नमस्कार दोस्तो मैं प्रेमगेन्द्रे अपने इस ब्लॉग में निवेश के तरीका और टिप के बारे में बताता हूँ जिसे आप फॉलो करके अपने इन्वेस्ट को बड़ा सकते है धन्यवाद दोस्तो आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो
30 day महानतम निवेशक बनने का संकल्प टिप
22day= five lession
buy share sell
मूल्य-निवेश "कमोडिटी-चक्र" से जुड़ा है
आपको या तो इक्विटी में या कमोडिटी में निवेशक मिलेंगे। दोनों का संयोजन बहुत दुर्लभ है। फिर भी ये दोनों एक दूसरे से ऐसे जुड़े हुए है कि किसी "कमोडिटी" की कीमत में वृद्धि से कमोडिटी के शेयर की कीमत में भी वृद्धि हो सकती है।
कभी-कभी हम एक कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि के कारण ही कमोडिटी शेयर को खरीदते है। लेकिन कंपनी उस वस्तु के कच्चे माल के उपभोक्ता के रूप में हो सकती है,जिससे कच्चे माल में होने वाली वृद्धि उस शेयर के लिए मददगार होने की अपेक्षा, दर्दनाक सिद्ध हो सकती है।
तांबे का ही उदाहरण ले। कॉपर शेयर तब ऊपर उठ गए,जब तांबे की कीमतों में वृद्धि हुई लेकिन अधिकांश कॉपर शेयर,तांबा गलाने वाली कंपनियों के है। जब तांबे की कीमतें अधिक होती है तो गलाने वाले मिफ्त में तांबे को परिष्कृत करने के लिए तैयार रहते है ( ताकि तांबा गलाने वालो की "आग जलती रहे। तांबा गलाने का काम बंद कर देना कोई विकल्प नही है)। फिर भी तब गलाने वालो के शेयर ऊपर उठते है,जब तांबे की कीमतों में वृद्धि होती है। यहां आकर मूल्य-निवेश गलत सिद्ध होता है।
शेयरों की बिक्री आपके लाभ या हानि पर निर्भर करती है। वे शेयर जिनमे नुकसान हो रहा है, होल्ड"करके नही रखने चाहिए, चाहे शेयरों की क्षमता के बारे में आपकी कोई भी धारणा हो
नुकसान देने वाली शेयरों को बेचते समय,एक लक्ष्य निर्धारित कर। यह लक्ष्य आपके क्रय-मूल्य 5-10 प्रतिशत से अधिक का नही होना चाहिए। जब वह इस लक्ष्य तक पहुच जाता है, उसे बेच दी। चुकी आप शेयर की कीमत की जांच नही करते या फिर कीमत अचानक गिर जाती है तो उस स्थिति में किसी बड़े नुकसान से बचने के लिए आप अपने क्रय-मूल्य से 5-10 प्रतिशत नीचे का स्टॉप-लॉस लगाए ताकि लक्ष्य तक पहुचने पर शेयर अपने आप बेच दिए जाएं। नुकसान देने वाले शेयरों को बेचने पर आप मानसिक पीड़ा महसूस कर सकते है, हो सकता है आपके द्वारा चुने गए 10 शेयरों में से 7 या 8 शेयरों आपको बेचने पड़े। इसके लिए आपको अनुशासन की आवश्यकता होगी। जब हम एक नुकसान उठाते है तो मनोवैज्ञानिक रूप से हमे महसूस होता है कि हमने हार स्वीकार कर ली है। यदि आप एक सफल निवेशक बनना चाहते है तो एक मानसिक पीड़ा से लड़े।
अपने नुकसान को 10 प्रतिशत के लक्ष्य तक सीमित रखे और अक्सर नुकसान उठाने से आप यह सुनिश्चित कर सकते है कि आप बड़े नुकसान में फंसे नही रहे। शेयर बाजार में आपके अच्छे प्रदर्शन की दिशा में यह आधी लड़ाई है।
लाभ देखा रहे शेयरों को बेचे नही। शेयर से बाहर निकलने के लिए किसी कीमत या लाभ का लक्ष्य निर्धारित न करे। जब तक शेयर बढ़ी हुई मात्रा के साथ बढ़ना जारी रखता है,शेयर के साथ बने रहे। "कीमतों " में अचानक होने वाली गिरावट से बचने के लिए, हर समय शेयर के क्रय-मूल्य से 10 प्रतिशत निकजे का स्टॉप-लॉस लगा कर रखे।
यहां तक कि सबसे सफल निवेशक के पास रखे 10 शेयरों में से 2-3 शेयर ही अच्छा करते है। उनके अच्छे प्रदर्शन का कारण है कि वे नुकसान को अपने नियंत्रण से बाहर नही जाने देते और नुकसान देने वाले सभी शेयरों को बेंच देते है तथा अपने अधिकतम नुकसान के लिए एक लक्ष्य निर्धारित करते है और जबुन्हे लाभ हो रहा हो तो उस शेयर से बाहर निकलने का प्रयास नही करते। वे शेयर को उतना ऊंचा जाने देते है जितना ऊंचा वह जा सकता है। यहां। तक कि जब वे देखते है कि शेयर में "अधि-मूल्यांकन" हो चुका है तो वे तब भी शेयर को "होल्ड" करने में कोई हस्तक्षेप नही करते।
