को शामिल किया जा सकता है। उसी तरह आपका हिट जिसमे है उस सेक्टर का भी चुनाव कीजिए। इसके बाद डे ट्रेडर को इस सेक्टर के साथ जुड़ी हुई उत्तम कंपनीयो के शेअर्स का लिस्ट बनाना चाहिए। डे ट्रेडर को एक बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि जिन शेअर्स का उन्होंने चुनाव किया है वह उस सेक्टर की प्रमुख कंपनी होनी चाहिए और उन शेअर्स का अच्छा वेल्युम होना चाहिए।
इस सेक्टर के शेअर्स का चुनाव करने के बाद इन शेअर्स का लगातार टेक्निकल अनालिसिस करना जरूरी है। टेक्निकल अनालिसिस की मदद से यह अंदाजा लगाया जा सकता है साथ ही आने वाले दिनों में उन शेअर्स का भाव बढेगा या घटेगा। यह शेअर्स ओव्हर बाँट है या ओव्हर सोल्ड है यह जानना भी आवश्यक है। आपको उसके व्हलयुम में कुछ महत्व का परिवर्तन दिखता है या नही इसका अभ्यास भी करना जरूरी है।
इन कंपनीयो के फंडामेंटल्स का भी अभ्यास करना चाहिए। यह कंपनीया उनका आर्थिक परिणाम कब जाहिर करती है वह जान लेने का प्रयास करना चाहिए।

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