Success tips
30 days for bigginer investor golden succsess tips
12th=days://
शेयर आगे क्यो नही बढ़ते?
शेयर अपनी जगह से हिलते नही क्योकि किसी की दिलचस्पी उन शेयरों में नही है। अच्छा लाभ मिल जाना एक बढ़िया काम हो सकता है। यदि बाजार किसी सेक्टर या शेयर में दिलचस्पी नही लेता, तो वे शेयर हिलेंगे नही। यही कारण है कि "मात्रा"(...और उसमें बिल्कुल भी ट्रेडिंग न हुई हो ),वाले शेयरों को खरीदने में बहुत जोखिम हो सकता है। कारोबार में शेयर की "मात्रा" से शेयरों में दिलचस्पी जाहिर होती है। "मात्रा"जितनी अधिक होगी,उतनी ही तेजी से ट्रेडिंग में "मात्रा" में बढ़ोतरी होगी ऒर इसके अवसर भी बढ़ेंगे की शेयर में अधिक से अधिक लोग दिलचस्पी ले।
जिन शेयरों में "मात्रा" नही होती, उनमे आसानी से हेरा-फेरी हो सकती है। यदि किसी शेयर में एक हजार शेयरों से कम का कारोबार होता है, तो कोई भी इसकी मात्रा को 5 या10 गुना बढ़ा सकता है और ऐसा प्रदर्शित कर सकता है कि शेयर की कीमते बहुत बढ़ रही है।
कभी-कभी, बाजार का ध्यान एक शेयर पर केंद्रित हो जाता है। और सारा पैसा उस ओर चल जाता है। यदि बाजार यह सोचता है कि बैकिंग शेयर अच्छा प्रदर्शन करेंगे, तो आप देखेंगे कि अधिकांश पैसा,बड़ी मात्रा के साथ बैंकिग शेयरों में चल जायेगा। तेज बाजार काफी कमजोर होगा। इससे आप जान सकते है कि इसका मूल्य या मूल्य निवेश से कोई लेना-देना नही है शेयरों के एक समूह में बाजार की दिलचस्पी होना और दूसरे शेयरों के समूह में दिलचस्पी का अभाव ही सब कुछ है।
13th=days://
कभी भी "औसत" न बनाएं
जब हमारा निवेश किया हुआ शेयर गिर जाता है,तो हम और शेयर खरीदने के इच्छुक हो जाते है।यदि आप निवेश कर रहे है तो मुझे विश्वास है कि आपने ऐसा ही किया होगा। "औषत" करना या हमारे निवेश करने के बाद,गिरते हुए शेयर को खरीदना,हमारे भीतर गहरी जड़े जमा चुके मनोवैज्ञानिक रोगा से होता है। हमे अपने गलत निर्णयों को स्वीकार करने में समय लगता है और हम अपने गलत निर्णयों के स्पष्टीकरण देने के प्रयास में काफी समय बरबाद कर देते है। एक गिरते हुए शेयर में और पैसा लगाना और यह तर्क देना की "शेयर सस्ता है" "यदि यह खरीदने से पहले सही शेयर था तो मैं इसके सस्ता होने पर और खरीदूंगा"। ये सब हमारे दो संपूर्ण तर्को का हिस्सा है।
कभी भी "औषत" न करे या गिरते हुए शेयरों को न खरीदे।
हमारे पैसा गंवाने के बाद, हम में से अधिकांश लोगों की यह प्रवृत्ति होती है कि हम और भी आक्रामक होकर और ज्यादा निवेश कर बैठते है और सोचते है कि इससे हमारे पहले के नुकसान की भरपाई भी हो जाएगी। बाजार ने हमे कुछ नही देना है। वे हमारे नुकसानों की भरपाई नही करेंगे। जब हमारे निवेश निर्णय, पिछले नुकसानो से ही दागदार है तो सम्भावना यही है कि वे तर्कसंगत नही होंगे तथा हमे और नुकसान उठाना पड़ेगा।
आप इसका ठीक उलटा कर रहे होंगे। जब आप अधिकतम लाभ उठा चुके है,जिसके लिए आप तैयार थे ( जो क्रय मूल्य का 10℅ से अधिक नही होना चाहिए ) तो आप उस शेयर से बाहर निकल आए। और अधिक शेयर खरीदने का कोई प्रश्न ही नही है। इस प्रलोभन से बचे।मैन कई निवेशको को देखा है जो "औषत" करके दिवालियापन के रास्ते पर चल पड़ते है लेकिन उसी शेयर को और ज्यादा खरीदना जारी रखते है, यह सोचते हुए की यह और सस्ता हो चुका है।
किसी भी शेयर के साथ या निवेश निर्णय के साथ भावनात्मक लगाव न रखे। यदि आपने गलती कर दी है तो उस गलती से बाहर निकल आए। यदि शेयर से या निवेश निर्णय से भावनात्मक रूप से जुड़ गए है तो आप अपने आपको, दूसरे को समझाने की कोशिश करते पाते है कि शेयर अच्छा है तो आपको इस स्थिति में अपनी जिद्द की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, जबकि बाजार में सभी आपसे निकल जाने के लिए कह रहे है।
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शेयर आगे क्यो नही बढ़ते?
