म्यूच्यूअल फंड इंवेशटिंग
म्यूच्यूअल फण्ड
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे मैं आप इस ब्लॉगिंग में आप सभी दोस्तों का स्वागत करता हु मैं इस ब्लॉग में म्यूच्यूअल फंड के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दिया हु जिसे आप अपनाकर अपने म्युचल फंड के निवेश में काफी मदद करेगा धन्यवाद
( Mutual Fund )
म्यूच्यूअल फण्ड एक ट्रस्ट है। यह संस्था लोगो से पैसा जमा करके अलग अलग सिक्योरिटीज में उन पैसों का निवेश करती है। निवेश उस स्किम के उद्देश्य के तरह होता है। अगर दूसरे शब्दों में बताना हो तो म्यूच्यूअल याने सामान्य लोगो की पूंजी एकत्रित करने का तालिका।
कुछ निवेशक सीधे शेअर में निवेश नही करते। पर उन्हें म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना पसंद है। इसका कारण यह कि निवेशक को शेअर मार्केट की जानकारी नही होती । तो कभी किसी के पास शेअर मार्केट का अभ्यास करने के लिए समय नही होता। यह सभी वर्ग म्यूच्यूअल फंड में निवेश करना पसंद करते है। जैसे जैसे पोर्टफोलियो का मूल्य बढ़ता है वैसे वैसे म्यूच्यूअल फंड के यूनिट का भाव बढ़ता है। हर म्यूच्यूअल फंड का पैसा निवेश करने की स्कीम और तरीका अलग अलग होता है। कुछ म्यूच्यूअल फंड शेअर में निवेश करते है तो कुछ सरकारी नकदी में निवेश करते है। तो कुछ दोनों में निवेश करते है।
जो फंड सिर्फ सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते है उन फंड की आय स्थिर रहती है। जो फंड शेअर में निवेश करते है उनके यूनिट के भाव मे उतार चढ़ाव होता है।
म्यूच्यूअल फंड के फायदे
( Advantage of Mutual Funds ):
डायवर्सिफिकेशन (Diversification):
म्यूच्यूअल फंड पूजी का निवेश विस्तारित रूप से करते है। वो जिस कंपनी में निवेश करते है उसकी प्रथम पूरी जानकारी लेते है। जैसे कि उस कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता कितनी है इत्यादि। इसी के साथ वो एक सेक्टर की कंपनी की सेक्टर की दूसरी कंपनी से तुलना करती है ओर उस सेक्टर के 5-7 अच्छी कंपनीया खोजकर निवेश करते है। उनमें से 2 या 3 कंपनी के भाव नीचे गए तो भी म्यूच्यूअल फंड के नेट असेट में ज्यादा अंतर नही पड़ता।
सिस्टमैटिक निवेश प्लान
( Systematic Investment Plan-SIP ):
सिस्टमैटिक योजना बहुत सारे निवेशको को पसंद है क्योंकि इसमें नियमित रूप से समय के अंतर से निवेश करना होता है। इस स्कीम में निवेश हर एक महीने में या 3 महीने में करना होता है। शुरू में कम से कम 5000 रु का निवेश करना पड़ता है और फिर हर महीने 1000 रु भरने पड़ते है।
आसान निवेश कीजिए और आसान तरीके से बाहर निकलिए
( Easy Entry and Exit):
म्यूच्यूअल फंड में एक फॉर्म भर के उसके यूनिट खरीद सकते है और दूसरा फॉर्म भरके उसमेंसे निकाल भी सकते है। जब शेअर खरीदना होता है तब आपको शेअर दलाल के पास रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है और डीमेट एकाउंट चालू करने पड़ता है। यह तरीका म्यूच्यूअल फंड में नही है।
प्रोफेशनल मैनेजमेंट
( Professional Management ):
म्यूच्यूअल फंड की संस्था में सभी उच्च शिक्षित व्यक्तियों का सहभाग होता है। जैसे कि इंजीनियर,एम, बी,ए, सी,ए, वैगरह व्यक्तियों को इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव होता है। वे हमेसा राष्टीय और अंतराष्टीय बाजार पर लक्ष्य केंद्रित करते है और समय समय पर फोर्टफ़ोलिओ में जरूरी बदलाव करते रहते है।
नेट असेट वैल्यू
