नमस्कार दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में शेयर मार्केट के विभिन्न क्षेत्रो के जानकारी आप सभी दोस्तों को अपने ब्लॉग के जरिये देता हूँ अतः आप सभी दोस्तों से निवेदन है इस ब्लॉग की जानकारी को अपने निवेश के लिए जरूर फॉलो करें धन्यवाद आप सभी दोस्तों का दिन शुभ हो मंगलमय हो
30 days success tips
23th=days
"त्रि-आयामी" दुनिया मे "द्वि-आयामी" सोच
अपने पूरे जीवनकाल में,एक पुस्तकालय में हम अधिकतम कितनी पुस्तके पढ़ सकते है? हममे से अधिकांश 500 या 1000 अथवा हो सकता है 2000 पुस्तके पढ़ सकते है ( लाखो पुस्तके के पुस्तकालय में ) एक आदमी,जिसने 2000 पुस्तके पढ़ी होगी,वह शायद पी,एच्,डी, होगा। वह एक बुद्धिजीवी की तरह लगता होगा। लेकिन इस मामले में भी, उसने जो कुछ पड़ा है,वह पुस्तकालय में मौजूद सामग्री के सामने कुछ भी नही है।
इसी तरह, निवेश के सम्बंध में भी सोचे। हमारे अधिकांश निवेश निर्णय दो-आयामी प्रारूप में होते है। हम पी,ई अनुपात; बुक-वैल्यू आदि को देखते है और सोचते है कि हमने वह सब प्राप्त कर लिया है, जो शेयर की कीमत को प्रभावित कर सकता है जब कोई शेयर इस तरह खरीदा जाता है तो हो सकता है वह उस दिशा में न जाएं, वहां आपने उम्मीद की है। आपने एक शेयर की सभी सम्भावनाओ के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही उन्हें खरीद होगा लेकिन शेयर ने आपकी आशाओ के अनुरूप प्रदर्शन नही किया।
एक शेयर की कीमत कई तथ्यों से प्रेरित होती है। उनमें से कुछेक ही गौर करने लायक है जैसे पी,ई अनुपात और बुक-वैल्यू। उनमे से अधिकांश गौर करने लायक नही होते जैसा कि बाजार के सम्बंध में लाखों निवेशक सोचते है या आंतरिक सूत्र जानते है, शेयर के सम्बंध में जैसे कारोबारी सोचते है। बाजार "मूल सिद्धांतों" के प्रति अल्प-प्रतिक्रिया और अति-प्रतिक्रिया दिखाते है।
बाजार विधानसभा नही है, जिसमे सकल घरेलू उत्पाद या मुद्रास्फीति या कंपनियों के वित्तीय परिणाम कच्चे माल के रूप में डाले जाते है और तर्कसंगत कीमतों तैयार माल के रूप में बाहर आ जाती है। यह तो यह कहने की तरह है कि स्टीव जॉब्स की लंबाई, भार दूसरी शारीरिक बनावट जान कर,हम पता लगा लेंगे की वह आईफोन,आईपैड जैसे अदभुद गैजेट्स का अविष्कार करने जा रहा था। लेकिन इस दुनिया मे स्टीव जॉब्स जैसी विशेषताओ वाले लाखों करोड़ों लोग है जो उनकी उपलब्धियो के आस-पास भी नही ठहरते।
हम सब मूल सिद्धांतों ( बुनियादी बातों ) के प्रति एक जैसी प्रतिक्रिया नही दिखाते और यदि हम ऐसा करते भी है तो हमारी प्रतिकिया की मात्रा या तीव्रता काफी भिन्न होगी। बाजार में लाखों लोग और संस्थान न केवल बुनियादी बातों के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त करते है बल्की उनकी प्रतिक्रिया का अंत और भी तीव्रता भी भिन्न होती है। यह एक रस्सी के समान है जिसे रस्सी कशी के खेल में,दोनों छोर से, लाखो लोगो द्वारा,अलग-अलग ताकत से दो भिन्न-भिन्न दिशाओ में खींचा जा रहा है। इसमें किसी एक पक्ष के जितने की संभावना तभी है यदि एक पक्ष की सामूहिक ताकत दूसरे पक्ष की सामूहिक ताकत से ज्यादा हो।
हमारे पास किसी शेयर को खरीदने के लिए बुनियादी बातों की कोई जांच-सूची नही है। हर निवेशक की अपनी व्याख्या होती है और बुनियादी बातों के अपने मापदण्ड। मूल सिद्धांतों कि यह व्यक्तिपरक व्याख्या,शेयरों की गतिविधि के सम्बंध में आपकी समझ मे एक व्यापक अंतराल छोड़ देती है।यही कारण है कि आपके पास ऐसे शेयर हो स्काई है जिन्होंने आपके सभी अनुसन्धानों और विश्लेषणों के बावजूद, कोई उपलब्धि नही दिखाई।
