महान दुनिया के सबसे धनी इन्वेस्टर वारेन बफेट की शेयर बाजार को एक बहुत ही उम्दा टिप्स बताया है उन नई पीढ़ी को जो अपने शेयर की सारी जानकारी को जान सके और शेअर प्रॉफिट कम सके
विश्व मे चर्चित कुछ लोकप्रिय निवेशक
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में विश्व के सबसे महान इन्वेस्टर के महत्वपूर्ण निवेश टिप्स और महत्वपूर्ण जानकारी शेयर बाजार के बारे में बताया हु जिससे आप अपने इंवेशटिंग की दुनिया का महान निवेशक बन सकते है धन्यवाद दोस्तो
ओमहा का परोपकारी पथ-प्रदर्शक:/ वारेन बफे
30 अगस्त,1930 को अमेरिका के ओमाहा में जन्मे वारेन एडवर्ड बफे को विश्व का सबसे सफलतम निवेशक मन जाता है। सन 2008 में फाबर्स द्वारा जारी अमीर लोगो की सूची में वारेन बफे को विश्व का सबसे अमीर व्यक्ति मन गया। 62 अरब डॉलर की आँकी गई सम्पत्तिवाले इस निवेशक, बिजनेसमैन और परोपकारी व्यक्ति को "ओमाहा का सन्त" कहा जाता है सन 1958 से ओमाहा में खरीदे हुए घर रह रहे वॉरेन बफे ने सन 2006 में अपनी संपत्ति का 83% "बिल और मिलेंडा फाउंडेशन" को दान कर दिया। सन 2007 में "टाइम्स" द्वारा जारी 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक वारेन बफे की यात्रा इतनी रोमांचक है कि उनकी किताब को निवेश की दुनिया मे "बाइबिल" का दर्जा बिया गया है।
वारेन बफे की "वैल्यू इंवेशटिंग फिलॉसफी" से प्रेरित होकर न जाने कितने निवेशको ने लाभ कमाया और अपनी गलतियों को सुधारा। इसलिए एक निवेशक को विश्व के इस महान निवेशक की रोमांच निवेश यात्रा और उसकी सफलता की कहानी जरूर पढ़नी चाहिए, ताकि शेअर बाजार में निवेश को लेकर उसकी सोच सही दिशा की ओर आगे बढे
वारेन बफे की जिंदगी के रोचक पक्ष
(१)..उन्होने पहला शेअर 11 वर्ष की उम्र में खरीदा और उन्हें आज तक इस बात का पछतावा है कि उन्होंने देर से शेयर खरीदना शुरू किया।
(२)..15 साल की उम्र में घर-घर न्यूज़पेपर बांटकर हुई आमदनी की बचत से दोस्तो के साथ मिलकर एक पिनबॉल मशीन लगा ली। इस स्मॉल स्केल वेंचर से उन्होंने थोड़ा पैसा बनाया और एक खेत खरीद लिया। इसके बाद बफे नेब्रास्का विश्वविधालय में शेयर बाजार का तकनीक विश्लेषण सीखने गए। लेकिन जल्दी ही उसे छोड़कर कोलंबिया विश्वविद्यालय चले गए,क्योकि वहाँ बेंजामिन ग्राहम पढ़ाते थे। उन्होंने ग्राहम के साथ कई साल काम किया और वापस ओमाहा आ गए।
(३).. इतने धनी होने के बावजूद वे अभी भी ओमाहा के अपने पुराने घर मे ही रहते है और इस बाबत वे कहते है कि "उनकी हर जरूरत उस घर मे पूरी हो जाती है तो वे नया घर क्यो खरीदे"।
(४).. हालाँकि वे विश्व की सबसे बड़ी प्राइवेट जेट कंपनी के मालिक है, पर वे स्वयं कभी भी प्राइवेट जेट में यात्रा नही करते।
(५)..उनकी कंपनी बर्कशायर हैथवे के अधीनस्थ 63 से ज्यादा कंपनीया है। उनका मानना है कि इन सभी कंपनीयो के सी,ई,ओ, के साथ नियमित अंतराल के बाद बैठक करने से समय और पैसे की बरबादी होती है,इसलिए वे सभी सी,ई,ओ, को वर्ष में एक बार पत्र लिखते है और उसमें वे उस साल के लिए निर्धारित लक्ष्य का उल्लेख करते है। इसके बाद न तो वे फोन द्वारा और न ही बैठक द्वारा उनके साथ सम्पर्क करते है। कंपनी के सी,ई,ओ, को 2 नियम पर चलने की सलाह वे देते है।