( Nav- Net Asset Value ):
म्यूच्यूअल फंड याने अनेक लोगो से कम ज्यादा रक्कम जमा करके एकत्रित किया हुआ फंड जो शेअर बाजार में अथवा गवर्मेंट सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है और वह यूनिट से दर्शाया जाता है। उसमें मिलने वाले फंड को म्यूच्यूअल फंड कहते है। म्यूच्यूअल फंड में निवेश करनेवाले को यूनिट दिए जाते है ( शेअर बाजार में निवेश करनेवाले को शेअर मिलते है )।
निवेश किए पैसों पर जो कमाई होती है उसका खर्च निकालकर बचे हुए पैसों के हिसाब से यूनिट के भाव कम ज्यादा होते है। उसे हम नेट असेट वैल्यू कहते है।
उदा:-// एक म्यूच्यूअल फंड ने उसके 100 लाख यूनिट की रु 10 कीमत से बिक्री करके 10 करोड रु जमा किए। खर्च और मैनेजमेंट फीस निकालकर बचे हुए फंड को वह शेअर अथवा सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करता है।
समझ लीजिए कि 3 महीने के बाद उस किए हुए निवेश का बाजार मूल्य 14 करोड 86 लाख हुआ। तो अब एक यूनिट का NAV ( net Asset value ) = 14,86,00,000 / 1,00,00,000 = रु,14,860
म्यूच्यूअल फंड की अलग अलग योजनाएं
( Different Schemes available Under Mutual Funds ):
वर्तमान में बहुत से म्यूच्यूअल फंड उपलब्ध है और उनके पास विविध स्किम उपलब्ध होते है। अब निवेशक को निश्चित क्या करना है। वह उन पर कितना खतरा ले सकते है और कौनसे स्किम में पैसा लगाना है,यह तय करते है।
ग्रोथ फंड
( Growth Fund ):
इस फंड में शेयर की कीमत में वृद्धि का लाभ मिलता है और यह फंड सिर्फ ज्यादा ग्रोथ देनेवाली कंपनी के शेअर में लगाया जाता है। वह कंपनी डिविडेंट नही देते तो भी चलेगा।
इनकम फंड
( Income Fund ):
इस म्यूच्यूअल फंड में निवेश किया तो अंदाजे से 12 या 15 प्रतिशत लाभ मिलता है और यह लाभ सामान्यता: पहले वर्ष से ही शुरू होता है। कुछ म्यूच्यूअल फंड तो साल में तीन चार बार डिविडेंट देते है। इस फंड में धोखा कम होता है।
मनी मार्केट फंड- लिक्विड फंड
( Money Market Fund- Liquid Fund ):
इस फंड में खतरे का प्रमाण कम होता है और दूसरे फंड के मुकाबले इसमे लाभ कम होता है। इसका एवरेज इन्कम रेट बैंक के फिक्स डिपॉज़िट से थोड़ा अधिक है।
गिल्ट फंड
(Gilt Fund ):
अगर निवेशक को थोड़ा भी रिस्क न लेते हुए निवेश करना है तो इसमें पैसा लगाते है।क्योंकि यह फंड सिर्फ सरकारी सिक्योरिटीज में पैसे लगता है।
इक्विटी लिंक सेविंग स्किम
( Equity Link Saving Scheme ):
जिस व्यक्ति की वार्षिक आय ज्यादा है,उनके लिए यह योजना बहुत लाभदायक है क्योंकि उसका लॉकिंग समय 3 वर्ष का है। अगर निवेशक ने किसी कारण से उसके यूनिट्स की बिक्री जल्दी की तो उनको इन्कम टैक्स का फायदा नही मिलता। अगर आपको निवेश अधिक समय के लिए रखनी है तो रख सकते है। इसमें खतरे का प्रमाण ऊपर दिए मुद्दों से अधिक है। वैसे ही फायदा भी अधिक है। इसका फायदा तकरीबन 22 से 28 % होता है।
इंडेक्स फंड
( Index Fund ):
इस फंड में फायदा अथवा नुकसान इंडेक्स पर आधारित होता है। पर जो निवेशक खतरा उठाने के लिए तैयार है,उनके लिए यह फंड एकदम वरदान स्वरूप है। जो आप इस प्रकार से 2005 में सेंसेक्स 3000 पॉइंट से बड़ा और वह 2006 में 4000 पॉइंट ज्यादा बड़ा था। यह दर्शाता है कि निवेशक ने सोचा भी नही होगा उतना फायदा उसे मिलता है। ऐसा भी हुआ है कि केतन पारेख के समय इंडेक्स बहुत नीचे आया था और निवेशको को बहुत नुकसान हुआ था।
वैसे ही जब फंड में इंडेक्स स्थिर होता है तब फायदा का प्रमाण एकदम कम हो जाता है। उस समय इंडेक्स की मूवमेंट साईड वे होती है।