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"त्रि-आयामी" दुनिया मे "द्वि-आयामी" सोच
अपने पूरे जीवनकाल में,एक पुस्तकालय में हम अधिकतम कितनी पुस्तके पढ़ सकते है? हममे से अधिकांश 500 या 1000 अथवा हो सकता है 2000 पुस्तके पढ़ सकते है ( लाखो पुस्तके के पुस्तकालय में ) एक आदमी,जिसने 2000 पुस्तके पढ़ी होगी,वह शायद पी,एच्,डी, होगा। वह एक बुद्धिजीवी की तरह लगता होगा। लेकिन इस मामले में भी, उसने जो कुछ पड़ा है,वह पुस्तकालय में मौजूद सामग्री के सामने कुछ भी नही है।
इसी तरह, निवेश के सम्बंध में भी सोचे। हमारे अधिकांश निवेश निर्णय दो-आयामी प्रारूप में होते है। हम पी,ई अनुपात; बुक-वैल्यू आदि को देखते है और सोचते है कि हमने वह सब प्राप्त कर लिया है, जो शेयर की कीमत को प्रभावित कर सकता है जब कोई शेयर इस तरह खरीदा जाता है तो हो सकता है वह उस दिशा में न जाएं, वहां आपने उम्मीद की है। आपने एक शेयर की सभी सम्भावनाओ के बारे में पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही उन्हें खरीद होगा लेकिन शेयर ने आपकी आशाओ के अनुरूप प्रदर्शन नही किया।
एक शेयर की कीमत कई तथ्यों से प्रेरित होती है। उनमें से कुछेक ही गौर करने लायक है जैसे पी,ई अनुपात और बुक-वैल्यू। उनमे से अधिकांश गौर करने लायक नही होते जैसा कि बाजार के सम्बंध में लाखों निवेशक सोचते है या आंतरिक सूत्र जानते है, शेयर के सम्बंध में जैसे कारोबारी सोचते है। बाजार "मूल सिद्धांतों" के प्रति अल्प-प्रतिक्रिया और अति-प्रतिक्रिया दिखाते है।
बाजार विधानसभा नही है, जिसमे सकल घरेलू उत्पाद या मुद्रास्फीति या कंपनियों के वित्तीय परिणाम कच्चे माल के रूप में डाले जाते है और तर्कसंगत कीमतों तैयार माल के रूप में बाहर आ जाती है। यह तो यह कहने की तरह है कि स्टीव जॉब्स की लंबाई, भार दूसरी शारीरिक बनावट जान कर,हम पता लगा लेंगे की वह आईफोन,आईपैड जैसे अदभुद गैजेट्स का अविष्कार करने जा रहा था। लेकिन इस दुनिया मे स्टीव जॉब्स जैसी विशेषताओ वाले लाखों करोड़ों लोग है जो उनकी उपलब्धियो के आस-पास भी नही ठहरते।
हम सब मूल सिद्धांतों ( बुनियादी बातों ) के प्रति एक जैसी प्रतिक्रिया नही दिखाते और यदि हम ऐसा करते भी है तो हमारी प्रतिकिया की मात्रा या तीव्रता काफी भिन्न होगी। बाजार में लाखों लोग और संस्थान न केवल बुनियादी बातों के लिए प्रतिक्रिया व्यक्त करते है बल्की उनकी प्रतिक्रिया का अंत और भी तीव्रता भी भिन्न होती है। यह एक रस्सी के समान है जिसे रस्सी कशी के खेल में,दोनों छोर से, लाखो लोगो द्वारा,अलग-अलग ताकत से दो भिन्न-भिन्न दिशाओ में खींचा जा रहा है। इसमें किसी एक पक्ष के जितने की संभावना तभी है यदि एक पक्ष की सामूहिक ताकत दूसरे पक्ष की सामूहिक ताकत से ज्यादा हो।
हमारे पास किसी शेयर को खरीदने के लिए बुनियादी बातों की कोई जांच-सूची नही है। हर निवेशक की अपनी व्याख्या होती है और बुनियादी बातों के अपने मापदण्ड। मूल सिद्धांतों कि यह व्यक्तिपरक व्याख्या,शेयरों की गतिविधि के सम्बंध में आपकी समझ मे एक व्यापक अंतराल छोड़ देती है।यही कारण है कि आपके पास ऐसे शेयर हो स्काई है जिन्होंने आपके सभी अनुसन्धानों और विश्लेषणों के बावजूद, कोई उपलब्धि नही दिखाई।

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