(६).. पहला,आपकी नीतियां ऐसी हो कि किसी भी शेयर होल्डर को घाटा नही उठाना पड़े।
(७)..दूसरा नियम यह है कि आपको पहलेवाला नियम हमेशा याद रखना है।
(८)..वारेन पार्टी व भीड़भाड़ से दूर रहना पसदं करते है,इसलिए वे यदि जल्दी घर पहुचते है तो अपना समय टी, वी, देखने और पॉपकार्न बनाकर घर मे बिताना ज्यादा पंसद करते है।
(९)..माइक्रोसॉफ्ट जैसी अनुपम भेंट पूरे विश्व को देनेवाले विश्व के धनी लोगो मे से एक बिल गेट्स जब पहली बार वारेन बफे से मिलने के लिए जाने वाले थे,तब उन्होंने इसके लिए सिर्फ आधा घण्टे का समय काफी समझा। लेकिन जब गेट्स बफे से मिले तो उनकी आधे घण्टे की भेंट 10 घण्टे में मुश्किल से पूरी हो पाई और वह भी इसलिए पूरी हो पाई,क्योकि वारेन बफे खुद ही उठकर चले गए थे। इसके बाद से बिल गेट्स ने वारेन बफे को अपना "गुरु" बना लिया
(१०)..आपको जानकर आश्चर्य होगा,लेकिन यह सत्य है कि उनके पास न तो सेलफोन है और न ही उनकी डेस्क पर कंप्यूटर है।
(११)..वारेन बफे विश्व के सबसे अमीर और सफलतम निवेशक अपने निवेश द्वारा मिले रिटर्न की बदौलत है।
(१२)..शुरुवात में उन्होंने अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम के वैल्यू इंवेशटिंग स्टाइल को अपनाया; लेकिन कुछ सालों के बाद वारेन ने खुद अपनी एक स्टाइल विकसित कर ली।
(१३)..जब भी अवसर उत्पन्न होते है, उनका इस्तेमाल कैसे किया जाए, उस पर वारेन की नजर रहती है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अवसर मिलते है, लेकिन उन्हें पहचानने की टाइमिंग पर आपका सफल होना निर्भर होता है।
(१४)..वारेन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दशकों बीत जाने के बाद भी शेयर बाजार में उनका प्रदर्शन सर्वोत्तम रहा और अपना लक्ष्य पाने के लिए उन्होंने कभी भी जोखिम भी नही लिया।
(१५)..निवेश के लिए उनकी अप्रोच लम्बी अवधि (लांग टर्म) के लिए रही। शेयर को खरीदना और उसे सही समय पर दूसरे निवेशक को बेंच देना जैसी नही रही। वे हमेशा अच्छे शेयर में बने रहने में विश्वास करते है और कंपाउंडिंग की पावर का उपयोग करते है।
(१६)..वारेन ने निवेश की प्रक्रिया को बिल्कुल आसान तथा आम आदमी की समझ मे आने लायक बनाया। धैर्य,अनुशासन और अपनी तरक्की के बूते वारेन बफे ने शेयर बाजार के मायने आम आदमी के लिए पूरी तरह बदल दिए। आम आदमी को शेयर बाजार एक ऐसा स्थल लगने लगा, जो सिर्फ सट्टेबाजी या जुआखोरी द्वारा पैसा कमाने का जरिया नही, बल्कि बुद्धि,अनुशासन,धैर्य और तर्क शक्ति के बूते पैसे कमाने का एक जरिया लगने लगा। वारेन बफे निवेशको को सलाह देते है कि ऐसी कंपनी या सेक्टर में निवेश मत करो जिसे आप समझ ही न पाओ ( बफे की यह बात इंटरनेट बूम के दौरान सही साबित हुई, क्योकि उस समय लोग इन शेयरो की ओर अंधी दौड़ लगा रहे थे,वही वारेन बफे ने अपना रास्ता चुना)।