30 day महानतम निवेशक बनने का संकल्प टिप
22day= five lession
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मूल्य-निवेश "कमोडिटी-चक्र" से जुड़ा है
आपको या तो इक्विटी में या कमोडिटी में निवेशक मिलेंगे। दोनों का संयोजन बहुत दुर्लभ है। फिर भी ये दोनों एक दूसरे से ऐसे जुड़े हुए है कि किसी "कमोडिटी" की कीमत में वृद्धि से कमोडिटी के शेयर की कीमत में भी वृद्धि हो सकती है।
कभी-कभी हम एक कमोडिटी की कीमतों में वृद्धि के कारण ही कमोडिटी शेयर को खरीदते है। लेकिन कंपनी उस वस्तु के कच्चे माल के उपभोक्ता के रूप में हो सकती है,जिससे कच्चे माल में होने वाली वृद्धि उस शेयर के लिए मददगार होने की अपेक्षा, दर्दनाक सिद्ध हो सकती है।
तांबे का ही उदाहरण ले। कॉपर शेयर तब ऊपर उठ गए,जब तांबे की कीमतों में वृद्धि हुई लेकिन अधिकांश कॉपर शेयर,तांबा गलाने वाली कंपनियों के है। जब तांबे की कीमतें अधिक होती है तो गलाने वाले मिफ्त में तांबे को परिष्कृत करने के लिए तैयार रहते है ( ताकि तांबा गलाने वालो की "आग जलती रहे। तांबा गलाने का काम बंद कर देना कोई विकल्प नही है)। फिर भी तब गलाने वालो के शेयर ऊपर उठते है,जब तांबे की कीमतों में वृद्धि होती है। यहां आकर मूल्य-निवेश गलत सिद्ध होता है।
शेयरों की बिक्री आपके लाभ या हानि पर निर्भर करती है। वे शेयर जिनमे नुकसान हो रहा है, होल्ड"करके नही रखने चाहिए, चाहे शेयरों की क्षमता के बारे में आपकी कोई भी धारणा हो
नुकसान देने वाली शेयरों को बेचते समय,एक लक्ष्य निर्धारित कर। यह लक्ष्य आपके क्रय-मूल्य 5-10 प्रतिशत से अधिक का नही होना चाहिए। जब वह इस लक्ष्य तक पहुच जाता है, उसे बेच दी। चुकी आप शेयर की कीमत की जांच नही करते या फिर कीमत अचानक गिर जाती है तो उस स्थिति में किसी बड़े नुकसान से बचने के लिए आप अपने क्रय-मूल्य से 5-10 प्रतिशत नीचे का स्टॉप-लॉस लगाए ताकि लक्ष्य तक पहुचने पर शेयर अपने आप बेच दिए जाएं। नुकसान देने वाले शेयरों को बेचने पर आप मानसिक पीड़ा महसूस कर सकते है, हो सकता है आपके द्वारा चुने गए 10 शेयरों में से 7 या 8 शेयरों आपको बेचने पड़े। इसके लिए आपको अनुशासन की आवश्यकता होगी। जब हम एक नुकसान उठाते है तो मनोवैज्ञानिक रूप से हमे महसूस होता है कि हमने हार स्वीकार कर ली है। यदि आप एक सफल निवेशक बनना चाहते है तो एक मानसिक पीड़ा से लड़े।
अपने नुकसान को 10 प्रतिशत के लक्ष्य तक सीमित रखे और अक्सर नुकसान उठाने से आप यह सुनिश्चित कर सकते है कि आप बड़े नुकसान में फंसे नही रहे। शेयर बाजार में आपके अच्छे प्रदर्शन की दिशा में यह आधी लड़ाई है।
लाभ देखा रहे शेयरों को बेचे नही। शेयर से बाहर निकलने के लिए किसी कीमत या लाभ का लक्ष्य निर्धारित न करे। जब तक शेयर बढ़ी हुई मात्रा के साथ बढ़ना जारी रखता है,शेयर के साथ बने रहे। "कीमतों " में अचानक होने वाली गिरावट से बचने के लिए, हर समय शेयर के क्रय-मूल्य से 10 प्रतिशत निकजे का स्टॉप-लॉस लगा कर रखे।
यहां तक कि सबसे सफल निवेशक के पास रखे 10 शेयरों में से 2-3 शेयर ही अच्छा करते है। उनके अच्छे प्रदर्शन का कारण है कि वे नुकसान को अपने नियंत्रण से बाहर नही जाने देते और नुकसान देने वाले सभी शेयरों को बेंच देते है तथा अपने अधिकतम नुकसान के लिए एक लक्ष्य निर्धारित करते है और जबुन्हे लाभ हो रहा हो तो उस शेयर से बाहर निकलने का प्रयास नही करते। वे शेयर को उतना ऊंचा जाने देते है जितना ऊंचा वह जा सकता है। यहां। तक कि जब वे देखते है कि शेयर में "अधि-मूल्यांकन" हो चुका है तो वे तब भी शेयर को "होल्ड" करने में कोई हस्तक्षेप नही करते।

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