शेयर अपनी जगह से हिलते नही क्योकि किसी की दिलचस्पी उन शेयरों में नही है। अच्छा लाभ मिल जाना एक बढ़िया काम हो सकता है। यदि बाजार किसी सेक्टर या शेयर में दिलचस्पी नही लेता, तो वे शेयर हिलेंगे नही। यही कारण है कि "मात्रा"(...और उसमें बिल्कुल भी ट्रेडिंग न हुई हो ),वाले शेयरों को खरीदने में बहुत जोखिम हो सकता है। कारोबार में शेयर की "मात्रा" से शेयरों में दिलचस्पी जाहिर होती है। "मात्रा"जितनी अधिक होगी,उतनी ही तेजी से ट्रेडिंग में "मात्रा" में बढ़ोतरी होगी ऒर इसके अवसर भी बढ़ेंगे की शेयर में अधिक से अधिक लोग दिलचस्पी ले।
जिन शेयरों में "मात्रा" नही होती, उनमे आसानी से हेरा-फेरी हो सकती है। यदि किसी शेयर में एक हजार शेयरों से कम का कारोबार होता है, तो कोई भी इसकी मात्रा को 5 या10 गुना बढ़ा सकता है और ऐसा प्रदर्शित कर सकता है कि शेयर की कीमते बहुत बढ़ रही है।
कभी-कभी, बाजार का ध्यान एक शेयर पर केंद्रित हो जाता है। और सारा पैसा उस ओर चल जाता है। यदि बाजार यह सोचता है कि बैकिंग शेयर अच्छा प्रदर्शन करेंगे, तो आप देखेंगे कि अधिकांश पैसा,बड़ी मात्रा के साथ बैंकिग शेयरों में चल जायेगा। तेज बाजार काफी कमजोर होगा। इससे आप जान सकते है कि इसका मूल्य या मूल्य निवेश से कोई लेना-देना नही है शेयरों के एक समूह में बाजार की दिलचस्पी होना और दूसरे शेयरों के समूह में दिलचस्पी का अभाव ही सब कुछ है।
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कभी भी "औसत" न बनाएं
जब हमारा निवेश किया हुआ शेयर गिर जाता है,तो हम और शेयर खरीदने के इच्छुक हो जाते है।यदि आप निवेश कर रहे है तो मुझे विश्वास है कि आपने ऐसा ही किया होगा। "औषत" करना या हमारे निवेश करने के बाद,गिरते हुए शेयर को खरीदना,हमारे भीतर गहरी जड़े जमा चुके मनोवैज्ञानिक रोगा से होता है। हमे अपने गलत निर्णयों को स्वीकार करने में समय लगता है और हम अपने गलत निर्णयों के स्पष्टीकरण देने के प्रयास में काफी समय बरबाद कर देते है। एक गिरते हुए शेयर में और पैसा लगाना और यह तर्क देना की "शेयर सस्ता है" "यदि यह खरीदने से पहले सही शेयर था तो मैं इसके सस्ता होने पर और खरीदूंगा"। ये सब हमारे दो संपूर्ण तर्को का हिस्सा है।
कभी भी "औषत" न करे या गिरते हुए शेयरों को न खरीदे।
हमारे पैसा गंवाने के बाद, हम में से अधिकांश लोगों की यह प्रवृत्ति होती है कि हम और भी आक्रामक होकर और ज्यादा निवेश कर बैठते है और सोचते है कि इससे हमारे पहले के नुकसान की भरपाई भी हो जाएगी। बाजार ने हमे कुछ नही देना है। वे हमारे नुकसानों की भरपाई नही करेंगे। जब हमारे निवेश निर्णय, पिछले नुकसानो से ही दागदार है तो सम्भावना यही है कि वे तर्कसंगत नही होंगे तथा हमे और नुकसान उठाना पड़ेगा।
आप इसका ठीक उलटा कर रहे होंगे। जब आप अधिकतम लाभ उठा चुके है,जिसके लिए आप तैयार थे ( जो क्रय मूल्य का 10℅ से अधिक नही होना चाहिए ) तो आप उस शेयर से बाहर निकल आए। और अधिक शेयर खरीदने का कोई प्रश्न ही नही है। इस प्रलोभन से बचे।मैन कई निवेशको को देखा है जो "औषत" करके दिवालियापन के रास्ते पर चल पड़ते है लेकिन उसी शेयर को और ज्यादा खरीदना जारी रखते है, यह सोचते हुए की यह और सस्ता हो चुका है।
किसी भी शेयर के साथ या निवेश निर्णय के साथ भावनात्मक लगाव न रखे। यदि आपने गलती कर दी है तो उस गलती से बाहर निकल आए। यदि शेयर से या निवेश निर्णय से भावनात्मक रूप से जुड़ गए है तो आप अपने आपको, दूसरे को समझाने की कोशिश करते पाते है कि शेयर अच्छा है तो आपको इस स्थिति में अपनी जिद्द की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, जबकि बाजार में सभी आपसे निकल जाने के लिए कह रहे है।
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