म्यूच्यूअल फण्ड
हेलो दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे मैं आप इस ब्लॉगिंग में आप सभी दोस्तों का स्वागत करता हु मैं इस ब्लॉग में म्यूच्यूअल फंड के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी दिया हु जिसे आप अपनाकर अपने म्युचल फंड के निवेश में काफी मदद करेगा धन्यवाद
( Mutual Fund )
म्यूच्यूअल फण्ड एक ट्रस्ट है। यह संस्था लोगो से पैसा जमा करके अलग अलग सिक्योरिटीज में उन पैसों का निवेश करती है। निवेश उस स्किम के उद्देश्य के तरह होता है। अगर दूसरे शब्दों में बताना हो तो म्यूच्यूअल याने सामान्य लोगो की पूंजी एकत्रित करने का तालिका।
कुछ निवेशक सीधे शेअर में निवेश नही करते। पर उन्हें म्यूच्यूअल फण्ड में निवेश करना पसंद है। इसका कारण यह कि निवेशक को शेअर मार्केट की जानकारी नही होती । तो कभी किसी के पास शेअर मार्केट का अभ्यास करने के लिए समय नही होता। यह सभी वर्ग म्यूच्यूअल फंड में निवेश करना पसंद करते है। जैसे जैसे पोर्टफोलियो का मूल्य बढ़ता है वैसे वैसे म्यूच्यूअल फंड के यूनिट का भाव बढ़ता है। हर म्यूच्यूअल फंड का पैसा निवेश करने की स्कीम और तरीका अलग अलग होता है। कुछ म्यूच्यूअल फंड शेअर में निवेश करते है तो कुछ सरकारी नकदी में निवेश करते है। तो कुछ दोनों में निवेश करते है।
जो फंड सिर्फ सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करते है उन फंड की आय स्थिर रहती है। जो फंड शेअर में निवेश करते है उनके यूनिट के भाव मे उतार चढ़ाव होता है।
म्यूच्यूअल फंड के फायदे
( Advantage of Mutual Funds ):
डायवर्सिफिकेशन (Diversification):
म्यूच्यूअल फंड पूजी का निवेश विस्तारित रूप से करते है। वो जिस कंपनी में निवेश करते है उसकी प्रथम पूरी जानकारी लेते है। जैसे कि उस कंपनी की मुनाफा कमाने की क्षमता कितनी है इत्यादि। इसी के साथ वो एक सेक्टर की कंपनी की सेक्टर की दूसरी कंपनी से तुलना करती है ओर उस सेक्टर के 5-7 अच्छी कंपनीया खोजकर निवेश करते है। उनमें से 2 या 3 कंपनी के भाव नीचे गए तो भी म्यूच्यूअल फंड के नेट असेट में ज्यादा अंतर नही पड़ता।
सिस्टमैटिक निवेश प्लान
( Systematic Investment Plan-SIP ):
सिस्टमैटिक योजना बहुत सारे निवेशको को पसंद है क्योंकि इसमें नियमित रूप से समय के अंतर से निवेश करना होता है। इस स्कीम में निवेश हर एक महीने में या 3 महीने में करना होता है। शुरू में कम से कम 5000 रु का निवेश करना पड़ता है और फिर हर महीने 1000 रु भरने पड़ते है।
आसान निवेश कीजिए और आसान तरीके से बाहर निकलिए
( Easy Entry and Exit):
म्यूच्यूअल फंड में एक फॉर्म भर के उसके यूनिट खरीद सकते है और दूसरा फॉर्म भरके उसमेंसे निकाल भी सकते है। जब शेअर खरीदना होता है तब आपको शेअर दलाल के पास रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है और डीमेट एकाउंट चालू करने पड़ता है। यह तरीका म्यूच्यूअल फंड में नही है।
प्रोफेशनल मैनेजमेंट
( Professional Management ):
म्यूच्यूअल फंड की संस्था में सभी उच्च शिक्षित व्यक्तियों का सहभाग होता है। जैसे कि इंजीनियर,एम, बी,ए, सी,ए, वैगरह व्यक्तियों को इस क्षेत्र का अच्छा अनुभव होता है। वे हमेसा राष्टीय और अंतराष्टीय बाजार पर लक्ष्य केंद्रित करते है और समय समय पर फोर्टफ़ोलिओ में जरूरी बदलाव करते रहते है।
नेट असेट वैल्यू
( Nav- Net Asset Value ):
