Company to liability to our assets managments
निवेश करने से पहले जरूरी है यह जानना
Hello friends I am prem gender this blog risk of company profile and profit assetsknolagde ect
जोखिम उठाने की क्षमता
( Risk profile )
सबसे पहले अपना रिक्स प्रोफाइल तय कर ले। अर्थात यह जान ले कि आप निवेश के मामले में कितना जोखिम उठा सकते है। आपका निवेश आपके रिक्स प्रोफाइल के अनुसार ही होना चाहिए। रिस्क प्रोफाइल आपकी उम्र,निजी जिम्मेदारियों,सरप्लस आमदनी या बचत और आर्थिक व पारिवारिक हालात पर निर्भर करता है। 25 वर्ष की उम्र का एक नोकरीपेशा व्यक्ति 53 वर्ष के किसी नोकरीपेशा आदमी की तुलना में कही ज्यादा जोखिम उठा सकता है। शेयर बाजार में निवेश का फॉर्मूला यही है--"ज्यादा जोखिम,ज्यादा मुनाफा'"। दूसरी ओर,यदि आप मे ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता नही है तो आप बॉन्ड फिक्स्ड डिपॉजिट,पी,पी,एफ, पोस्ट ऑफिस सेविंग स्किम आदि ने निवेश करें।
बाजार में देर कभी नही
जो लोग ऐसा सोचते है कि बाजार में निवेश करने में उन्हें कॉफ़ी देरी हो गई है तो यह सही नही है। यह ठीक है कि 23 से 30 वर्ष की उम्र में चूंकि आपके ऊपर ज्यादा जिम्मेदारियां नही होती है,अतः आप अपनी कमाई
का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में लम्बी अवधि के लिए लगा सकते है; लेकिन यदि आपकी उम्र 50 वर्ष है तो भी आप अपने जोखिम को देखते हुए निवेश कर अच्छा लाभ पा सकते है।
रिसर्च जरूरी
शेयर बाजार में एंट्री लेने से पहले थोड़ा रिसर्च कर लेना जरूरी है। यह रिसर्च आपकी निजी स्थिति ( risk profile profit) और आप कैसे शेयर में निवेश करना चाहते है,इन पर निर्भर होनी चाहिए। चुकी अलग-अलग कंपनीयो की अपनी अलग-अलग खुबिया व खामियां होती है,इसलिए रिसर्च जरूरी है।इसके लिए कंपनीयो के तिमाही व वार्षिक नतीजे,कैश फ्लो ( नकदी प्रवाह),बाजार पूजी ( मार्केट कैप) पिछले साल के अंदर कंपनी की माली हालत,बाजार में उसका प्रदर्शन आदि बातो से जुड़ी जानकारी जुटाकर उनका अध्ययन कर लेना सही होगा।
बुरा झेलने के लिए तैयार रहिए
आपके द्वारा तमाम जानकारियां व होमवर्क कर लेने के बाद शेयर में पैसा लगाने के बाद भी। इस बात का दावा नही किया जा सकता कि आपका निष्कर्ष गलत साबित नही होगा। हाँ, यह सही है कि आपके द्वारा की गई स्टडी से आप "सेफ गेम" जरूर खेल सकते है।
हमेशा खुद फैसला ले
दुसरो लोगो से सलाह जरूर लीजिए,लेकिन उस सलाह पर फैसला आपका होना चाहिए। दर असल होता यह है कि जब एक बार शेयर बाजार में निवेश करना शुरू कर देते है तो दिलचस्पी लगातार बढ़ती जाती है। फिर यह दोस्तो के बीच चर्चा के विषयों में शुमार हो जाती है।ऐसी चर्चाओं से मिले किसी टिप्स पर सीधे अमल करने के बजाय आप अपनी स्टडी और अपने विवेक के आधार पर फैसला लें।
वैल्यू स्टॉक या ग्रोथ स्टॉक
निवेशको में दोनों तरह के स्टॉक लोकप्रिय है। वैल्यू स्टॉक में पैसा लगनेवाले तत्काल लाभ की चाह में निवेश करते है,जबकि ग्रोथ स्टॉक में निवेश करनेवाले तत्काल के बजाय भविष्य में अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद से पैसा लगाते है।लेकिन जोखिम को सन्तुलन करने के लिए बेहतर है कि आप दोनों तरह के स्टॉक में निवेश करें।
निवेश क्यों?