(१७).'.सालाना वार्षिक सम्मेलन' में जब हजारो लोग इकट्ठे होते है,तब वारेन निवेशको को निवेश के सफल सूत्र बताते है।
(१८)..उनका मानना है कि कोई भी निवेश आँख मूँदकर नही करो,बल्कि निवेश का निर्णय पूरी तरह केंद्रित होकर और सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
(१९)..वारेन का मानना है कि जब लोगो की भीड़ किसी सेक्टर या शेयर पर टूट पड़े तो आप वहाँ से हट जाए और जब लोगो की रुचि उसमे नही रहे,तब आप उसमे रुचि लेने लगे।
(२०)..निवेश से पहले पूरी खोजबीन,प्रबंधन के बारे में जानकारी तथा प्रबंधन द्वारा संस्थागत कर्मचारियों से निपटने में सक्षमता को जांचकर कंपनी में निवेश का निर्णय ले
(२१).. वारेन बफे का मानना है कि शेयर या बांड आयसी कंपनी का होना चाहिए, जो अपने उद्दोग या सेवा में नम्बर वन हो और मुनाफा कमा रही हो। लेकिन सबसे जरूरी है, लम्बी अवधि के लिए निवेश,जो कि उनके अनुसार 10-15 साल का होता है।
(२२).. वारेन कहते है कि खूब पढ़े, जमकर पढ़े। वारेन बफे खुद अपना 60 % समय पढ़ने में गुजरते है। शेयर बाजार,निवेश,अर्थव्यवस्था और राजनीति---- सब कुछ पढ़े और उनका विश्लेषण करें।
युवा पीढ़ी को बफे की दी गई टिप्स
(१)*..क्रेडिट कार्ड से दूर रहे और खुद पर इन्वेस्ट कर। याद रखे कि पैसा आदमी को नही बल्कि आदमी पैसे को बनाते है।
(२)*.. आप जैसे है। वैसा ही जीवन जिए। दिखावे से अपने को दूर रखे।
(३)*.. दूसरे कह रहे है,इसलिए कोई काम न करे। सुने दूसरे की, लेकिन करे वही,जो आपके मन को अच्छा लगे।
(४)*..ब्रांड नाम के पीछे भागने की बजाय वही पहने,जिसमे आप आरामदायक महसूस कर सके।
(५)*.. यह आपकी जिंदगी है,इसलिए दुसरो को अपनी जिंदगी पर शासन करने का मौका न दे।
मंदी में भी आजमाए वारेन बफे का फॉर्मूला
वारेन बफे और उनके गुरु बेंजामिन ग्राहम को "वैल्यू निवेशक" मन जाता है। इनका मानना है कि मंडी के दौर में इक्विटी में पैसा लगते वक्त यह देखा जाए कि कंपनी के पास नगदी कितनी है;क्योकि ऐसी कंपनियाँ लम्बे समय मे अच्छा मुनाफा देती हो। कई जानकारी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि मंदी के दौर या अनिश्चित कारोबारी माहौल में यह कॉफी कारगर साबित होता है।
बफे मानते है कि बैलेंस शीट से लोन अलग करने के बाद जो नकदी बचती है,उसमे बदलाव नही आता है।
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के लिए, मान लीजिए कि किसी कंपनी का शेयर मूल्य 1,000 रुपये है और बैलेंस शीट में प्रति शेयर 600 रुपये की नकदी है। ऐसे में बैलेंस शीट की नकदिवाली रणनीति के हिसाब से शेयर की कीमत कम-से-कम 600 रुपये होनी चाहिए। जानकारी का मानना है कि जिस कंपनी के पास जितनी ज्यादा नकदी होगी,उसे कई कामो को करने की उतनी ही ज्यादा आजादी होगी--जैसे शेयरो के बायबैक पुनक्रय और कंपनीयो की खरीदारी आदि।
यदि हम गौर करे तो शेयरो के बायबैक से हमे शेयरो की "बॉटम वैल्यू" आसानी से पता चल जाती है।
