महानतम निवेशक बनना है तो इसे जरूर फॉलो करें
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में निवेशक को महानतम निवेशक बनाने का महत्वपूर्ण टिप और रूल का पूरी जानकारी दिया गया जिसे आप अपने इन्वेस्ट को काफी हद तक बड़ा सकते है धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो
30 days for invester bigginer tip
22th= three chapter
शेयर कब खरीदे और कब बेचे?
शेयरों का चयन कैसे करे
बाजार केमिजाज और दिशा के आधार पर,शेयरों को चुनने में होने वाली कठिनाई भिन्न-भिन्न हो सकती है। एक बुल-मार्किट में,अधिकांश शेयर ऊपर उठ जाते है। इस दौरान आप तेजी से बढ़ने वाले शेयरों को चुने या एक सेक्टर में निवेशको की दिलचस्पी के कारण ऊपर उठने वाले शेयरों को चुने। बुल मार्किट में जो शेयर आगे नही बढ़ रहे,उन्हें कदापि न चुने। यदि कोई शेयर, बुल मार्किट में भी कोई गतिविधि नही दिखता,तो इसका अर्थ है कि उस कंपनी या प्रबन्धन के साथ कुछ न कुछ गड़बड़ है या बाजार ऐसा कुछ जनता है जो आप नही जानते। बुल मार्किट में कम पी,ई या ऊंची बुक वैल्यू वाले शेयरों को खरीदने की कोशिश न करे। यदि इस उठती हुई लहर को कोइ सहारा नही मिलता तो उसमें गिरावट आ सकती है जिसका आपको पता
नहीं होता।
हमारी सामान्य प्रवृत्ति होती है कि उन शेयरों को चुने जो "सस्ते" हो जाने के बाद फिर आगे नही बडे। "सस्ता" शेयर और सस्ता हो सकता है या किसी भी मूल्य पर उपलब्ध होने पर भी,उतनी तेजी से नही भागता जितने की दूसरे शेयर। बुल मार्किट उसी दिशा में बढ़ती है।जिस ओर पैसे का प्रवाह अधिक होता है और यह आमतौर पर एक जैसे शेयरों या एक जैसे ही सेक्टर में बढ़ता है। निवेशक एक जैसे ही शेयरों में और एक ही समय पर प्रवेश करना पसंद करते है ताकि बाजार में "सुनामी"लाकर मोटा मुनाफा कमाया जा सके।
मन्दी बाजार में शेयरों को चुनना इस बात पर निर्भर होता है कि बाजार में गिरावट का कारण क्या है और यह कारण कितना गम्भीर है तथा उसका प्रभाव कितना गहरा होता है। मन्दी-बाजार या बाजार में गिरावट निवेशकों द्वारा नकदी की आवश्यकता होने, बुल-मार्किट का अंत होने, अर्थव्यवस्था में समस्याएं होने या निवेशको में अफरातफरी मचने के कारण पैदा हो सकती है। यदि यह गिरावट निवेशको में अफरातफरी से या नकदी की अचानक जरूरत पड़ने के कारण होती है तो कई शेयर अपनी सामान्य कीमत से भी नीचे गिर जाते है। यही समय, जब आपको मूल्य-निवेशक बनना चाहिए। वे शेयर खरीद ले,जिनका व्यापार पहले की तरह अच्छा हो चुका हैं लेकिन निवेशक इसकी परवाह नही करते और नकदी के लिए अपने शेयर बेच डालते है। हालांकि यदि गिरावट अर्थव्यवस्था की कमजोरी स्थितियों के कारण है या शेयरों के अधि-मूल्यांकन के कारण है या बहुत ज्यादा कंपनियों के सूचीबद्ध होने के कारण है तो ऐसा बाजार की भरपाई से पहले,थोड़ी देर के लिए हो सकता है। ऐसे बाजार में आप कुछ न करे। जब शेयर "सस्ते" दिखाई दे रहे हो तो सम्भव है कि वे अपनी कीमत को, बाजार वृद्धि या लाभार्जन के साथ सांमजस्य बिठाने की कोशिश कर रहे हो।
सभी गिरावटे एक समान नही होती-कुछ " कीमत" पैदा करने के लिए भी होती है। पैसे की कमी या ऋण पर पाबंदी के बावजूद भी आप अपने शेयर में कीमत पा सकते है। यह डॉट-कॉम बुलबुले या एशिया के आर्थिक संकट या ब्रिटेन में रेल रोड संकट या टयूनिंग बुलबुले से भिन्न है। अन्य सभी परिसम्पत्ति-वर्ग के बुलबुले है। नकदी की जरूरत तब होती है जब निवेशको का अर्थव्यवस्था में या शेयर बाजारों में विश्वास कम हो जाए और ऋणों की पाबंदी वास्तविक अर्थव्यवस्था में ऐसा असर डाले, जैसा एक परिसम्पत्ति-वर्ग बुलबुला नही डाल सकता। हालांकि इस तरह के दौर में "नकदी" जल्दी ही वापिस लौट आती है।
इस तरह के बाजारों में शेयरों के नीचे गिरने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। नकदी संस्थाओ और निवेशको को पोर्टफोलियो में रखे शेयरों को बेचने पर मजबूत कर देती है।पैसे की जरूरत को छोड़कर यह बात तर्कसंगत लगती है और इस तरह की बिक्री अविश्वसनीय अवसर पैदा करती है,जैसे कि यह अभी कर रही है।हालांकि,यह महत्वपूर्ण है कि पोर्टफोलियो को 10-15 शेयरों तक ही सीमित रखा जाए,वरना विविधीकरण रिटर्न को सूचकांक के करीब ले जाएगा।
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में निवेशक को महानतम निवेशक बनाने का महत्वपूर्ण टिप और रूल का पूरी जानकारी दिया गया जिसे आप अपने इन्वेस्ट को काफी हद तक बड़ा सकते है धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो
30 days for invester bigginer tip
22th= three chapter
शेयर कब खरीदे और कब बेचे?