आप शेयर बाजार में निवेसकरने से पहले स्वयं से यह सवाल पूछिए की आप निवेश क्यो करना चाहते है? अपनी आय बढ़ाने के लिए,अतिरिक्त पैसे को ठिकाने लगाने के लिए? जल्द सेवा निवृत्ति पाने के उद्देश्य से या फिर सेवा निवृत्ति के बाद अच्छी आर्थिक स्थिति सुनिशिचत करने के उद्देश्य से आप निवेश करना चाहते है? आदि आपने एक बार जान लिया कि आप किस उद्देश्य से निवेश करना चाहते है,तो आप निवेश का सही विकल्प तय कर सकेंगे।
बचत और निवेश
आय में से सारे खर्च निकालकर जो धन शेष रहता है, वह "बचत" है। इस बचत को अच्छे रिटर्न के उद्देश्य से प्रयोग में लाना "निवेश" कहलाता है। दरअसल आय और बचत का अनुपात यह बताता है कि आपको शेयर बाजार में कितना निवेश करना चाहिए।
पहले एक उदाहरण पर गौर करें--
एक व्यक्ति की मासिक आमदनी 17,000 रुपये प्रतिमाह है। अपने तथा परिवार के खर्चे निकालकर वह प्रतिमाह 3,000 रुपए तक कि बचत का लक्ष्य रखता है।इस प्रकार वह एक वर्ष में 36,000 रुपए तक कि बचत कर सकता है।परंतु मुद्रास्फीति के चलते यदि खुदरा वस्तुओ पर मुद्रास्फीति की वार्षिक ओषत दर 12% मने तो उसकी प्रभावी बचत 31,680 रुपये ही रह जायेगी, बशर्ते वह अपनी बचत को कही पर भी निवेश नही करता। अब यदि वह निवेश के परंपरागत तरीको को अपनाकर बैंक,पोस्ट ऑफिस या पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड में निवेश करता है तो अधिकतम 8,5 % तक ब्याज मिलेगा। तब भी उसकी प्रभावी बचत अपने मूल आकर से कम होगी; क्योकि मुद्रास्फीति की औसत दर ( बाजार के अनुभव से ) हर हाल में वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जानेवाले ब्याज से अधिक होगी।
ऐसे में यदि यह व्यक्ति पूजी बाजार के सुरक्षितः रास्तो से निवेश करता है, जैसे "एस, आई,पी," के जरिए म्यूच्यूअल फंड इत्यादि में तो उसे 10 से 20% तक रिटर्न मिलना संभव है,जो मुद्रास्फीति को पछाड़ सकता है।इसलिए व्यक्ति द्वारा की गई बचत या अतिरिक्त धन को पूंजी बाजार में इस प्रकार उपयोग करना, जिससे मुद्रास्फीति की दर को परास्त करनेवाला रिटर्न मिल सके,वह ही "निवेश" कहलाता है तथा यही इसका महत्व है।
निवेश करने से पहले जरूरी है यह जानना
Hello friends I am prem gender this blog risk of company profile and profit assetsknolagde ect
जोखिम उठाने की क्षमता
( Risk profile )
सबसे पहले अपना रिक्स प्रोफाइल तय कर ले। अर्थात यह जान ले कि आप निवेश के मामले में कितना जोखिम उठा सकते है। आपका निवेश आपके रिक्स प्रोफाइल के अनुसार ही होना चाहिए। रिस्क प्रोफाइल आपकी उम्र,निजी जिम्मेदारियों,सरप्लस आमदनी या बचत और आर्थिक व पारिवारिक हालात पर निर्भर करता है। 25 वर्ष की उम्र का एक नोकरीपेशा व्यक्ति 53 वर्ष के किसी नोकरीपेशा आदमी की तुलना में कही ज्यादा जोखिम उठा सकता है। शेयर बाजार में निवेश का फॉर्मूला यही है--"ज्यादा जोखिम,ज्यादा मुनाफा'"। दूसरी ओर,यदि आप मे ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता नही है तो आप बॉन्ड फिक्स्ड डिपॉजिट,पी,पी,एफ, पोस्ट ऑफिस सेविंग स्किम आदि ने निवेश करें।
बाजार में देर कभी नही
जो लोग ऐसा सोचते है कि बाजार में निवेश करने में उन्हें कॉफ़ी देरी हो गई है तो यह सही नही है। यह ठीक है कि 23 से 30 वर्ष की उम्र में चूंकि आपके ऊपर ज्यादा जिम्मेदारियां नही होती है,अतः आप अपनी कमाई
का एक बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में लम्बी अवधि के लिए लगा सकते है; लेकिन यदि आपकी उम्र 50 वर्ष है तो भी आप अपने जोखिम को देखते हुए निवेश कर अच्छा लाभ पा सकते है।
रिसर्च जरूरी
