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मंदी वाला बाजार ( बियर मार्किट )
निवेशक मन्द बाजार में भेदभाव भूल जाते है। पैसे की उनकी जरूरत उन्हें हर तरह के शेयर बेचने को मजबूर कर देती है जिनमे "ब्लू चिप" शेयर भी शामिल होते है। यदि आप मंदी के बाजार में है, तो एक क्षण के लिए भूल जाइए की अब सिर्फ बेकार शेयरों की कीमतें ही कम होगी। हर चीज नीचे की ओर जाएगी। बिकवाली के प्रथम चरण में शेयर न खरीदे। मंदी के बाजार की शुरुआत में,शेयर बहुत तेजी से लुढ़कते है और वे अपनी कीमत से 30-50 प्रतिशत नीचे आ जाते है। यह रैली ऐसे कई निवेशको द्वारा बनाई जाती है, जो "सस्ते" शेयर को खरीदने की कोशिश में रहते है। ऐसी रैली बहुत कम समय के लिए होती है और उसके बाद वह रैली आती है,जिसमे शेयर की कीमतें कहि नही जाती,स्थिर हो जाती है।
मंदी के बाजार में शेयर खरीदने की जल्दबाजी न करे। कि मंदी के बाजार में 12--18 महीनों के दौरान शेयर 60 प्रतिशत, बल्कि 80 प्रतिशत तक गिर चुके होंगे। इस बिंदु पर आप तय करे कि क्या किसी सेक्टर या शेयर में सभी निवेशक दिलचस्पी खो चुके है या अभी भी वहां वापिस लौटने का अवसर है ?
आप अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों को चुने, जिनका प्रबंधन अच्छा है और वे इसीलिए नीचे गिरे है कि निवेशक अच्छे-बुरे में अंतर किए बिना उनही बेंच रहे है। वे शेयर स्थिर होकर,आपको 50 प्रतिशत ही नही,बल्कि हो सकता है 100 प्रतिशत की "रिटर्न" दे जाए।
मंदी के बाजार में धैर्य रखना सबसे महत्वपूर्ण चीज है । आप इसलिए न खरीदे क्योकि शेयर "सस्ते" है। शेयरों में "सस्ते"या "महंगे"जैसा कुछ नही होता । आप इस तरह विचार करे। जब फिल्मे अच्छी कमाई कर रही हो तो एक प्रसिद्ध अभिनेता की फीस करोड़ो की हो जाती है, और जब वही अभिनेता अपने स्तर से नीचे आ जाता है तो हो सकता है उसे एक भी फिल्म न मिले काम करने के लिए या उसे मुफ्त में काम करना पड़े।
गिरावट बहुत तेजी होती है और वृद्धि समय लेती है
यदि यह साधारण सा तथ्य आपके निवेश में शामिल हो जाए तो आपको अप्रत्याशित लाभ हो सकता है मान लीजिए, की एक शेयर ऊपर उठता है और आप उस बड़ी रैली को गवां चुके है । निराश न हो। ज्यादातर मामलों ।में यह गिरेगा और यह गिरावट बहुत तेज होगी। इस गिरावट में शेयर बेच दे। यहां-तक कि दैनिक आधार पर भी आप बाजार के गिरने पर शेयर बेच सकते है,अपनी स्थिति हर रोज बन्द करे और अगले दिन एक नई शुरुवात करें।
यदि गिरावट बहुत तेज होती है तो इसका असर आप पर क्यो होना चाहिए? चार्ट को पढ़ने-जांचने के आपका मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि कम से कम जोखिम पर आप अधिकतम पैसा बना ले। यदि गिरावट बहुत तेज है ,और उससे जोखिम बहुत कम,यदि गिरावट बहुत तेजी से होने वाली है और वहां कोई जोखिम नही है कि यह लाभ की एक महत्वपूर्ण राशि देने तक रुक जाएगी तो आप मे व्यापार चलाने की समझ ही नही है।
आप शेयर बेच दी। आप जानते है कि शेयर नीचे गिर रहा है। ऐसे अवसर हर रोज नही आते। और आपको हर रोज कारोबार भी नही करना होता और जब ऐसा अवसर आए, तब आपको कारोबार जरूर करना चाहिए।
किसी भी रैली की शुरुवात में शेयर बहुत तेजी से नही चलते। वे शिखर पर जाने के लिए लम्बवत रूप से चलते है। ऊपर चढ़ते हुए बाजार में प्रवेश करने का सर्वोत्तम समय है,जब मात्रा बहुत ज्यादा हो और शेयर फिर एक सप्ताह या एक महीने में "महत्वपूर्ण" रूप से बढ़ चुका हो। यह "महत्वपूर्ण" एक व्यक्तिपरक बात है लेकिन मैं कहूंगा कि एक महीने में 20-25 प्रतिशत की वृद्धि "महत्वपूर्ण" है। गिरावट में ठीक इसका उलट होता है। एक "संचयन"के बाद होने वाली गिरावट की शुरुवात एक चट्टान गिरने की तरह है यह लगभग सीधी खड़ी है। जब विक्रेताओं में शेयर बेचने के लिए मारा-मारी मची हो तो खरीदार ऊंचे मूल्यों पर शेयर खरीदने की जरूरत महसूस नही करते। यह भी कीमते बहुत तेजी से गिरने का एक कारण बनता है। जैसे ही कोई शेयर अपने शीर्ष से एक महत्वपूर्ण गिरावट दिखाता है,खरीदार शेयर खरीदना आरम्भ कर देते है। शेयर की कीमतें बिल्कुल सपाट होना आरम्भ कर देती है, क्योकि कीमते बिल्कुल जमीन पर पहुच जाती है और पर्याप्त खरीदार शेयर खरीदने के लिए मौजूद हो जाते है। शेयर के नीचे या ऊपर जाने से,बाजार की अति-प्रतिक्रिया लाजमी है,हालांकि शेयरों के गिरने पर होने वाली प्रतिक्रिया कीमते बढ़ने की अपेक्षा अधिक होती है।
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