बैलेंस शीट में नकदी की स्थिति जानने का सबसे अच्छा अनुपात "कैश-टू-मार्केट कैपिटलाइजेशन" है। जिस कंपनी का कैश-टू-मार्केट कैपिटलाइजेशन अनुपात जितना ज्यादा होता है,उसका शेयर उतना ही सस्ता होता है।
विश्व मे चर्चित कुछ लोकप्रिय निवेशक
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में विश्व के सबसे महान इन्वेस्टर के महत्वपूर्ण निवेश टिप्स और महत्वपूर्ण जानकारी शेयर बाजार के बारे में बताया हु जिससे आप अपने इंवेशटिंग की दुनिया का महान निवेशक बन सकते है धन्यवाद दोस्तो
ओमहा का परोपकारी पथ-प्रदर्शक:/ वारेन बफे
30 अगस्त,1930 को अमेरिका के ओमाहा में जन्मे वारेन एडवर्ड बफे को विश्व का सबसे सफलतम निवेशक मन जाता है। सन 2008 में फाबर्स द्वारा जारी अमीर लोगो की सूची में वारेन बफे को विश्व का सबसे अमीर व्यक्ति मन गया। 62 अरब डॉलर की आँकी गई सम्पत्तिवाले इस निवेशक, बिजनेसमैन और परोपकारी व्यक्ति को "ओमाहा का सन्त" कहा जाता है सन 1958 से ओमाहा में खरीदे हुए घर रह रहे वॉरेन बफे ने सन 2006 में अपनी संपत्ति का 83% "बिल और मिलेंडा फाउंडेशन" को दान कर दिया। सन 2007 में "टाइम्स" द्वारा जारी 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक वारेन बफे की यात्रा इतनी रोमांचक है कि उनकी किताब को निवेश की दुनिया मे "बाइबिल" का दर्जा बिया गया है।
वारेन बफे की "वैल्यू इंवेशटिंग फिलॉसफी" से प्रेरित होकर न जाने कितने निवेशको ने लाभ कमाया और अपनी गलतियों को सुधारा। इसलिए एक निवेशक को विश्व के इस महान निवेशक की रोमांच निवेश यात्रा और उसकी सफलता की कहानी जरूर पढ़नी चाहिए, ताकि शेअर बाजार में निवेश को लेकर उसकी सोच सही दिशा की ओर आगे बढे
वारेन बफे की जिंदगी के रोचक पक्ष
(१)..उन्होने पहला शेअर 11 वर्ष की उम्र में खरीदा और उन्हें आज तक इस बात का पछतावा है कि उन्होंने देर से शेयर खरीदना शुरू किया।
(२)..15 साल की उम्र में घर-घर न्यूज़पेपर बांटकर हुई आमदनी की बचत से दोस्तो के साथ मिलकर एक पिनबॉल मशीन लगा ली। इस स्मॉल स्केल वेंचर से उन्होंने थोड़ा पैसा बनाया और एक खेत खरीद लिया। इसके बाद बफे नेब्रास्का विश्वविधालय में शेयर बाजार का तकनीक विश्लेषण सीखने गए। लेकिन जल्दी ही उसे छोड़कर कोलंबिया विश्वविद्यालय चले गए,क्योकि वहाँ बेंजामिन ग्राहम पढ़ाते थे। उन्होंने ग्राहम के साथ कई साल काम किया और वापस ओमाहा आ गए।
(३).. इतने धनी होने के बावजूद वे अभी भी ओमाहा के अपने पुराने घर मे ही रहते है और इस बाबत वे कहते है कि "उनकी हर जरूरत उस घर मे पूरी हो जाती है तो वे नया घर क्यो खरीदे"।
(४).. हालाँकि वे विश्व की सबसे बड़ी प्राइवेट जेट कंपनी के मालिक है, पर वे स्वयं कभी भी प्राइवेट जेट में यात्रा नही करते।
(५)..उनकी कंपनी बर्कशायर हैथवे के अधीनस्थ 63 से ज्यादा कंपनीया है। उनका मानना है कि इन सभी कंपनीयो के सी,ई,ओ, के साथ नियमित अंतराल के बाद बैठक करने से समय और पैसे की बरबादी होती है,इसलिए वे सभी सी,ई,ओ, को वर्ष में एक बार पत्र लिखते है और उसमें वे उस साल के लिए निर्धारित लक्ष्य का उल्लेख करते है। इसके बाद न तो वे फोन द्वारा और न ही बैठक द्वारा उनके साथ सम्पर्क करते है। कंपनी के सी,ई,ओ, को 2 नियम पर चलने की सलाह वे देते है।