शेयरों का चयन कैसे करे
बाजार केमिजाज और दिशा के आधार पर,शेयरों को चुनने में होने वाली कठिनाई भिन्न-भिन्न हो सकती है। एक बुल-मार्किट में,अधिकांश शेयर ऊपर उठ जाते है। इस दौरान आप तेजी से बढ़ने वाले शेयरों को चुने या एक सेक्टर में निवेशको की दिलचस्पी के कारण ऊपर उठने वाले शेयरों को चुने। बुल मार्किट में जो शेयर आगे नही बढ़ रहे,उन्हें कदापि न चुने। यदि कोई शेयर, बुल मार्किट में भी कोई गतिविधि नही दिखता,तो इसका अर्थ है कि उस कंपनी या प्रबन्धन के साथ कुछ न कुछ गड़बड़ है या बाजार ऐसा कुछ जनता है जो आप नही जानते। बुल मार्किट में कम पी,ई या ऊंची बुक वैल्यू वाले शेयरों को खरीदने की कोशिश न करे। यदि इस उठती हुई लहर को कोइ सहारा नही मिलता तो उसमें गिरावट आ सकती है जिसका आपको पता
नहीं होता।
हमारी सामान्य प्रवृत्ति होती है कि उन शेयरों को चुने जो "सस्ते" हो जाने के बाद फिर आगे नही बडे। "सस्ता" शेयर और सस्ता हो सकता है या किसी भी मूल्य पर उपलब्ध होने पर भी,उतनी तेजी से नही भागता जितने की दूसरे शेयर। बुल मार्किट उसी दिशा में बढ़ती है।जिस ओर पैसे का प्रवाह अधिक होता है और यह आमतौर पर एक जैसे शेयरों या एक जैसे ही सेक्टर में बढ़ता है। निवेशक एक जैसे ही शेयरों में और एक ही समय पर प्रवेश करना पसंद करते है ताकि बाजार में "सुनामी"लाकर मोटा मुनाफा कमाया जा सके।
मन्दी बाजार में शेयरों को चुनना इस बात पर निर्भर होता है कि बाजार में गिरावट का कारण क्या है और यह कारण कितना गम्भीर है तथा उसका प्रभाव कितना गहरा होता है। मन्दी-बाजार या बाजार में गिरावट निवेशकों द्वारा नकदी की आवश्यकता होने, बुल-मार्किट का अंत होने, अर्थव्यवस्था में समस्याएं होने या निवेशको में अफरातफरी मचने के कारण पैदा हो सकती है। यदि यह गिरावट निवेशको में अफरातफरी से या नकदी की अचानक जरूरत पड़ने के कारण होती है तो कई शेयर अपनी सामान्य कीमत से भी नीचे गिर जाते है। यही समय, जब आपको मूल्य-निवेशक बनना चाहिए। वे शेयर खरीद ले,जिनका व्यापार पहले की तरह अच्छा हो चुका हैं लेकिन निवेशक इसकी परवाह नही करते और नकदी के लिए अपने शेयर बेच डालते है। हालांकि यदि गिरावट अर्थव्यवस्था की कमजोरी स्थितियों के कारण है या शेयरों के अधि-मूल्यांकन के कारण है या बहुत ज्यादा कंपनियों के सूचीबद्ध होने के कारण है तो ऐसा बाजार की भरपाई से पहले,थोड़ी देर के लिए हो सकता है। ऐसे बाजार में आप कुछ न करे। जब शेयर "सस्ते" दिखाई दे रहे हो तो सम्भव है कि वे अपनी कीमत को, बाजार वृद्धि या लाभार्जन के साथ सांमजस्य बिठाने की कोशिश कर रहे हो।
सभी गिरावटे एक समान नही होती-कुछ " कीमत" पैदा करने के लिए भी होती है। पैसे की कमी या ऋण पर पाबंदी के बावजूद भी आप अपने शेयर में कीमत पा सकते है। यह डॉट-कॉम बुलबुले या एशिया के आर्थिक संकट या ब्रिटेन में रेल रोड संकट या टयूनिंग बुलबुले से भिन्न है। अन्य सभी परिसम्पत्ति-वर्ग के बुलबुले है। नकदी की जरूरत तब होती है जब निवेशको का अर्थव्यवस्था में या शेयर बाजारों में विश्वास कम हो जाए और ऋणों की पाबंदी वास्तविक अर्थव्यवस्था में ऐसा असर डाले, जैसा एक परिसम्पत्ति-वर्ग बुलबुला नही डाल सकता। हालांकि इस तरह के दौर में "नकदी" जल्दी ही वापिस लौट आती है।
इस तरह के बाजारों में शेयरों के नीचे गिरने की संभावना बहुत ज्यादा होती है। नकदी संस्थाओ और निवेशको को पोर्टफोलियो में रखे शेयरों को बेचने पर मजबूत कर देती है।पैसे की जरूरत को छोड़कर यह बात तर्कसंगत लगती है और इस तरह की बिक्री अविश्वसनीय अवसर पैदा करती है,जैसे कि यह अभी कर रही है।हालांकि,यह महत्वपूर्ण है कि पोर्टफोलियो को 10-15 शेयरों तक ही सीमित रखा जाए,वरना विविधीकरण रिटर्न को सूचकांक के करीब ले जाएगा।

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