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दीर्घकालीन निवेश
"लम्बी अवधि" वित्तीय शब्दकोश में सबसे बुरा शब्द है। यह हम में से ज्यादातर लोगों के व्यक्तिगत और स्वभाव के अनुरूप नही होता और लम्बी अवधि के सम्बंध में कोई स्पष्ट समझ भी नही है।और इससे भी अधिक चौकानेवाला पारम्परिक ज्ञान यह है कि आप जब तक "दीर्घकालीन" निवेश नही करते,आप एक "मूल्य- निवेशक"नही हो सकते। मूल्य-निवेशक बनना 12वी कक्षा में जाने के समान है और आप 11वी कक्षा यानी लम्बी अवधि पड़े बिना 12वी में जा ही नही सकते।
हमारे जीवन के संबन्ध में "दीर्घकालीन"जैसी कोई चीज नही है। यह बहुत तेज गतिवाला है,तत्काल घटने वाला है और दीर्घकाल के बारे में हमारी समझ बहुत कम है।फिर भी "मूल्य-निवेश" लम्बी अवधि उस समय से बनी हुई है,जब लोगो के पास पर्याप्त समय होता था और प्रतिक्रिया दिखाने के लिए कोई त्वरित जानकारी नही थी। इसके इलावा,100 वर्ष पूर्व,कंपनियों में अंदर व बाहर एक ही बात थी। कंपनियों के प्रवर्तक आज एक व्यापार से दूसरे व्यापार में ,एक प्रस्ताव से दूसरे प्रस्ताव में हाथ डाल रहे है। यदि हम प्रवर्तकों के व्यवहार को समझे बिना "खरीदे और होल्ड करे" के माध्यम से शेयर खरीदते है तो शेयरों के "अचार"बन जाने की संभावना अधिक है।
वर्तमान सन्दर्भ में, "मूल्य-निवेश" का शेयर को "होल्ड"रखने की अवधि के साथ कोई सम्बन्ध नही है लेकिन इसका सम्बन्ध इस बात से अधिक है कि हम शेयर कैसे खरीदते है ( जब उनकी कीमत कम होती है ) और कब बेचते है ( जब कीमत अधिक होती है )--उन्हें खरीदने और बेचने के बीच के समय का ध्यान किए बिना।
यहां हमे कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है;
--उत्साह,हमारे जीवन की सफलता और महत्वाकांक्षा के लिए बहुत अच्छे है लेकिन मूल्य निवेश के लिए ये बहुत घातक है।
---ऐतिहासिक मानदण्डों, जैसे वित्तीय परिणामो,मूल्य अनुपात तथा ऐसी अन्य चीजों के आधार पर निवेश करना,मूल्य निवेश नही कहलाता। यह "रिवर-व्यू मिरर में देखकर गाड़ी चलाने जैसा है
--रिवर व्यू मिरर में देखकर गाड़ी चलाना,दुर्घटना का सबसे आसान रास्ता है।
--अपनी आवेगों पर नियंत्रण, "मूल्य-निवेश" की आधारशिला है।आपको लड़ाई से पूर्व समुराई की स्जिर्त और ध्यान-चिंतन में एक साधु की शांति की आवश्यकता है।

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