(६).. पहला,आपकी नीतियां ऐसी हो कि किसी भी शेयर होल्डर को घाटा नही उठाना पड़े।
(७)..दूसरा नियम यह है कि आपको पहलेवाला नियम हमेशा याद रखना है।
(८)..वारेन पार्टी व भीड़भाड़ से दूर रहना पसदं करते है,इसलिए वे यदि जल्दी घर पहुचते है तो अपना समय टी, वी, देखने और पॉपकार्न बनाकर घर मे बिताना ज्यादा पंसद करते है।
(९)..माइक्रोसॉफ्ट जैसी अनुपम भेंट पूरे विश्व को देनेवाले विश्व के धनी लोगो मे से एक बिल गेट्स जब पहली बार वारेन बफे से मिलने के लिए जाने वाले थे,तब उन्होंने इसके लिए सिर्फ आधा घण्टे का समय काफी समझा। लेकिन जब गेट्स बफे से मिले तो उनकी आधे घण्टे की भेंट 10 घण्टे में मुश्किल से पूरी हो पाई और वह भी इसलिए पूरी हो पाई,क्योकि वारेन बफे खुद ही उठकर चले गए थे। इसके बाद से बिल गेट्स ने वारेन बफे को अपना "गुरु" बना लिया
(१०)..आपको जानकर आश्चर्य होगा,लेकिन यह सत्य है कि उनके पास न तो सेलफोन है और न ही उनकी डेस्क पर कंप्यूटर है।
(११)..वारेन बफे विश्व के सबसे अमीर और सफलतम निवेशक अपने निवेश द्वारा मिले रिटर्न की बदौलत है।
(१२)..शुरुवात में उन्होंने अपने गुरु बेंजामिन ग्राहम के वैल्यू इंवेशटिंग स्टाइल को अपनाया; लेकिन कुछ सालों के बाद वारेन ने खुद अपनी एक स्टाइल विकसित कर ली।
(१३)..जब भी अवसर उत्पन्न होते है, उनका इस्तेमाल कैसे किया जाए, उस पर वारेन की नजर रहती है। उनका मानना है कि हर व्यक्ति को अवसर मिलते है, लेकिन उन्हें पहचानने की टाइमिंग पर आपका सफल होना निर्भर होता है।
(१४)..वारेन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि दशकों बीत जाने के बाद भी शेयर बाजार में उनका प्रदर्शन सर्वोत्तम रहा और अपना लक्ष्य पाने के लिए उन्होंने कभी भी जोखिम भी नही लिया।
(१५)..निवेश के लिए उनकी अप्रोच लम्बी अवधि (लांग टर्म) के लिए रही। शेयर को खरीदना और उसे सही समय पर दूसरे निवेशक को बेंच देना जैसी नही रही। वे हमेशा अच्छे शेयर में बने रहने में विश्वास करते है और कंपाउंडिंग की पावर का उपयोग करते है।
(१६)..वारेन ने निवेश की प्रक्रिया को बिल्कुल आसान तथा आम आदमी की समझ मे आने लायक बनाया। धैर्य,अनुशासन और अपनी तरक्की के बूते वारेन बफे ने शेयर बाजार के मायने आम आदमी के लिए पूरी तरह बदल दिए। आम आदमी को शेयर बाजार एक ऐसा स्थल लगने लगा, जो सिर्फ सट्टेबाजी या जुआखोरी द्वारा पैसा कमाने का जरिया नही, बल्कि बुद्धि,अनुशासन,धैर्य और तर्क शक्ति के बूते पैसे कमाने का एक जरिया लगने लगा। वारेन बफे निवेशको को सलाह देते है कि ऐसी कंपनी या सेक्टर में निवेश मत करो जिसे आप समझ ही न पाओ ( बफे की यह बात इंटरनेट बूम के दौरान सही साबित हुई, क्योकि उस समय लोग इन शेयरो की ओर अंधी दौड़ लगा रहे थे,वही वारेन बफे ने अपना रास्ता चुना)।
(१७).'.सालाना वार्षिक सम्मेलन' में जब हजारो लोग इकट्ठे होते है,तब वारेन निवेशको को निवेश के सफल सूत्र बताते है।