म्यूच्यूअल फंड याने अनेक लोगो से कम ज्यादा रक्कम जमा करके एकत्रित किया हुआ फंड जो शेअर बाजार में अथवा गवर्मेंट सिक्योरिटीज में निवेश किया जाता है और वह यूनिट से दर्शाया जाता है। उसमें मिलने वाले फंड को म्यूच्यूअल फंड कहते है। म्यूच्यूअल फंड में निवेश करनेवाले को यूनिट दिए जाते है ( शेअर बाजार में निवेश करनेवाले को शेअर मिलते है )।
निवेश किए पैसों पर जो कमाई होती है उसका खर्च निकालकर बचे हुए पैसों के हिसाब से यूनिट के भाव कम ज्यादा होते है। उसे हम नेट असेट वैल्यू कहते है।
उदा:-// एक म्यूच्यूअल फंड ने उसके 100 लाख यूनिट की रु 10 कीमत से बिक्री करके 10 करोड रु जमा किए। खर्च और मैनेजमेंट फीस निकालकर बचे हुए फंड को वह शेअर अथवा सरकारी सिक्योरिटीज में निवेश करता है।
समझ लीजिए कि 3 महीने के बाद उस किए हुए निवेश का बाजार मूल्य 14 करोड 86 लाख हुआ। तो अब एक यूनिट का NAV ( net Asset value ) = 14,86,00,000 / 1,00,00,000 = रु,14,860
म्यूच्यूअल फंड की अलग अलग योजनाएं
( Different Schemes available Under Mutual Funds ):
वर्तमान में बहुत से म्यूच्यूअल फंड उपलब्ध है और उनके पास विविध स्किम उपलब्ध होते है। अब निवेशक को निश्चित क्या करना है। वह उन पर कितना खतरा ले सकते है और कौनसे स्किम में पैसा लगाना है,यह तय करते है।
ग्रोथ फंड
( Growth Fund ):
इस फंड में शेयर की कीमत में वृद्धि का लाभ मिलता है और यह फंड सिर्फ ज्यादा ग्रोथ देनेवाली कंपनी के शेअर में लगाया जाता है। वह कंपनी डिविडेंट नही देते तो भी चलेगा।
इनकम फंड
( Income Fund ):
इस म्यूच्यूअल फंड में निवेश किया तो अंदाजे से 12 या 15 प्रतिशत लाभ मिलता है और यह लाभ सामान्यता: पहले वर्ष से ही शुरू होता है। कुछ म्यूच्यूअल फंड तो साल में तीन चार बार डिविडेंट देते है। इस फंड में धोखा कम होता है।
मनी मार्केट फंड- लिक्विड फंड
( Money Market Fund- Liquid Fund ):
इस फंड में खतरे का प्रमाण कम होता है और दूसरे फंड के मुकाबले इसमे लाभ कम होता है। इसका एवरेज इन्कम रेट बैंक के फिक्स डिपॉज़िट से थोड़ा अधिक है।
गिल्ट फंड
(Gilt Fund ):
अगर निवेशक को थोड़ा भी रिस्क न लेते हुए निवेश करना है तो इसमें पैसा लगाते है।क्योंकि यह फंड सिर्फ सरकारी सिक्योरिटीज में पैसे लगता है।
इक्विटी लिंक सेविंग स्किम
( Equity Link Saving Scheme ):
जिस व्यक्ति की वार्षिक आय ज्यादा है,उनके लिए यह योजना बहुत लाभदायक है क्योंकि उसका लॉकिंग समय 3 वर्ष का है। अगर निवेशक ने किसी कारण से उसके यूनिट्स की बिक्री जल्दी की तो उनको इन्कम टैक्स का फायदा नही मिलता। अगर आपको निवेश अधिक समय के लिए रखनी है तो रख सकते है। इसमें खतरे का प्रमाण ऊपर दिए मुद्दों से अधिक है। वैसे ही फायदा भी अधिक है। इसका फायदा तकरीबन 22 से 28 % होता है।
इंडेक्स फंड
( Index Fund ):
इस फंड में फायदा अथवा नुकसान इंडेक्स पर आधारित होता है। पर जो निवेशक खतरा उठाने के लिए तैयार है,उनके लिए यह फंड एकदम वरदान स्वरूप है। जो आप इस प्रकार से 2005 में सेंसेक्स 3000 पॉइंट से बड़ा और वह 2006 में 4000 पॉइंट ज्यादा बड़ा था। यह दर्शाता है कि निवेशक ने सोचा भी नही होगा उतना फायदा उसे मिलता है। ऐसा भी हुआ है कि केतन पारेख के समय इंडेक्स बहुत नीचे आया था और निवेशको को बहुत नुकसान हुआ था।
वैसे ही जब फंड में इंडेक्स स्थिर होता है तब फायदा का प्रमाण एकदम कम हो जाता है। उस समय इंडेक्स की मूवमेंट साईड वे होती है।
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