शेयर बाजार में एंट्री लेने से पहले थोड़ा रिसर्च कर लेना जरूरी है। यह रिसर्च आपकी निजी स्थिति ( risk profile profit) और आप कैसे शेयर में निवेश करना चाहते है,इन पर निर्भर होनी चाहिए। चुकी अलग-अलग कंपनीयो की अपनी अलग-अलग खुबिया व खामियां होती है,इसलिए रिसर्च जरूरी है।इसके लिए कंपनीयो के तिमाही व वार्षिक नतीजे,कैश फ्लो ( नकदी प्रवाह),बाजार पूजी ( मार्केट कैप) पिछले साल के अंदर कंपनी की माली हालत,बाजार में उसका प्रदर्शन आदि बातो से जुड़ी जानकारी जुटाकर उनका अध्ययन कर लेना सही होगा।
बुरा झेलने के लिए तैयार रहिए
आपके द्वारा तमाम जानकारियां व होमवर्क कर लेने के बाद शेयर में पैसा लगाने के बाद भी। इस बात का दावा नही किया जा सकता कि आपका निष्कर्ष गलत साबित नही होगा। हाँ, यह सही है कि आपके द्वारा की गई स्टडी से आप "सेफ गेम" जरूर खेल सकते है।
हमेशा खुद फैसला ले
दुसरो लोगो से सलाह जरूर लीजिए,लेकिन उस सलाह पर फैसला आपका होना चाहिए। दर असल होता यह है कि जब एक बार शेयर बाजार में निवेश करना शुरू कर देते है तो दिलचस्पी लगातार बढ़ती जाती है। फिर यह दोस्तो के बीच चर्चा के विषयों में शुमार हो जाती है।ऐसी चर्चाओं से मिले किसी टिप्स पर सीधे अमल करने के बजाय आप अपनी स्टडी और अपने विवेक के आधार पर फैसला लें।
वैल्यू स्टॉक या ग्रोथ स्टॉक
निवेशको में दोनों तरह के स्टॉक लोकप्रिय है। वैल्यू स्टॉक में पैसा लगनेवाले तत्काल लाभ की चाह में निवेश करते है,जबकि ग्रोथ स्टॉक में निवेश करनेवाले तत्काल के बजाय भविष्य में अच्छा लाभ मिलने की उम्मीद से पैसा लगाते है।लेकिन जोखिम को सन्तुलन करने के लिए बेहतर है कि आप दोनों तरह के स्टॉक में निवेश करें।
निवेश क्यों?
आप शेयर बाजार में निवेसकरने से पहले स्वयं से यह सवाल पूछिए की आप निवेश क्यो करना चाहते है? अपनी आय बढ़ाने के लिए,अतिरिक्त पैसे को ठिकाने लगाने के लिए? जल्द सेवा निवृत्ति पाने के उद्देश्य से या फिर सेवा निवृत्ति के बाद अच्छी आर्थिक स्थिति सुनिशिचत करने के उद्देश्य से आप निवेश करना चाहते है? आदि आपने एक बार जान लिया कि आप किस उद्देश्य से निवेश करना चाहते है,तो आप निवेश का सही विकल्प तय कर सकेंगे।
बचत और निवेश
आय में से सारे खर्च निकालकर जो धन शेष रहता है, वह "बचत" है। इस बचत को अच्छे रिटर्न के उद्देश्य से प्रयोग में लाना "निवेश" कहलाता है। दरअसल आय और बचत का अनुपात यह बताता है कि आपको शेयर बाजार में कितना निवेश करना चाहिए।
पहले एक उदाहरण पर गौर करें--
एक व्यक्ति की मासिक आमदनी 17,000 रुपये प्रतिमाह है। अपने तथा परिवार के खर्चे निकालकर वह प्रतिमाह 3,000 रुपए तक कि बचत का लक्ष्य रखता है।इस प्रकार वह एक वर्ष में 36,000 रुपए तक कि बचत कर सकता है।परंतु मुद्रास्फीति के चलते यदि खुदरा वस्तुओ पर मुद्रास्फीति की वार्षिक ओषत दर 12% मने तो उसकी प्रभावी बचत 31,680 रुपये ही रह जायेगी, बशर्ते वह अपनी बचत को कही पर भी निवेश नही करता। अब यदि वह निवेश के परंपरागत तरीको को अपनाकर बैंक,पोस्ट ऑफिस या पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड में निवेश करता है तो अधिकतम 8,5 % तक ब्याज मिलेगा। तब भी उसकी प्रभावी बचत अपने मूल आकर से कम होगी; क्योकि मुद्रास्फीति की औसत दर ( बाजार के अनुभव से ) हर हाल में वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जानेवाले ब्याज से अधिक होगी।
ऐसे में यदि यह व्यक्ति पूजी बाजार के सुरक्षितः रास्तो से निवेश करता है, जैसे "एस, आई,पी," के जरिए म्यूच्यूअल फंड इत्यादि में तो उसे 10 से 20% तक रिटर्न मिलना संभव है,जो मुद्रास्फीति को पछाड़ सकता है।इसलिए व्यक्ति द्वारा की गई बचत या अतिरिक्त धन को पूंजी बाजार में इस प्रकार उपयोग करना, जिससे मुद्रास्फीति की दर को परास्त करनेवाला रिटर्न मिल सके,वह ही "निवेश" कहलाता है तथा यही इसका महत्व है।
0 comments:
Post a Comment