(१८)..उनका मानना है कि कोई भी निवेश आँख मूँदकर नही करो,बल्कि निवेश का निर्णय पूरी तरह केंद्रित होकर और सोच-समझकर किया जाना चाहिए।
(१९)..वारेन का मानना है कि जब लोगो की भीड़ किसी सेक्टर या शेयर पर टूट पड़े तो आप वहाँ से हट जाए और जब लोगो की रुचि उसमे नही रहे,तब आप उसमे रुचि लेने लगे।
(२०)..निवेश से पहले पूरी खोजबीन,प्रबंधन के बारे में जानकारी तथा प्रबंधन द्वारा संस्थागत कर्मचारियों से निपटने में सक्षमता को जांचकर कंपनी में निवेश का निर्णय ले
(२१).. वारेन बफे का मानना है कि शेयर या बांड आयसी कंपनी का होना चाहिए, जो अपने उद्दोग या सेवा में नम्बर वन हो और मुनाफा कमा रही हो। लेकिन सबसे जरूरी है, लम्बी अवधि के लिए निवेश,जो कि उनके अनुसार 10-15 साल का होता है।
(२२).. वारेन कहते है कि खूब पढ़े, जमकर पढ़े। वारेन बफे खुद अपना 60 % समय पढ़ने में गुजरते है। शेयर बाजार,निवेश,अर्थव्यवस्था और राजनीति---- सब कुछ पढ़े और उनका विश्लेषण करें।
युवा पीढ़ी को बफे की दी गई टिप्स
(१)*..क्रेडिट कार्ड से दूर रहे और खुद पर इन्वेस्ट कर। याद रखे कि पैसा आदमी को नही बल्कि आदमी पैसे को बनाते है।
(२)*.. आप जैसे है। वैसा ही जीवन जिए। दिखावे से अपने को दूर रखे।
(३)*.. दूसरे कह रहे है,इसलिए कोई काम न करे। सुने दूसरे की, लेकिन करे वही,जो आपके मन को अच्छा लगे।
(४)*..ब्रांड नाम के पीछे भागने की बजाय वही पहने,जिसमे आप आरामदायक महसूस कर सके।
(५)*.. यह आपकी जिंदगी है,इसलिए दुसरो को अपनी जिंदगी पर शासन करने का मौका न दे।
मंदी में भी आजमाए वारेन बफे का फॉर्मूला
वारेन बफे और उनके गुरु बेंजामिन ग्राहम को "वैल्यू निवेशक" मन जाता है। इनका मानना है कि मंडी के दौर में इक्विटी में पैसा लगते वक्त यह देखा जाए कि कंपनी के पास नगदी कितनी है;क्योकि ऐसी कंपनियाँ लम्बे समय मे अच्छा मुनाफा देती हो। कई जानकारी ने भी इस बात पर जोर दिया है कि मंदी के दौर या अनिश्चित कारोबारी माहौल में यह कॉफी कारगर साबित होता है।
बफे मानते है कि बैलेंस शीट से लोन अलग करने के बाद जो नकदी बचती है,उसमे बदलाव नही आता है।
उदा://
के लिए, मान लीजिए कि किसी कंपनी का शेयर मूल्य 1,000 रुपये है और बैलेंस शीट में प्रति शेयर 600 रुपये की नकदी है। ऐसे में बैलेंस शीट की नकदिवाली रणनीति के हिसाब से शेयर की कीमत कम-से-कम 600 रुपये होनी चाहिए। जानकारी का मानना है कि जिस कंपनी के पास जितनी ज्यादा नकदी होगी,उसे कई कामो को करने की उतनी ही ज्यादा आजादी होगी--जैसे शेयरो के बायबैक पुनक्रय और कंपनीयो की खरीदारी आदि।
यदि हम गौर करे तो शेयरो के बायबैक से हमे शेयरो की "बॉटम वैल्यू" आसानी से पता चल जाती है।
बैलेंस शीट में नकदी की स्थिति जानने का सबसे अच्छा अनुपात "कैश-टू-मार्केट कैपिटलाइजेशन" है। जिस कंपनी का कैश-टू-मार्केट कैपिटलाइजेशन अनुपात जितना ज्यादा होता है,उसका शेयर उतना ही सस्ता होता है।

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